सूरत के हीरा कारोबारियों के बैंक लोन पहले भी रहे हैं विवाद में

सूरत के हीरा कारोबारियों के बैंक लोन पहले भी रहे हैं विवाद में

Pradeep Mishra | Publish: Feb, 15 2018 09:22:01 PM (IST) Surat, Gujarat, India

5 साल पहले विनसम ग्रुप ने किया था सात हजार करोड़ का घोटाला


सूरत.

पंजाब नेशनल बैंक के साथ हीरा कारोबारी नीरव मोदी के करीब साढ़े ग्यारह हजार करोड़ रुपए के फ्रॉड के मामले ने पांच साल पहले विनसम ग्रुप के घोटाले की याद ताजा कर दी।
विनसम ग्रुप ने पांच साल पहले कई राष्ट्रीयकृत और निजी बैंकों से लगभग 7000 करोड़ रुपए का लोन लिया था। बताया जा रहा है कि इस राशि में भी पंजाब नेशनल बैंक 1800 करोड़ रुपए के साथ सबसे आगे थी। यह घोटाला नीरव मोदी के घोटाले जैसा ही था। कई बैंकों ने कंपनी को स्टैंड बाय लेटर्स ऑफ क्रेडिट दिए थे। एलबीएलसी इंटरनेशनल बुलियन बैंक्स के नाम से जारी किए गए गारंटी लेटर इस बात की गारंटी था कि विनसम ग्रुप बुुलियन बैंक्स को भुगतान नहीं कर पाती है तो भारतीय बैंक पेमेंट करेंगे। कुछ दिनों बाद विन्सम ग्रुप ने विदेश में व्यापार को नुकसान होने का दावा कर पेमेंट करने में असमर्थता जताई। बैंक अभी तक उसके पेमेंट के प्रयास में जुटी हैं। इसी तरह सूरत और मुंबई की जानी-मानी डायमंड मैन्युफैक्चरिंग कंपनी जे.बी डायमंड ने भी मुंबई में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया सहित अन्य 12 बैंकों से लगभग 700 करोड़ रुपए का लोन लिया था, जो उसने बाद में चुकाने में असमर्थता जताई और बैंक से लोन रिस्ट्रक्चरिंग की मांग की। अभी तक दोनों के बीच विवाद चल रहा है।

बैंकों ने बंद कर दिया था हीरा उद्यमियों को कर्ज देना
जेबी डायमंड की ओर से लोन की भरपाई नहीं किए जाने के बाद बैंकों के समूह ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया तथा जैम्स एंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल से जेबी डायमंड को ब्लैक लिस्ट करने की मांग की थी। इसके बाद बैंक अधिकारियों ने सूरत समेत अन्य शहरों में इस कंपनी की संपत्ति जब्त करने की कार्रवाई की। हीरा कारोबारी की ओर से इतनी बड़ी रकम का लोन लेने के बाद भरपाई नहीं करने से बैंकों ने कुछ समय तक हीरा उद्यमियों को लोन देना बंद कर दिया था।

लोन देने से पहले क्रेडिट रेेटिंग की मांग
जेबी डायमंड की ओर से लोन की भरपाई में आनाकानी करने के कारण बैंकों ने हीरा उद्यमियों को लोन देना बंद कर दिया था। इस बारे में जैम्स एंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल ने वित्तमंत्री सहित केन्द्र सरकार से बार-बार हीरा उद्योग को बैंकों से लोन देने के लिए गुहार लगाई। इस पर बैंक तैयार तो हुए, लेकिन उन्होंने सभी हीरा उद्यमियों को उनकी यूनिट की क्रेडिट रेटिंग तैयार कर लोन के कागजात के साथ जमा करने को कहा। हीरा उद्यमियों ने बैंकों की यह बात नहीं मानी।

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