Surat : चिकित्सक परेशान : संदिग्ध है तो टेस्ट क्यों नहीं होता ? नहीं करने का आदेश क्यों !...

- ट्रोमा सेंटर में संदिग्ध डेडबॉडी का कोरोना एंटीजन टेस्ट करने पर बवाल

- स्वास्थ्य विभाग ने इमरजेंसी में आने वाले मरीजों व शवों के टेस्ट के लिए जारी नहीं किया कोई सर्कुलर

- एक माह में ट्रोमा सेंटर में आए छह एमएलसी केस और चार डेडबॉडी की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई

By: Sanjeev Kumar Singh

Published: 28 Oct 2020, 09:59 PM IST

सूरत.

कोरोना की रोकथाम के लिए आरटीपीसीआर और एंटीजन टेस्ट अधिक संख्या में करने पर जोर दिया जा रहा है। वहीं, दूसरी तरफ न्यू सिविल अस्पताल के ट्रोमा सेंटर में डेडबॉडी का एंटीजन टेस्ट करने को लेकर नीति स्पष्ट नहीं है। राज्य सरकार ने सात माह बाद भी इमरजेंसी ड्यूटी के दौरान चिकित्सकों को कोरोना टेस्ट और संक्रमण से बचाने के लिए कोई सर्कुलर जारी नहीं किया है। मंगलवार को एक संदिग्ध मृतक का एंटीजन टेस्ट पॉजिटिव आया है। ट्रोमा सेंटर में एमएलसी मरीज और डेडबॉडी के एंटीजन टेस्ट में अब तक 10 की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है।

उधर, मनपा स्वास्थ्य विभाग ने शहर के सभी अर्बन हैल्थ सेंटरों तथा कुछ निश्चित स्थलों पर एंटीजन टेस्ट की सुविधा शुरू की है। अब तक सूरत और जिले में कोरोना के 35,786 केस आए हैं। इसमें 998 की मौत हो चुकी है। वहीं, 32,977 मरीज स्वस्थ हुए।
दूसरी तरफ, शहर में संदिग्ध कोरोना मृतकों की संख्या भी अधिक है, लेकिन उनका कोरोना टेस्ट नहीं होने के कारण उसे पॉजिटिव केस नहीं माना जाता है। न्यू सिविल अस्पताल के ट्रोमा सेंटर इमरजेंसी विभाग में कोरोना टेस्ट करने की सुविधा 25 सितम्बर से शुरू की गई है, लेकिन कोरोना टेस्ट किनका करना है और किनका नहीं! इसको लेकर डॉक्टर भी असमंजस में है।


ऐसे हुआ बवाल

सचिन जीआईडीसी निवासी संदीप पवार (35) को मंगलवार को बेहोशी की हालत में न्यू सिविल अस्पताल लेकर आए थे। कोरोना से लक्षण होने के कारण चिकित्सकों ने डेडबॉडी का एंटीजन टेस्ट करवाया, जिसमें रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इसके बाद चिकित्सकों ने गाइडलाइंस के मुताबिक शव का अंतिम संस्कार करवाया, लेकिन डेडबॉडी के एंटीजन टेस्ट पॉजिटिव होने की खबर जैसे ही आरएमओ को हुई तो वे ऑन ड्यूटी चिकित्सक पर बिफर पड़े। बताते है कि उन्होंने कहा था कि डेडबॉडी का एंटीजन टेस्ट करने के लिए मना किया गया है, लेकिन इमरजेंसी विभाग में आने वाले मरीजों के एंटीजन टेस्ट के लिए क्या गाइडलाइन है, इसके बारे में कोई सर्कुलर है।

