उदयपुर में यहां मूक पशुओं का इलाज करने वाला महकमा ही ‘बीमार’

उदयपुर में यहां मूक पशुओं का इलाज करने वाला महकमा ही ‘बीमार’

Madhulika Singh | Publish: May, 17 2019 04:29:01 PM (IST) | Updated: May, 17 2019 04:29:02 PM (IST) Udaipur, Udaipur, Rajasthan, India

पशुपालन विभाग बदहाल : आधे से अधिक पद खाली

उदयपुर. सरकारें गोवंश को बचाने और पशुपालन को बढ़ावा देने का ढिंढोरा पीट रही है, वहीं पशुपालन विभाग में आधे से अधिक पद रिक्त होने से मूक पशुधन को बचाना और उनका इलाज करना चुनौती बना हुआ है। जिले के 425 पशु चिकित्सालयों में से आधे बगैर स्टाफ के संचालित हो रहे हैं। कहीं पर चिकित्सक नहीं है तो कहीं पर अन्य स्टाफ नहीं है। जिले में स्वीकृत कुल 1178 में से 725 पद लम्बे समय से खाली हैं। इनमें पशुधन परिचर, जलधारी, सफाईकर्मी, गडरिया, वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी, पशु चिकित्सा अधिकारी, पशु चिकित्सा सहायक एवं पशुधन सहायकों के पद शामिल हैं।

पशुपालन विभाग के अनुसार पिछले 4-5 वर्षों से प्रथम श्रेणी के 36 अस्पतालों में 15 वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी एवं द्वितीय श्रेणी के 70 अस्पतालों में 61 चिकित्सा अधिकारी के पद रिक्त है । इसी तरह पशुधन सहायकों के करीब 246 पद एक दशक से खाली पड़े है। पशुधन परिचर, जलधारी एवं सफाईकर्मियों की भर्ती वर्ष1987 के बाद नहीं हुई है।

जिले में इतने है पशु
आदिवासी बहुल जिले में गोवंश और भैंसवंश के कुल 15 लाख 25 हजार 817 पशु हैं लेकिन इनका इलाज करने वाले चिकित्सकों की बेहद कमी है। इसके अलावा घोड़े, गधे, खच्चर, बकरे-बकरियां, ऊंट, सूअर, भेंड़े, कुत्ते, मुर्गे-मुर्गियां के स्वास्थ्य की देखभाल नहीं हो पा रही है।


उपचार सहित कई कार्य प्रभावित
गांवों-कस्बों में अनुभवी चिकित्सकीय स्टाफ के अभाव में पशुओं के उपचार में खानापूर्ति हो रही है। गंभीर बीमार पशु दम तोड़ रहे हैं। प्रथम व द्वितीय श्रेणी के अस्पतालों में बीमार पशुओं की सर्जरी, पोस्टमार्टम, ऑपरेशन आदि नहीं हो रहे हैं। यही नहीं पशुओं के हेल्थ प्रमाण पत्र भी जारी नहीें होते हैं। इसके अलावा बंध्याकरण, कृत्रिम गर्भधान, टीकाकरण, खुरपका-मुंहपका एवं गलगोंटू का उपचार आदि कार्य प्रभावित हो रहे हैं। जिले के 306 पशु उप स्वास्थ्य केन्द्र भी बुरी स्थिति में हैं। इन पर तकनीकी सहायक या सफाईकर्मी ही पशुओं का उपचार करते हैं।


पशुपालन विभाग में वर्षो से सैंकड़ों पद रिक्त चल रहे है वर्ष 2017 में जरूर जिले में 70 पशुधन सहायकों की नियुक्ति हुई थी लेकिन अधिकतर कर्मचारी अन्य जिलों से आए थे जो तबादला करवाकर गृह जिलों में चले गए हैं। रिक्त पदों को भरने के लिए समय-समय पर राज्य सरकार को लिखा जा रहा है। - डॉ. ललित जोशी, उप निदेशक पशु पालन विभाग

 

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