ऐ मां मेरा क्या कसूर! क्यों मुझे दूसरों की दया पर छोड़ा

ऐ मां मेरा क्या कसूर! क्यों मुझे दूसरों की दया पर छोड़ा

Madhulika Singh | Updated: 14 Jul 2019, 01:05:35 PM (IST) Udaipur, Udaipur, Rajasthan, India

हे मां तेरी एक छोटी सी नादानी समाज की आंख का कांटा क्या बनी मेरे सिर से मां-बाप का साया ही उठ गया। मां तेरे दामन पर लांछन के छींटे क्या लगे, मैं इस दुनिया में ही तन्हा हो गया। अब तो तू ही समाज और इस दुनिया को समझ गई ना? लेकिन मेरा क्या कसूर।

मोहम्मद इलियास/उदयपुर. हे मां तेरी एक छोटी सी नादानी समाज की आंख का कांटा क्या बनी मेरे सिर से मां-बाप का साया ही उठ गया। मां तेरे दामन पर लांछन के छींटे क्या लगे, मैं इस दुनिया में ही तन्हा हो गया। अब तो तू ही समाज और इस दुनिया को समझ गई ना? लेकिन मेरा क्या कसूर। ये उस नवजात की टीस है जो नाबालिग लडक़ा-लडक़ी की सगाई के बाद मां की कोख में आया और सात माह में ही जन्म गया। यह घटना उदयपुर जिला मुख्यालय से करीब 50 किलोमीटर दूर एक गांव की है, जहां समाज के मोतबिरों की मौजूदगी में लडक़ा-लडक़ी की धूमधाम से सगाई हुई लेकिन शादी से पहले ही वह गर्भवती हो गई।

सतमासी था मासूम, चिकित्सकों ने की सेवा
सगाई के एक साल के भीतर ही गत 2 मई को लडक़ी की तबीयत अचानक बिगड़ गई और उसने घर पर ही एक सतमासी शिशु को जन्म दिया। बच्चा काफी कमजोर व उसका स्वास्थ्य ठीक नहीं होने से अगले ही दिन नाना-नानी ने उसे बाल चिकित्सालय की बाल नर्सरी में भर्ती करवाया। मासूम का वजन उस समय महज 1 किलो 600 ग्राम था। दो-तीन दिन तीमारदारी कर नाना-नानी भी उसे लावारिस छोड़ चले गए। चिकित्सकीय दल परिजनों के अभाव में बच्चे की देखभाल कर उसे बचाने में लगा रहा। बच्चे का वजन बढऩे के साथ ही जब वह स्वस्थ हुआ तो चिकित्सकों ने 20 जून को इसकी जानकारी बाल कल्याण समिति (सीडब्लयूसी) को दी। समिति के आदेश पर उन्होंने पुलिस को भी रिपोर्ट दी। बच्चे के भर्ती टिकट पर लिखे उसके नाना-नानी के नाम व मोबाइल नम्बर भी उपलब्ध करवाए लेकिन पुलिस ने कोई मदद नहीं की। इस बीच चिकित्सालय स्टाफ ने परिजनों का पता लगाकर उन्हें अस्पताल बुलवाया।
जैविक माता-पिता की ओर से किया गया बालक का ऐसा परित्याग, जान-बूझकर किया गया परित्याग नहीं है। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 75 के तहत ऐसे में दांडिक प्रावधान लागू नहीं होगा।
बी.के.गुप्ता, सीडब्ल्यूसी सदस्य

परिवारों में खटास, तोड़ दिया रिश्ता
शिशु के जन्मते ही दोनों परिवारों के मध्य रिश्तों में खटास आ गई और वर पक्ष ने सगाई तोड़ दी। उन्होंने लडक़ी पर छींटाकशी के साथ ही कई तरह के इल्जाम भी लगाए तो उसने भी सीने पर पत्थर रखकर बच्चे से मोह त्याग दिया। नाना-नानी ने सामाजिक बंधनों के चलते उसे साथ रखने में असमर्थता जता दी। काउंसलिंग कर उन्हें बाल कल्याण समिति (सीडब्लयूसी) के पास भेजा गया। समिति अध्यक्ष डॉ.प्रीति जैन, सदस्य बी.के.गुप्ता, हरीश पालीवाल व सुशील दशोरा ने नाना-नानी को बच्चे के जैविक मां के साथ उपस्थिति के आदेश दिए। शुक्रवार को पेश हुई मां ने शिशु को रखने की असमर्थता का लिखित बयान देकर बच्चा समिति को सुपुर्द कर दिया। समिति ने मां के बयान लेने के साथ ही बच्चे को राजकीय शिशुगृह में रखवाया। बच्चा पूर्णतया स्वस्थ है।

 

 

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