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राजस्थान विधानसभा चुनाव: दो पक्ष में तो दो विधायक विपक्ष में बैठकर करेंगे जनता की पैरवी, पूर्व में भी 1993 हुआ था ऐसा

locationटोंकPublished: Dec 09, 2023 03:26:21 pm

Submitted by:

pawan sharma

जिले में परिसीमन से पूर्व की पांच विधानसभा सीटों की बात हो या बाद की चार विधानसभा सीटों की। जिले में जिस दल के विधायकों का बहुमत रहा तब-तब संयोग से राज्य में उसी दल की सरकार बनी थी। इस बार अजीब संयोग बना है कि दोनों दलों को बराबर सीटें मिली है।

राजसथान विधानसभा चुनाव: दो पक्ष में तो दो विधायक विपक्ष में बैठकर करेंगे जनता की पैरवी, पूर्व में भी 1993 हुआ था ऐसा
राजसथान विधानसभा चुनाव: दो पक्ष में तो दो विधायक विपक्ष में बैठकर करेंगे जनता की पैरवी, पूर्व में भी 1993 हुआ था ऐसा
जिले में परिसीमन से पूर्व की पांच विधानसभा सीटों की बात हो या बाद की चार विधानसभा सीटों की। जिले में जिस दल के विधायकों का बहुमत रहा तब-तब संयोग से राज्य में उसी दल की सरकार बनी थी। इस बार अजीब संयोग बना है कि दोनों दलों को बराबर सीटें मिली है। ऐसे में दो सत्ता के पक्ष में तो दो विपक्ष में बैठक जनता की पैरवी करते नजर आएंगे। इस वर्ष 2023 में दो विधायक भाजपा के तथा दो कांग्रेस से जीतने के चलते मामला टाई हुआ है। यानि जिले के दो विधानसभा क्षेत्र के मतदाता ही सत्ता के साथ रहें।

आंकड़ों को देखें तो पिछले छह बार से विधानसभा चुनाव में जिले में जिस दल के तीन, चार या पांच प्रत्याशी जीते राज्य में उसी दल की सरकार बनी। वर्ष 2018 में कांग्रेस के तीन, भाजपा से एक विधायक जीते तो राज्य में कांग्रेस की सरकार बनी। यानि गत चुनावों तक लगातार छठी बार यह परंपरा बनी रही है।
अब वर्ष 2023 में भाजपा को राजस्थान में स्पष्ट बहुमत मिला है तथा सातवीं बार में जाकर जिले में यह परंपरा बदल गई है। अब जिले से चुने गए आधे विधायक सत्ता के साथ रहेंगे तो आधे विपक्ष में बैठे दिखेंगे। ऐसा 1993 के बाद वर्ष 2023 में हुआ हैं।
पायलट व उनके समर्थित विधायक की दुबारा हुई जीत

इस चुनाव में खास बात यह रही कि टोंक से सचिन पायलट तथा उनके समर्थित विधायक हरिश मीणा की दुबारा जीत हुई हैं। वहीं जिले के निवाई से विधायक रहे प्रशांत बैरवा ने मानेसर प्रकरण में पायलट का साथ नहीं दिया तो जिसके चलते गुर्जर मतदाताओं का बैरवा के प्रति विरोध रहा। यह गुर्जर मतदाता भाजपा के पक्ष में चले गए। वहीं मालपुरा में मुख्यमंत्री रहे अशोक गहलोत की सभा भी कांग्रेस प्रत्याशी घासीलाल चौधरी को जीत नहीं दिला पाएं।
यह है आंकड़े

* वर्ष-1993, भाजपा सरकार: टोंक जिले से भाजपा को चार सीटें तथा 1 सीट कांग्रेस को मिली थी। जिस पर राज्य में भाजपा की सरकार बनी थी।

* वर्ष-1998, कांग्रेस सरकार: टोंक जिले से कांग्रेस को चार सीटें तथा 1 सीट निर्दलीय के खाते में गई थी। इस पर राज्य में कांग्रेस सरकार बनी थी।
* वर्ष-2003, भाजपा सरकार: जिले से पांचों सीटों पर भाजपा ने कब्जा जमाया था। इस पर राज्य में फिर भाजपा सरकार स्थापित हुई थी।

* वर्ष-2008, कांग्रेस सरकार: परिसीमन के चलते जिले में पांच की बजाए चार विधानसभा क्षेत्र थे। इनमें से 3 सीटों पर कांग्रेस के खाते में आई थी। एक सीट पर निर्दलीय ने बाजी मारी थी। इस पर राज्य में कांग्रेस सरकार बनी थी।
* वर्ष-2013, भाजपा सरकार: जिले की चारों विधानसभा क्षेत्रों पर भाजपा के प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की। वहीं राज्य में भी रिकॉर्ड बहुमत के साथ भाजपा की सरकार बनी।

* वर्ष-2018, कांग्रेस सरकार: जिले के चारों विधानसभा क्षेत्रों में से तीन में कांग्रेस तथा एक में भाजपा के प्रत्याशी ने जीत दर्ज की। ऐसे में राज्य में कांग्रेस की सरकार बनी।
* वर्ष-2023, भाजपा सरकार: जिले के चारों विधानसभा क्षेत्रों में से 2 में कांग्रेस तथा दो में भाजपा के प्रत्याशी ने जीत दर्ज की। साथ ही राज्य में भाजपा की सरकार बनने जा रही है।

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