Dashashwamedh Ghat

दशाश्वमेध घाट

Dashashwamedh Ghat

विवरण :

दशाश्वमेघ घाट काशी के सुप्रसिद्ध घाटों में से एक माना जाता है। हिंदू धर्म के लोग इसे परम पवित्र मानते हैं। प्राचीन ग्रंथो के मुताबिक राजा दिवोदास द्वारा यहां दस अश्वमेध यज्ञ कराने के कारण इसका नाम दशाश्वमेध घाट पड़ा। यह घाट पंचतीर्थ घाटों में से एक है। इस घाट का निर्माण नगर निगम ने करवाया है। दशाश्वमेध घाट गोदौलिया से गंगा जाने वाले मार्ग के अंतिम छोर पर पड़ता है।


एक अन्य मत के अनुसार नागवंशीय राजा वीरसेन ने चक्रवर्ती बनने की आकांक्षा में इस स्थान पर दस बार अश्वमेध कराया था। वाराणसी (काशी) में गंगा तट पर अनेक सुंदर घाट बने हैं, ये सभी घाट किसी न किसी पौराणिक या धार्मिक कथा से संबंधित हैं। वाराणसी में लगभग 84 घाट हैं। ये घाट लगभग 4 मील लम्‍बे तट पर बने हुए हैं। वाराणसी के 84 घाटों में पांच घाट बहुत ही पवित्र माने जाते हैं। इन्‍हें सामूहिक रूप से 'पंचतीर्थ' कहा जाता है। ये हैं असी घाट, दशाश्वमेध घाट, आदिकेशव घाट, पंचगंगा घाट तथा मणिकर्णिका घाट।


घाट तक कैसे पहुंचे
वाराणसी कैंट स्टेशन से दशाश्वमेघ पहुंचने के वैसे तो कई रास्ते हैं लेकिन आप आसानी से 21 मीटर (4.4 किमी) लहुराबीर मार्ग/विद्यापीठ मार्ग और बेनिया बाग मार्ग/लहुराबीर मार्ग से होकर पहुंच सकते हैं।

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