
मधुलिका सिंह/उदयपुर. डॉक्टरी की पढ़ाई के दौरान ही भारतीय सिनेमा के प्रति ऐसा लगाव हुआ कि डॉक्टरी का पेशा छोड़ फिल्म मेकर बनने की ठान ली। फिल्मों के प्रति एक जुनून और कुछ क्रिएटिव करने की चाहत के कारण रुस छोडकऱ उदयपुर आ गए। फिल्म मेकर बनने का जो सपना देखा, उसे पूरा किया। पहले प्रयास में पहली डॉक्यूमेंट्री फिल्म को ही कई फिल्म
फेस्टिवल्स में सराहना मिली। उनका मकसद मिनिंगफुल सिनेमा को लोगों तक पहुंचाना है। यह सपना देखा है उदयपुर के डॉ. उत्पल कलाल का।
उत्पल मूलत: उदयपुर के छोटे से गांव फलासिया के रहने वाले हैं। उनकी सामाजिक मुद्दे पर आधारित डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘द 14 फरवरी एंड बियॉन्ड’ को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलनी शुरू हो गई है। यह पहली डॉक्यूमेंट्री फिल्म है, जो वेलेंटाइन डे का दुनियाभर के लोगों, समाज व यंग जनरेशन पर प्रभाव का खुलासा करती है। फिल्म में वेलेंटाइन डे के बारे में चौंकाने वाले जमीनी तथ्यों की पड़ताल तथा विश्लेषण किया गया है। विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों तथा बुद्धिजीवियों के माध्यम से विषय का एक व्यापक दृष्टिकोण सामने लाया गया है। साथ ही फिल्म मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दे को भी उठाती है। फिल्म ने जयपुर इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में बेस्ट फिल्म अवार्ड जीता है। वहीं, मुंबई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल द्वारा सिल्वर कोंच अवार्ड के लिए नॉमिनेट हुई। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे बेल्जियम के मिलेनियम इंटरनेशनल डॉक्यूमेंट्री फिल्म फेस्टिवल के यूथ विजन श्रेणी में नॉमिनेट किया गया है, जिसका प्रीमियर मार्च में होगा। वहीं लंदन के द एशियन फिल्म फेस्टिवल के लिए बेस्ट फिल्म अवार्ड के लिए नॉमिनेट किया गया है, जहां इसका स्पेशल प्रीमियर रीजेंट स्ट्रीट सिनेमा पर होगा। उत्पल ने बताया कि इसके बाद वे जल्द ही मेल चाइल्ड सेक्स एब्यूज्ड मुद्दे पर फिल्म बनाने जा रहे हैं जो रियल लाइफ स्टोरी पर आधारित है।
Published on:
29 Feb 2020 09:08 pm
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