पंजाब के बाद अब नशे में ‘उड़ता’ राजस्थान, मध्‍यप्रदेश से आ रहा मादक पदार्थ और कई जिलों में बेधड़क हो रहा सप्‍लाई

पंजाब के बाद अब नशे में ‘उड़ता’ राजस्थान,  मध्‍यप्रदेश से आ रहा मादक पदार्थ और कई जिलों में बेधड़क हो रहा सप्‍लाई

Madhulika Singh | Updated: 14 Jun 2019, 02:31:11 PM (IST) Udaipur, Udaipur, Rajasthan, India

- राजस्थान के अधिकतर जिलों में बिकने लगा नशा, दिनोंदिन बढ़ रहे नशेड़ी, अंकुश में सरकार विफल

मोहम्मद इलियास/उदयपुर. चिकित्सकीय प्रमाण पत्र की आड़ में ‘सरकारी नशेडिय़ों’ के लिए सरकार ने भले ही डोडा-चूरा की खरीद बंद कर दी हो लेकिन नशेडिय़ों पर अंकुश लगाने में वह पूरी तरह से विफल रही। ऐसे में अब राजस्थान नशे में ‘उड़ते पंजाब’ को पछाडऩे लगा है। लोग डोडा-चूरा को दर्द निवारक के रूप में एवं शारीरिक व मानसिक कमजोरी दूर होने के भ्रम में धड़ल्ले से काम में ले रहे हैं। यह मादक पदार्थ मालवा से मेवाड़ होते हुए मारवाड़ पहुंचता है, जहां से राज्य के कई जिलों तक सप्लाई हो रहा है।

सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार पूर्व में डोडा-चूरा के 24 हजार 841 लाइसेंसी थे। इनके लिए सरकार उत्पादन व खपत क्षेत्र में लाइसेंस जारी करती थी। इसकी आड़ में ज्यादा माल का उत्पादन हो जाता था जो अवैध सप्लाई किया जाता था। एक नशेड़ी माह में अधिकतम दस किलो ग्राम डोडा-चूरा खरीद सकता था, लेकिन बाद में इसके बंद होते ही लाइसेंसी नशेडिय़ों के अलावा कई लोग इसके आदी हो गए। वर्तमान में राजस्थान में दर्द निवारक की आड़ में करीब 13 से 15 लाख लोग डोडा-चूरे का नशा कर रहे हैं।

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दिखावे के लिए मूंगफली के छिलका नष्ट
नियमानुसार सरकार की देखरेख में उगने वाली अफीम फसल को एकत्रित करने के बाद उसके डोडा को अधिकारियों की मौजूदगी में खेतों में ही नष्ट करना होता है, लेकिन दिखावे के लिए खेतों में मूंगफली के छिलके को नष्ट कर डोडा-चूरा की तस्करी की जा रही है। इस डोडा-चूरा में नशा होने से मारवाड़ में इसका बहुतायत मात्रा में चलन है। सरकार के प्रतिबंध व धरपकड़ के चलते गत पांच वर्ष में डोडा-चूरा की कीमत 600 रुपए बढकऱ तीन हजार रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई।

 

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एम्स ने भी माना कि दर्द निवारक नहीं
केन्द्र सरकार ने नशे के खतरे को भांपते जब एनडीपीएस पॉलिसी बनाई थी, तब पता चला कि राजस्थान, हरियाणा व पंजाब में चिकित्सकीय रिपोर्ट के आधार पर लोग दर्द निवारक के लिए डोडा-चूरे का सेवन करते हैं। ऐसे में तब अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के विशेषज्ञों से जांच करवाई कि यह नशा क्या रोग निदान करता है? उन्होंने जांच में पाया कि यह रोग निदान नहीं, बल्कि शारीरिक व मानसिक कमजोरी को दूर करने के लिए सेवन किया जा रहा है। चिकित्सा जगत में यह दवाई नहीं है। पुष्टि होने के बाद सरकार ने इसकी खरीद बंद की तो इसके नशेड़ी और बढ़ गए तो तस्करी से भी धड़ल्ले से होने लगी।

अफीम उत्पादक क्षेत्र एवं तस्करी की रूट
मध्यप्रदेश के मंदसौर, नीमच, पीपली मंडी एवं राजस्थान के प्रतापगढ़, चित्तौडगढ़़, उदयपुर व भीलवाड़ा जिले के कुछ हिस्से में अफीम का उत्पादन होता है। मध्यप्रदेश से प्रतापगढ़, छोटीसादड़ी, बड़ीसादड़ी, निकुंभ, मंगलवाड़, भींडर, खेरोदा, डबोक, प्रतापनगर, सुखेर, गोगुन्दा, पिंडवाड़ा होते हुए डोडा-चूरा मारवाड़ पहुंचा है।

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