कोरोना मरीजों की देखभाल करेंगे नर्सिंग और मेडिकल स्टूडेंट्स

- कोरोना केस बढऩे पर राज्य सरकार की नई व्यवस्था...

- ट्रेनिंग देकर कोरोना सहायक का कार्य सौंपने की तैयारी

- 15000 तक का स्टाइपेंड मिलेगा

By: Sanjeev Kumar Singh

Published: 23 Nov 2020, 09:28 PM IST

सूरत.

दीपावली के बाद सूरत समेत गुजरात में कोरोना मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। राज्य स्वास्थ्य विभाग ने मेडिकल कॉलेज तथा नर्सिंग कॉलेज के विद्यार्थियों को ट्रेनिंग देकर उन्हें कोरोना मरीजों की देखभाल के लिए नियुक्त करने का निर्णय किया है। इसमें सरकारी और सेल्फ फाइनेंस मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थियों को ट्रेनिंग देकर स्टूडेंट्स नर्स को कोरोना सहायक के तौर पर कोविड-19 हॉस्पिटल में नियुक्त किया जाएगा। इस सेवा के बदले में विद्यार्थियों को कैटेगरी के मुताबिक 15,000 और 10,000 रुपए स्टाइपेंड दिया जाएगा।

कोरोना की शुरुआत से लेकर अब तक राज्य में कुल 1.97 लाख पॉजिटिव मिले हैं। दीपावली के बाद सर्दी और प्रदूषण से पिछले कुछ दिनों में सूरत समेत राज्य में कोरोना मरीजों का ग्राफ बढ़ा है। इससे पहले जुलाई और अगस्त में इसी प्रकार की स्थिति आई थी जब कोरोना केस पीक पर था। राज्य में कोविड-19 की परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए मानव संसाधन की कमी होने की आशंका व्यक्त की जा रही है। अहमदाबाद सिविल और एस. वी. पी. अस्पताल में करीब डेढ़ सौ डॉक्टरों को अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों से डेप्यूटेशन पर नियुक्त किया है। आगामी दिनों में कोरोना केस बढऩे पर और भी डॉक्टर और पेरामेडिकल स्टाफ की आवश्यकता होगी। इसलिए राज्य की सरकारी मेडिकल/पेरा मेडिकल कॉलेज, जीएमइआरएस के तहत मेडिकल कॉलेजों, सेल्फ फाइनान्स मेडिकल कॉलेजों और ग्रांट इन एड संस्थाओं में एमबीबीएस, बीडीएस, बीएएमएस, बीएचएमएस, फिजियोथेरापिस्ट, बीएससी नर्सिंग, जीएनएम तथा अंतिम वर्ष में विविध शाखाओं में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को अलग-अलग विषयों पर ट्रेनिंग देकर कोविड-19 डेडिकेटेड हॉस्पिटल में काम सौंपने की तैयारी की जा रही है। ट्रेनिंग की अवधि एक से पांच दिन की रहेगी। सूरत के फिजियोथैरापी कॉलेज में मेडिकल और पेरामेडिकल छात्रों को ट्रेनिंग देने की व्यवस्था की गई है। इन विद्यार्थियों को कोरोना सहायक के तौर पर जवाबदारी दी जाएगी। फाइनल वर्ष एमबीबीएस के छात्रों को पांच दिन में क्लिनीकल मैनेजमेंट ऑफ कोविड-19 और इन्फेक्शन प्रिवेंशन एंड कंट्रोल की ट्रेनिंग देकर नोडल ऑफिसर के अधीन कार्य सौंपा जाएगा।

फाइनल वर्ष बीडीएस के लिए भी पांच दिन में क्लिनीकल मैनेजमेंट ऑफ कोविड-19 और इन्फेक्शन प्रिवेंशन एंड कंट्रोल की ट्रेनिंग दी जाएगी। फाइल वर्ष बीएएमएस, बीएचएमएस के विद्यार्थियों को एक दिन में फिल्ड सर्वेलन्स एंड सुपरविजन, आइसोलेशन एंड क्वारन्टाइन, इन्फेक्शन प्रिवेंशन कंट्रोल और सायको-सोशियल केयर की ट्रेनिंग देकर तहसील स्वास्थ्य अधिकारी या मेडिकल ऑफिसर के अधीन कार्य दिया जाएगा। फाइनल वर्ष फिजियोथेरापिस्ट को भी यही ट्रेनिंग दी जाएगी। फाइनल वर्ष बीएससी नर्सिंग के विद्यार्थियों को तीन दिन में क्रिटिकल केयर असिस्टेंट, इंफेक्शन प्रिवेन्शन एंड कंट्रोल और सायको-सोशियल केयर की ट्रेनिंग देकर नोडल ऑफिसर के अधीन कार्य दिया जाएगा। फाइनल वर्ष जीएनएम के विद्यार्थियों को भी यही ट्रेनिंग दी जाएगी।

फाइनल वर्ष बीएससी माइक्रोबायोलॉजी के विद्यार्थियों को एक दिन में सैम्पल कलेक्शन, पैकेजिंग एंड ट्रांसपोर्टेशन, इन्फेक्शन प्रिवेंशन एंड कंट्रोल और सायको-सोशियल केयर की ट्रेनिंग देकर माइक्रोबायोलॉजी विभाग के इंचार्ज के अधीन कार्य दिया जाएगा। वहीं प्रथम, द्वितीय, तृतीय वर्ष एमबीबीएस, बीडीएस, बीएएमएस, बीएचएमएस, फिजियोथेरापिस्ट, बीएससी नर्सिंग, जीएनएम के विद्यार्थियों को एक दिन में केयर गिवर फोर होम आइसोलेशन, नर्सिंग असिस्टेंट, फिल्ड सर्वेलन्स एंड सुपरविजन, इन्फेक्शन प्रिवेन्शन एंड कंट्रोल की ट्रेनिंग देकर तहसील स्वास्थ्य अधिकारी और मेडिकल ऑफिसर के अधीन कार्य देने की तैयारी की गई है।

जुलाई में कोर्ट गए थे विद्यार्थी

गौरतलब है कि जुलाई में भी राज्य सरकार ने इसी प्रकार की व्यवस्था की थी। इसके बाद कुछ मेडिकल छात्र कोर्ट में गए थे। लेकिन कोर्ट ने भी सरकार के पक्ष में निर्णय दिया था। उसी व्यवस्था को राज्य सरकार ने फिर से नए सीरे से लागू करने का निर्णय किया है।

Sanjeev Kumar Singh Reporting
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