पंचायत ने यूआईटी से ले ली स्कूल मैदान की जमीन

बेदला खुर्द पंचायत के ही वार्डपंचों, लोगों ने किया विरोध. जिला परिषद सीईओए एसडीएम को जांच में गलत जवाब देने के लगाए आरोप. पंचायत के कई वार्डपंचों ने नहीं कराए प्रस्ताव पर हस्ताक्षर

By: bhuvanesh pandya

Updated: 25 Jan 2021, 08:35 AM IST

भुवनेश पंड्या
उदयपुर. शहर से सटी नई बेदला खुर्द पंचायत के नए भवन को बनाने के लिए वहां पहले स्कूल के खेल मैदान के लिए यूआईटी से मांगी गई जमीन को अब नया भवन बनाने के लिए आवंटित करा लेने पर स्थानीय लोगों ने बेदला खुर्द पंचायत का विरोध जताते हुए प्रदर्शन किया है। लोगों का कहना है कि इस मसले के चलते यूआईटी की रिपोर्ट पर जिला परिषद सीईओ ने एसडीएम को जांच सौंपी, जिस पर एसडीएम और सीईओ को पंचायत के ही लोगों ने गलत जवाब पेश कर ग्रामीणों की भावना को कुचलने का प्रयास किया है। प्रदर्शन करने वाले ग्रामीणों ने बताया कि सबलपुरा स्कूल के लिए खेल मैदान के लिए एक ही जमीन थी, जिसे बेदला खुर्द पंचायत की सरपंच ने जबरन पंचायत का नया भवन बनाने के लिए यूआईटी को प्रस्ताव देकर आवंटित करवा लिया, जो गलत है। क्योंकि पंचायत का मैदान के सामने पहले से बना भवन अच्छी हालत में है। स्कूल मैदान बनाने की पूरे गांव वालों की भावना है, जिसके खिलाफ जाकर सरपंच और सचिव ने यूआईटी को प्रस्ताव देकर मैदान का निर्णय निरस्त कर पंचायत का जबरन नया भवन बनाने के लिए जमीन आवंटित करवा ली। ग्रामीणों ने नया भवन बनाने का विरोध कर यूआईटी से इसका आवंटन निरस्त कर जमीन स्कूली मैदान के लिए ही आरक्षित रखने की मांग उठाई। पंचायत के वार्डपंच हीरालाल डांगी, मीना ढोलीपप्पू गमेती, देवेन्द्र पानेरी आदि ने लोगों के साथ पंचायत में सरपंच के समक्ष विरोध जताया। इन वार्डपंचों का कहना है कि यूआईटी को दिए प्रस्ताव में उनके हस्ताक्षर नहीं करवाए गए जबकि सरपंच सोनल गांछा, उप सरपंच निमित डांगी, वार्डपंच युधिष्ठिर तंवर, गणेशकुंवर आदि ने हस्ताक्षर कर प्रस्ताव दे दिया।

कलक्टर को दिया ज्ञापन

ग्रामीणों ने वार्डपंचों के साथ जिला कलक्टर को ज्ञापन देकर मामले से अवगत कराया और यह भी बताया कि लखावली तालाब के ओवरफ्लो का पानी भी इस जमीन पर भरता है। यदि वहां पंचायत भवन बनता है तो ओवरफ्लो जल से उसे नुकसान ही होगा। इसलिए इस जमीन को खेल मैदान के ही आरक्षित रखा जाए। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि उनके विरोध पर यूआईटी ने मामले में जिला परिषद से रिपोर्ट ली तो सीईओ ने एसडीएम को जांच सौंपी. जिस पर एसडीएम को पंचायत के प्रस्ताव देने वाले प्रतिनिधियों ने पेश होकर एक तरफा गलत जानकारी दे दी। जबकि जांच में जन भावनाओं को नहीं सुना गया है।

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