10 भवनों को किया गया था डेड़, 7 को छोड़ ३ को तोड़ा गया

10  भवनों को किया गया था डेड़, 7 को छोड़ ३ को तोड़ा गया

Akhilesh Lodhi | Updated: 20 Aug 2019, 08:00:00 AM (IST) Tikamgarh, Tikamgarh, Madhya Pradesh, India

.नगर के व्यस्तम मार्गो पर वर्षो पुराने भवन और इमारतें बनी हुई है। जो कई जगहों से टूट चुकी है।

टीकमगढ़.नगर के व्यस्तम मार्गो पर वर्षो पुराने भवन और इमारतें बनी हुई है। जो कई जगहों से टूट चुकी है। पीडब्ल्यूडी द्वारा इन इमारतों को वर्षो पहले डेड़ घोषित किया गया था। इसके बाद भी इन्हें खाली नहीं कराया गया। बारिश के दौरान यह इमारतें कभी भी ढह सकती है। जहां लोगों को हादसों का अंदेशा बना हुआ है। जिससे कभी भी जनहानि के साथ आर्थिक स्थिति का सामना उठाना पड़ सकता है।
नगर प्रशासन और पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा शहर के बीचों-बीच वर्षो पुराने भवन और इमारतों की जांच की गई थी। जांच के दौरान इन भवनों की दीवालें कमजोर और छतों के साथ पेड़ों का उगना शुरू हो गया था। जिसमें अगस्त २००८ में ९ इमारतों को डेड़ घोषित किया गया था। जिसके चलते ३ इमारतों को तोड़ दिया गया है। बांकी भवन और इमारतों का बारिश और अन्य मौसमों में अपने आप गिरना शुरू हो गया है। कहीं दीवालें गिररही है तो कही की ईटों का चूर-चूर होना शुरू हो गया है। इसके साथ ही मुख्य बाजार के बीच बनी इमारत की दीवाल तो कभी पुल की दीवाल और स्कूल के छत की दीवाले गिर चुकी है। इसके साथ ही कई जगहों की तो दीवाले धसक चुकी है। आनन-फानन में नगरपालिका और पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा मरम्मत की गई। इन भवनों की यह स्थिति है कि कभी भी किसी भी समय खण्डहर भवन ढह सकते है।
इन भवनों को किया गया डेड़ घोषित
नगर में वर्षो पुराने भवन और इमारतों को पीडब्ल्यूडी द्वारा नजाई बाजार गल्ला मंडी का एक दरवाजा छोड़ सभी दरवाजेें, भैरव बाबा वार्ड ५ के चिमनी वाला भवन, वार्ड ८ में स्थित मार्केट और उसमें जनता दल वाला ऑफिस, कटरा बाजार के पास लौसारी भवन, वार्ड ५ को पोस्ट ऑफिस भवन, रौराइया दरवाजा का मॉडल स्कूल, नजरबाग मैदान के पास गल्र्स स्कूल, तोप बग्गी खाना और मधुकरशाह की पुराना बस स्टेण्ड स्थित क्षतिग्रस्त दुकानों को वर्ष २००८ में डेड़ घोषित किया गया था। जिसमें तीन भवनों में तोप खाना, कटरा बाजार सब्जी मंडी के साथ एक अन्य भवन को तोड़ा गया है।
केस-०१
मुख्य बाजार में पुरानी नजाई को राजशाही दौर में बनाया गया था। इसके मुख्य चार दरवाजें है। कुछ दरवाजे अपने आप ढह गए है। तो कुछ के छतों की दीवाले कई जगहों से टूट चुकी है। राजशाही दौर के समय बनाए गए दरवाजों के ऊपर की गुमटें भी गिर गई है। ईट का भी चूर-चूर होना शूरू हो गया है। जबकि इस इमारत को प्रशासन द्वारा डेड़ घोषित किया गया है। नगरपालिका द्वारा कई बार दुकानदारों सहित निवास करने वाले लोगों को नोटिस दिए गए है। इसे बाद भी भवनों को खाली नहीं कराया गया है। मुख्य दरवाजों को छोड़ सभी को गिराने के आदेश दिए थे। लेकिन मामला न्यायालय में होने के कारण देरी हो रही है।

केस-०२
गल्र्स हायर सेकेण्डरी के भवन को भी डेड़ घोषित किया गया था। इसके बाद भी इस भवन में कक्षा ९वीं से १२वीं तक की कक्षाएं संचालित की जाती है। स्कूल के निर्माण के लिए लंबे समय से मांग की जा रही हैं। अब शासन द्वारा इसके लिए राशि स्वीकृत होने के बाद भी निर्माण नहीं किया जा रहा हैं। इस भवन के निर्माण की मुख्य समस्या, इसका डिस्मेंटल होना हैं। जब यह भवन गिराया जाएगा तो उस दौरान कक्षाएं कहंा पर लगेंगी। इस समस्या के चलते इस स्कूल का काम अधर में लटका हुआ हैं।
केस-03
राजशाही दौर में अग्रेजों ने पुरानी टेहरी के पुल का निर्माण किया था। इस पुल के नीचे से सागर की ओर और ऊपर से ललितपुर की ओर वाहनों सहित लोगों का आवागमन हो रहा है। लेकिन यह पुल जर्जर की हालत में हो गया है। जिसके कारण दोनों ओर से मिट्टी का खिसकना शुरू हो जाता है। हालांकि पीडब्ल्यूडी द्वारा पुल की मरम्मत के लिए पत्र भेज दिया है।
केस-०४
पुराना पोस्ट ऑफिस जीर्णक्षीर्ण की स्थिति में पड़ा हुआ है। दीवालों पर पेड़ों का उगना शुरू हो गया है। इस भवन को संबंधित विभाग को गिराने के निर्देश दिए है। लेकिन मामले को लेकर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
इनका कहना
पुराने भवनों और इमारतों को डेड़ घोषित करके संबंधित विभाग को निर्माण के लिए सौंप दिया गया है। अगर नहीं किया गया तो बरिष्ट अधिकारियों से चर्चा की कार्रवाई की जाएगी।
डीके शुक्ला एसडीओ पीडब्ल्यूडी टीकमगढ़।

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