आठ सालों में नहर पर नहीं हो सका पुल और पुलिया का निर्माण, एक दर्जन गांव के लोग हो रहे प्रभावित

सरकार ने भले ही किसानों के लिए सिंचाई सुविधाएं बढ़ा दी हो, लेकिन नहर खोदकर उनकी और भी परेशानी बढ़ा दी है।


टीकमगढ़.सरकार ने भले ही किसानों के लिए सिंचाई सुविधाएं बढ़ा दी हो, लेकिन नहर खोदकर उनकी और भी परेशानी बढ़ा दी है। किसानों को गांव और खेतों पर जाने के लिए न तो पुल बनाए गए और न ही पुलियां निर्माण की गई। ठेकेदारों द्वारा नहर निर्माण के समय चूना और पत्थरों को डाला गया। लेकिन काम होते ही ठेकेदारों के साथ अधिकारी भी रबूचक्कर हो गए। जहां किसानों को उसी खेत पर जाने के लिए ३ से ५ किमी का चक्कर लगाना पड़ रहा है।
तालाब जोड़ो अभियान के तहत करोड़ों रुपए की लागत से हरपुरा नहर का निर्माण किया गया था। इस नहर से १२ से अधिक तालाबों को जोड़ा गया। नहर की लम्बाई ४५ किमी है, जो हरपुरा से मोहनगढ़ के बृषभानपुरा लक्ष्मीबाई तालाब तक फैली हुई है। यह नहर कही गांव के छोर से निकाली गई तो कही किसानों की जमीनों के बीच से निकाली गई है। जहां किसानों का खेतों पर जाना प्रभावित हो गया है। किसानों द्वारा नहर ठेकेदार और जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को पुलिया और पुल निर्माण की मांग रखी गई। उनके द्वारा पुल, पुलिया निर्माण के लिए चूना और पत्थर डाले गए। लेकिन काम होते ही ठेकेदार और जलसंसाधन के जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी रबूचक्कर हो गए।
ग्रामीणों ने की शिकायत
बौरी निवासी किसान किशोरी लाल यादव, विनोद चौरसिया, काशीराम अहिरवार, हल्लू ने बताया कि २०१२ से नहर का निर्माण शुरू किया गया था। यह नहर खेतों के बीच से निकाली गई। लेकिन वहां पर जाने के लिए ३ से ५ किमी की दूर तक पुल और पुलिया नहीं बनाई गई है। जिसके कारण किसानों को खेती के समय परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
५ से १० किमी की है दूरी
किसान नवल किशोर यादव, भगवानदास अहिरवार, खिलान कुशवाहा, भइयन यादव, ग्याप्रसाद यादव, रामचरण, पन्ना ने बताया कि नहर निर्माण के समय विरोध किया गया था। जिसको लेकर ठेकेदारों और विभाग के अधिकारियों ने खेत पर जाने के लिए पुलिया और पुल निर्माण की बात कही थी। इंजीनियरों द्वारा चूना भी डाला गया था। सामग्री भी रखी गई थी। नहर निर्माण होते ही वह रातों राते सामान लेकर रबूचक्कर हो गए। कलेक्टर से शिकायत की। लेकिन मामले को लेकर कोई कार्रवाई नहीं की गई।


आठ वर्षाे से लगातार करते आ रहे शिकायत
दरगांयकलां निवासी गुलाब सिंह यादव, मकुंदी केवट, महेंद्र यादव, चंद्रभान, भानसिंह ठाकुर, पुरूषोत्तम तिवारी द्वारा नहर का पुल चौड़ा और दूसरी पुलिया निर्माण के लिए ठेकेदारों से मांग की थी। उनके द्वारा कलेक्टर से स्वीकृति लाने की बात कही थी। सैकड़ों किसानों के साथ जनसुनवाई में पहुंचे। लेकिन उनके द्वारा आश्वासन ही दिया गया।
इन जगहों पर निर्माण होनी थी पुल और पुलिया
हरपुरा नहर निर्माण होने सिंचाई के लिए तो सुविधाएं हुई है। लेकिन खेतों और गांवों में जाने के लिए असुविधा हो गई है। गांव के पीछे से गांव तक पहुंचने के लिए ५ से किमी का चक्कर लगाना पड़ता है। जहां चरपुवां, मानिकपुरा, हनुमानसागर, बौरी, खेरा, शिवराजपुरा, दरगांयकलां के साथ अन्य गांवों में परेशानी बनी हुई है।
इनका कहना
ठेकेदारों ने नहर निर्माण का कार्य पूरा कर लिया है। अब शासन द्वारा रखरखाव के लिए ही राशि दी जाती है। जिसमें पुल और पुलिया का निर्माण होना असंभव है। मामले की चर्चा उच्च विभाग से की जाएगी।
आरपी त्रिपाठी ईई जलसंसाधन विभाग टीकमगढ़।

akhilesh lodhi Reporting
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