scriptDrivers removed from garbage collection vehicles | कचरा संग्रहण वाहनों से हटाए चालक, जिला कलक्टर व आयुक्त को सौंपी शिकायत | Patrika News

कचरा संग्रहण वाहनों से हटाए चालक, जिला कलक्टर व आयुक्त को सौंपी शिकायत

locationटोंकPublished: Dec 26, 2023 11:20:27 am

Submitted by:

pawan sharma

घर-घर कचरा उठा रही फर्म ने वाहनों को बंद कर चालक हटा दिए हैं। ऐसे में शहर में कचरे के ढेर लगने शुरू हो गए। ऐसे में शहर में कचरे के ढेर लगने शुरू हो गए। अचानक हटाने से वाहन चालक नाराज हो गए और कलक्ट्रेट पहुंच गए।

 

कचरा संग्रहण वाहनों से हटाए चालक, जिला कलक्टर व आयुक्त को सौंपी शिकायत
कचरा संग्रहण वाहनों से हटाए चालक, जिला कलक्टर व आयुक्त को सौंपी शिकायत
नगर परिषद के अधिकारियों की अनदेखी का आलम यह है कि शिकायतों का अम्बार कम नहीं हो रहा है। कभी रोड लाइट तो कभी अतिक्रमण के बाद अब घर-घर कचरा संग्रहण करने वाली फर्म की ओर से अचानक कार्य बंद करने की शिकायत आई है। गौरतलब है कि शहर को साफ-सुथरा रखने के लिए नगर परिषद ने साढ़े सात करोड़ रुपए का घर-घर कचरा संग्रहण का टेंडर जारी किया था।

लेकिन उसकी मॉनीटङ्क्षरग नहीं होने पर अब शहर में गंदगी के ढेर लगने लगे हैं। इसका कारण है कि घर-घर कचरा उठा रही फर्म ने वाहनों को बंद कर चालक हटा दिए हैं। ऐसे में शहर में कचरे के ढेर लगने शुरू हो गए। अचानक हटाने से वाहन चालक नाराज हो गए और कलक्ट्रेट पहुंच गए।

जहां उन्होंने जिला कलक्टर डॉ. ओमप्रकाश बैरवा तथा नगर परिषद आयुक्त ममता नागर को मानदेय दिलाने की मांग की है। इसमें बताया कि घर-घर कचरा संग्रहण के लिए वाहन चालक लिए हैं। उन्हें कई महीनों से भुगतान नहीं किया जा रहा है। सोमवार सुबह वे लोग अग्निशमन स्थित कार्यालय में भुगतान की मांग कर रहे थे। इस दौरान वहां मौजूद संवेदक के कार्मिकों ने कार्यालय के ताला लगा दिया और उन्हें वहां से भगा दिया। ऐसे में शहर से कचरा नहीं उठाया जा सका।
45 में से चल रही थी 15

टेंडर के शुरुआत में शहर के 60 वार्डों में 45 कचरा संग्रहण वाहन चलते थे। धीरे-धीरे यह वाहन कम होते गए। अब हालात यह है कि महज 15 वाहन की चल रहे थे। वो भी सोमवार से बंद कर दिए गए। ज्ञापन में अजमद अली, शेर अली, वसीम पठान, अनवार, भागचंद, तस्लीम, मजहर समेत अन्य चालकों ने बताया कि शहर के 60 वार्ड में दौड़ रहे 15 कचरा वाहन में डीजल भी महज प्रति दिन 4 लीटर ही दिया जाता था। ऐसे में यह वाहन आए दिन डीजल खत्म होने पर खड़ा हो जाता था। इसमें दबाव यह था कि अधिकारियों की ओर से डीजल के बारे में पूछने पर प्रति दिन 20 लीटर डीजल प्रति वाहन में उपलब्ध कराए जाने के लिए कहने को कहा जाता था।

ट्रेंडिंग वीडियो