ऐसे तो चिकित्सक हो सकते हैं संक्रमित

चिकित्सकों का कहना है कि अस्पताल प्रशासन ने इमरजेंसी विभाग में आने वाली डेडबॉडी के एंटीजन टेस्ट को लेकर कोई नीति स्पष्ट नहीं है। पिछले दिनों पुलिस कुछ डेडबॉडी को पोस्टमार्टम के लिए लाई थी। इसमें कोरोना से लक्षण होने की जानकारी दी थी। ऐसे मामलों में डेडबॉडी का एंटीजन टेस्ट किया गया तो संदिग्ध मृतकों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। चिकित्सकों ने कहा कि संदिग्ध मृतकों के एंटीजन टेस्ट नहीं करेंगे तो पोस्टमार्टम के दौरान चिकित्सकों और परिजनों को संक्रमित होने की आशंका बढ़ जाएगी।

मृतकों की संख्या कम बताने का खेल तो नहीं !

गौरतलब है कि मनपा को एंटीजन टेस्ट पॉजिटिव आने पर ही मृतकों को कोरोना से मौत के रिकार्ड में शामिल करने की मजबूरी होती है, लेकिन अस्पताल प्रशासन संदिग्ध मामलों में भी एंटीजन टेस्ट नहीं करने से आशंका होती है कि पॉजिटिव मृतकों की संख्या को घटाकर दिखाने में जुटी है।

ट्रोमा में 470 टेस्ट में से 10 पॉजिटिव

ट्रोमा सेंटर में कोरोना एंटीजन टेस्ट की सुविधा 25 सितम्बर से शुरू की गई है। सूत्रों ने बताया कि चिकित्सकों के द्वारा एमएलसी मरीजों को भर्ती करने के पहले टेस्ट करना जरूरी होता है। इसके अलावा संदिग्ध डेडबॉडी का भी कोरोना टेस्ट किया जाता है। अब तक इमरजेंसी विभाग में 470 एमएलसी मरीजों व डेडबॉडी का कोरोना एंटीजन टेस्ट किया गया है। इस दौरान कुल दस मामलों में कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। इसमें छह एमएलसी मरीज तथा चार संदिग्ध डेडबॉडी की एंटीजन टेस्ट पॉजिटिव आया है।


संदिग्ध मृतकों में न्यूमोनिया पॉजिटिव

शहर में कोरोना मरीजों की संख्या सबसे अधिक जुलाई में सामने आई थी। प्रतिदिन दस से अधिक पॉजिटिव मरीजों की मौत हो रही थी। इसके अलावा 15 से 20 डेडबॉडी को कोरोना संदिग्ध मानकर गाइडलाइंस के मुताबिक अंतिम संस्कार करवाया गया। इमरजेंसी विभाग के चिकित्सकों ने बताया कि जुलाई और अगस्त में संदिग्ध डेडबॉडी के पोस्टमार्टम किए गए थे। यह सभी मृतक कोरोना हॉट स्पॉट क्षेत्रों से आ रहे थे। लेकिन उस समय एंटीजन टेस्ट की सुविधा नहीं थी। चिकित्सकों ने शव से नमूने लेकर फोरेन्सिक लैब भेजे थे। उनकी रिपोर्ट अब आना शुरू हो गई है। इसमें ज्यादातर संदिग्ध डेडबॉडी में न्यूमोनिया या कोरोना से लक्षण की रिपोर्ट आ रही है।

एमएलसी और इमरजेंसी ऑपरेशन के लिए टेस्ट

इमरजेंसी के लिए ट्रोमा सेंटर आने वाले एमएलसी मरीजों को कोरोना से लक्षण होने पर एंटीजन टेस्ट करने की सुविधा है। मरीज को तुरंत ऑपरेशन थियेटर में लेना हो तो उसके पहले भी टेस्ट करते हैं। संदिग्ध डेडबॉडी का टेस्ट नहीं करना है। चिकित्सकों को परिजनों से पूछताछ कर लक्षण के आधार पर संदिग्ध मृतकों को चिन्हित कर गाइडलाइन से अंतिम संस्कार करवाया जाता है।

- डॉ. रागिनी वर्मा, अधीक्षक, न्यू सिविल अस्पताल, सूरत।

Sanjeev Kumar Singh Reporting
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