अपनों के बीच ही सुरक्षित नहीं है आधी दुनिया

अपनों के बीच ही सुरक्षित नहीं है आधी दुनिया

Dinesh M.Trivedi | Publish: Oct, 14 2018 12:28:53 PM (IST) Surat, Gujarat, India

- बलात्कार के ९५ फीसदी मामलों में परिचित ही लिप्त
- टूटता सामाजिक ताना-बाना है सबसे बड़ा कारण

केस १

८ सितम्बर को सगे चाचा द्वारा अपनी विवाहित भतीजी से बलात्कार का मामला सामने आया था। सूरत से राजकोट स्थित पीडि़ता की ससुराल ले जाने के दौरान उसने स्लीपर बस में उसे खिडक़ी से बाहर फेंकने की धमकी देकर जबरदस्ती की।

केस २
११ सितम्बर को अमरोली क्षेत्र में पन्द्रह वर्षीय किशोरी के साथ यौन शोषण का मामला सामने आया था। उसका सौतेला पिता ही उसे डरा-धमका कर तीन माह से उसका यौन शोषण कर रहा था।

केस ३
२८ सितम्बर को रांदेर क्षेत्र में ७० वर्षीय वृद्ध ने अपनी मूक-बधिर पुत्रवधू से बलात्कार किया। सुबह पुत्र के काम पर जाने के बाद उसे अकेला पाकर उसके साथ जबरदस्ती की।

केस ४
२९ सितम्बर को डिंडोली में पांच-पांच साल की दो बच्चियों से बलात्कार के मामले सामने आए। इनमें एक मामले में पड़ोसी पकड़ा गया। दूसरे मामले में बालिका के पन्द्रह वर्षीय सगे भाई ने ही उसके साथ यह घिनौनी हरकत की थी।

सूरत. शहर समेत देश भर में मासूम बच्चियों और महिलाओं से बलात्कार की जो भी घटनाएं सामने आ रही हैं, उन पर गौर करें तो आधी दुनिया कही जाने वाली महिलाएं अपनों के बीच ही सुरक्षित नहीं हैं। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो द्वारा २०१५ में किया गया वर्गीकृत विश्लेषण भी इस बात की पुष्टि करता है। ये आंकड़े बताते हैं कि वर्ष २०१५ में देश भर में हुए बलात्कार के ९५ फीसदी मामलों में पीडि़ताओं के परिचित ही लिप्त थे। डेढ़ फीसदी मामलों में तो खून के रिश्तेदार थे। जैसे पिता,भाई, दादा, पुत्र जिन पर पीडि़ताएं सबसे अधिक भरोसा कर सकती थी कि वे कभी उनके साथ ऐसा नहीं कर सकते हैं। सूरत शहर में भी ऐसे मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही हैं। आए दिन महिलाओं और मासूम बच्चियों से बलात्कार और छेड़छाड़ के मामले सामने आ रहे हैं। सितम्बर में ही बलात्कार और छेड़छाड़ की एक दर्जन घटनाएं सामने आई हैं। इनमें चार मामले ऐसे थे, जिनमें आरोपित पीडि़ताओं के घर में रहने वाले खून के रिश्तेदार थे। जो कि बेहद गंभीर है।


टूटता सामाजिक ताना-बाना अहम कारण


न्यू सिविल अस्पताल के मनोचिकित्सक कमलेश दवे ने बताया कि वैसे तो परिवार में होने वाले इस तरह के यौन अपराधों के लिए कई कारण जिम्मेदार हैं, लेकिन शहरीकरण की वजह से टूटता सामाजिक ताना-बाना मुख्य वजह है। ऐसा नहीं है कि पहले इस तरह की घटनाएं नहीं होती थीं। इनमें जो इजाफा हो रहा है, उसके पीछे अहम कारण है कि शहरीकरण के चलते लोग अपने गांव अपने समाज से दूर हो रहे हैं। शहर में भले आदमी लाखों लोगों के बीच रहता है, लेकिन अपने लोगों के नहीं होने का कारण वह सामाजिक तौर पर अकेला होता है। उसमें समाज का डर भी नहीं रहता है।


शारीरिक जरूरत होती है हावी


सूरत में रोजगार को लेकर बड़ी संख्या में लोग अकेले रहते हैं। वे अपने परिवार से दूर होते हैं। वे अपनी शारीरिक जरूरतें पूरी नहीं कर पाते है और कोई विकल्प नहीं होने पर वे गंभीर अपराध भी कर गुजरते हंै। इन्हीं कारणों से पूर्व में शहर में वरियावी बाजार में रेडलाइट एरिया चलता था।

सामाजिक खुलापन


ऐसा नहीं है कि पूर्व में ऐेसी घटनाएं नहीं होती थी। आज समाज में काफी खुलापन आया है। महिलाएं भी जागरूक हुई हैं और वह खुल कर सामने आने लगी हंै। इस वजह से समाज का यह दूषण भी सामने आ रहा है।


माहौल का प्रभाव


ङ्क्षडडोली में पन्द्रह वर्षीय किशोर के मामले में मनोचिकित्सक का कहना है कि मुझे नहीं लगता है कि उसे कोई मनोरोग हो। इस उम्र में वह सही गलत की पहचान करने में सक्षम नहीं होता है। वह खुद को उस माहौल के प्रभाव से नहीं बचा पाता। जिस माहौल में वह होता है। ऐसे में कई बार इस तरह की घटनाएं होती हैं।

 

एनसीआरबी की ओर से जारी बलात्कार के २०१५ के आंकड़े
कुल मामले दर्ज हुए - ३४६५१
परिचित व्यक्ति - ३३०९८- ९५ फीसदी
दादा, पिता, भाई व पुत्र - ४८८-१.४७
नजदीकी रिश्तेदार - ८९१-२.६९
दूर के रिश्तेदार -१७८८-५.४०
मालिक या सहकर्मी-९५०८-५.४०
लिवइन या पूर्व पति -७०५-२.१३
मित्र -७६५५-२३.१२
अन्य परिचित व्यक्ति -११५०६-३४.७६

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