राज्य की लाइफ लाइन बीसलपुर बांध में 2010 के बाद एक बार फिर होने जा रहा ऐसा...

राज्य की लाइफ लाइन बीसलपुर बांध में 2010 के बाद एक बार फिर होने जा रहा ऐसा...

Pawan Kumar Sharma | Publish: Dec, 09 2018 09:02:03 AM (IST) Tonk, Tonk, Rajasthan, India

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राजमहल. राज्य की लाइफ लाइन कहे जाने वाले बीसलपुर बांध के जलभराव पर इस बार मानसून की बैरूखी के कारण फिर से 2010 वाला नजारा दिखने लगा है। विगत 2010 में बांध का जल पूर्णतया सूखकर खाली हो गया था। तब सैकड़ों गांव व कस्बों में जलापूर्ति को लेकर तत्कालिन राज्य सरकार ने 2010 में बांध का हाल देखकर 2010 में ब्रह्माणी नदी को बनास नदी से जोडऩे की योजना का खाका तैयार कर लिया था।

 

लगभग 6 हजार करोड़ की उक्त योजना पर पिछले आठ वर्ष बाद भी योजना कागजों में दबी रहने से इस बार वापस बांध सुखने के कगार पर पहुंचने के कारण फिर से योजना की याद आने लगी है। उक्त योजना पर उसी समय निर्माण कार्य शुरू हो जाता तो अब तक योजना में आधे से अधिक निर्माण पुरा हो चुका होता।

 

मानसून की बैरुखी के साथ ही जलापूर्ति व वाष्पीकरण के साथ साथ सिंचाई में व्यर्थ खर्च होते पानी को लेकर बांध में भरा पानी दिनोंदिन कम पडऩे लगा है, जिससे बांध के जलभराव में डूबे गांव व ढाणियों के ढहे घर व मंदिर-मस्जिद आदि दिखाई देने लगे है।

 

उल्लेखनीय है कि बांध के कुल जलभराव के दौरान 212 वर्ग किमी क्षेत्र के लगभग 25 से 30 किलोमीटर क्षेत्र में जलभराव होता है। अभी रोजाना जयपुर, अजमेर व टोंक सहित सैकड़ों गांव कस्बों में हो रही जलापूर्ति के साथ ही वाष्पीकरण व सिंचाई के लिए पानी चोरी के दौरान रोजाना दो सेन्टीमीटर पानी रोजाना लगातार कम होने से अभी लगभग 5 किलोमीटर क्षेत्र में ही पानी शेष बचा हुआ है। बांध का गेज शनिवार सुबह तक 309.41 आर एल मीटर है जिसमें 9.191 टीएमसी पानी शेष बचा हुआ है। मार्च में जलसंकट का सामना करना पड़ सकता है।

 


टेण्डर पर सूखे की मार
बांध में हर बार करोड़ों की लागत पर मछली पकडऩे का टेण्डर होता आया है। इस बार भी लगभग छह करोड़ की लागत पर मछली पकडऩे का टेण्डर हुआ है, लेकिन सूखते बांध के पानी को लेकर मछली ठेकेदार की कमाई पर सूखे की मार का असर पडऩे लगा है।

 

एक तरफ मछली चोरी की मार तो दुसरी तरफ सूखते पानी से मछलियां भी पानी में स्थित घास व कचरे में छुपने लगी है, जिससे मछुआरों को भी जाल डालने के लिए मशक्कत का सामना करना पड़ रहा है। पहले जहां एक नाव पर दो शिकारी आसानी से मछली की जाल डालकर खिंच लेते थ, लेकिन पानी की कमी के कारण घास व कचरे में फसती जालों को लेकर अब दो-दो नावों पर आधा दर्जन से अधिक शिकारी सवार होकर एक जाल को खेंचने का कार्य कर रहे है। समय के साथ शिकार में कमी हो रही है।

 

योजना पर सर्वे की तैयारी
बांध परियोजना के अभियंताओं के अनुसार 2010 में बांध का जल पूर्णतया सूखने के बाद बनाई गई छह हजार करोड़ की लागत की बह्माणी नदी से बनास नदी को जोडऩे की योजना पिछले आठ साल से ठंडे बस्ते में पड़ी रही है। वहीं अब वापस बांध सूखने कगार पर आने के बाद फिर से योजना की याद आने लगी है। अब जल्द ही योजना पर कार्य के लिए सर्वे के टैण्डर जारी करने की संभावना है।

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