video: शीतलहर के साथ रोग की मार, पेटा काश्तकार किससे करें पुकार

खीरा-ककड़ी की लगभग पचास फीसदी फसल रोग की चपेट में आने से किसानों की कमर टूट गई है।

 

By: pawan sharma

Published: 15 Jan 2018, 08:26 AM IST

राजमहल. बनास नदी पेटे की सैकड़ों बीघा भूमि में करोड़ों की लागत से बोई गई फसलों को पहले बायीं मुख्य नहर में हुए रिसाव ने नुकसान पहुंचा दिया। अब खीरा-ककड़ी की लगभग पचास फीसदी फसल रोग की चपेट में आने से किसानों की कमर टूट गई है। आपदा यहीं नहीं रुक रही क्षेत्र में चल रही शीत लहर से हो रहे नुकसान को लेकर भी किसान परेशान हैं।

 

 

रोग को दूर करने के लिए दवा का छिडक़ाव भी पूरा नहीं हुआ कि अब धुवां करके शीतलहर से बचाव करना पड़ रहा है। बनास की धार वाले स्थानों पर कई जगह साडिय़ों की ओट बनाकर शीतलहर से नुकसान को रोकने का जतन किया जा रहा है। बनास पेटे होते नुकसान को लेकर किसान प्रशासन से मुआवजे की मांग करते हैं तो प्रशासन अस्थायी आवंटन रद्द होने का हवाला देकर मुंह मोड़ लेता है।

 

 

इससे चलते लाखों के नुकसान को होता देख ये निर्धन किसान टपकती आंसुओं को पलकों में छुपा लेते हैं। ऐसे किसानों को ये भय रहता है कि वर्षों पूर्व अस्थायी आवंटन को रद्द करने का हवाला देकर कहीं प्रशासन इनको उन्हें बनास पेटे से हटा नहीं दे।

 

 

लौकी, करेले व मिर्च पर ध्यान
किसानों ने बनास पेटे खीरा-ककड़ी, लौकी, कद्दू, करेला की बुवाई की थी, लेकिन बनास का पानी बढऩे के साथ ही रोग के चलते खीरा-ककड़ी इन दिनों लगभग नष्ट हो गई है। इससे किसान अब करेला, कद्दू, लौकी के सहारे घाटे से उभरने की तैयारी कर रहे हैं।

 


30 बकरों की मौत
पीपलू. क्षेत्र के ग्राम रानोली गांव में शुक्रवार को जहरीला दाना खाने से 30 बकरों की मौत हो गई है। ये बकरे कैलाश खटीक के थे। उसने आरोप लगाया कि किसी ने चारे में जहर मिला दिया। इससे बकरों की मौत हो गई। कैलाश ने बताया कि कुछ बकरों की हालात खराब भी हो गई। उनका पशु चिकित्सक से उपचार कराया गया। जहरीले दाने से बकरों की हुई मौत की पुष्टि चिकित्सक प्रवीण सोनी ने की है।

Show More
pawan sharma
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned