सूरत के दो युवा समाजसेवी ६६ सीनियर सिटीजंस का सहारा बने

सूरत के दो युवा समाजसेवी ६६ सीनियर सिटीजंस का सहारा बने
सूरत के दो युवा समाजसेवी ६६ सीनियर सिटीजंस का सहारा बने

Dinesh M.Trivedi | Updated: 21 Aug 2019, 12:41:15 PM (IST) Surat, Surat, Gujarat, India

सीनियर सिटीजन डे पर विशेष : ..ताकि जीवन के अंतिम पड़ाव में कोई भोजन से वंचित न रहे

सूरत. भागदौड़ भरी जिंदगी में टूटते सामाजिक ताने-बाने के बीच जहां कई लोग अपने बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल नहीं करते, वहीं सूरत के दो समाजसेवी युवाओं ने एकाकी जीवन जी रहे ६६ सीनियर सिटीजंस का सहारा बनने का बीड़ा उठाया है। मां अन्नपूर्णा टिफिन सेवा समिति शुरू करने वाले पंकज गुप्ता और रेणु अग्रवाल ६० की दहलीज पार कर चुके अकेले रहने वाले वृद्धों को सुबह-शाम का निशुल्क भोजन मुहैया कराते हैं। इस सेवा में उन्हें कुछ और लोगों का सहयोग भी मिल रहा है। जैसे-जैसे सहयोगी जुड़ रहे हैं, वह अपनी सेवा का दायरा बढ़ा रहे हैं।
हरियाणा के भिवानी के मूल निवासी और बतौर बीमा सलाहकार काम करने वाले पंकज ने बताया कि वह पांच साल से सामाजिक सरोकार के कार्यों में सक्रिय हैं। एक बार वह मंदिर में पुजारी को श्राद्ध का भोजन देने गए। पुजारी नहीं मिला तो बाहर एक वृद्ध को भोजन कराया, जो शायद दो दिन से भूखा था। उसने बताया कि उसका पुत्र उसे समय पर खाना नहीं देता। पंकज को समाज सेवा से जुड़ी रेणु अग्रवाल का साथ मिला। उन्होंने २५ दिसम्बर, २०१८ को मां अन्नपूर्णा टिफिन सेवा समिति शुरू की। पहले दिन एक टिफिन से शुरुआत की गई। जैसे-जैसे अन्य लोगों का सहयोग मिला, वह दायरा बढ़ाते गए। नीलगिरी में उन्होंने एक कमरे में रसोईघर बनाया। खाना बनाने के लिए दो महिलाओं को रखा तथा टिफिन पहुंचाने के लिए ऑटो रिक्शा शुरू किया। फिलहाल वह गोडादरा से अडाजण और पार्ले प्वॉइंट से वराछा तक ६६ सीनियर सिटीजंस को टिफिन पहुंचाते हैं। टिफिन में सुबह रोटी-सब्जी, दाल-चावल और शाम को कढ़ी-खिचड़ी आदि भेजे जाते हैं। बुजुर्गों की बीमारियों को ध्यान में रख कर खाना तैयार किया जाता है। वार-त्योहार मिठाई भी भेजी जाती है। उन्होंने बताया कि और भी जरूरतमंद बुजुर्गों के फोन आ रहे हैं, लेकिन समिति संसाधनों के कारण वह उन तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। राजस्थान के सीकर जिले के तत पीपलिया गांव की मूल निवासी रेणु ने बताया कि हमारा इरादा है कि देशभर में इस तरह का काम हो, ताकि जीवन के अंतिम पड़ाव में कोई भोजन से महरूम न रहे।


दो परिवारों को हुआ जिम्मेदारी का एहसास
परवत पाटिया और रांदेर रोड पर दो सीनियर सिटीजन के लिए टिफिन शुरू किए गए थे। जब उनके पुत्रों को इस बारे में पता चला तो उन्हें अपनी जिम्मेदारी का एहसास हुआ। उन्होंने दोनों को खाना पहुंचाना शुरू कर दिया। उन सीनियर सिटीजंस के कहने पर टिफिन बंद कर दिए गए।


जिनका बेटा जेल में, उनकी भी सहायता
पत्नी के साथ विवाद को लेकर एक युवक को जेल हो गई थी। उसने लाजपोर जेल में मेडिटेशन करवाने वाले मेघराज कदमवाला के जरिए पंकज और रेणु तक उसके माता-पिता के लिए भोजन तथा आश्रय की व्यवस्था करने का संदेश पहुंचाया। पंकज ने उन्हें किराए के घर से बॉम्बे मार्केट के रैन बसेरे में शिफ्ट किया। उन्हें दोनों समय टिफिन पहुंचाया जाता है।
दिनेश एम.त्रिवेदी

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