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फसलों की आड़ में दफन हुआ अंतिम यात्रा का मार्ग

funeral procession ग्राम पंचायत स्तर पर भी श्मशान घाट विकास कार्य अटका, बैलगाड़ी गुजरने वाले सामूहिक मार्ग पर किसानों ने की खेती, ग्राम पंचायत गोदाणा का मामला
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फसलों की आड़ में दफन हुआ अंतिम यात्रा का मार्ग

फसलों की आड़ में दफन हुआ अंतिम यात्रा का मार्ग

उदयपुर/ झाड़ोल. Funeral procession उपखण्ड क्षेत्र के ग्राम गोदाणा में महादेवजी को जाने वाले मार्ग पर स्थित श्मशान घाट पर किसानों के कथित अतिक्रमण का मामला स्थानीय लोगों के लिए नासूर बनता जा रहा है। मोक्ष मार्ग पर गुजरने में आ रही तकलीफों के बीच ही ग्राम पंचायत प्रशासन की ओर से श्मशान घाट विकास कार्य भी नहीं हो पा रहा है। करीब 15 साल पुराने श्मशान घाट पर जाने के लिए पहले कभी एक बैलगाड़ी के गुजरने भर का रास्ता था, लेकिन समय के साथ ही समीपवर्ती किसानों की ओर से खेती के दौरान इस मार्ग पर निरंतर बुवाई के जारी कार्य के बीच मार्ग बाधित हो गया है। खड़ी फसल के बीच लोगों को इस मार्ग से शव लेकर गुजरने में भी तकलीफें आ रही हैं, लेकिन समस्या को लेकर ग्राम पंचायत प्रशासन स्तर पर कोई स्थायी हल नहीं तलाशा जा रहा है। कहे तो मरने के बाद अंतिम यात्रा का मार्ग भी यहां बंद पड़ा है।

मेड़ के भरोसे गुजरते शव
श्मशान मार्ग पर कथित अतिक्रमण के बीच मुर्दे लेकर जाने वाले चार कंधो को यहां मेड़ से होकर गुजरना पड़ता है। करीब 7 सौ मीटर टुकड़े में आ रही समस्या को लेकर कई बार प्रशासनिक अमले का ध्यान आकर्षित किया जा चुका है, लेकिन अब तक कार्रवाई के नाम पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। गोदाणा से करीब पांच किलोमीटर दूर शमशान घाट जो बदाराणा के निकट होने से नदी में होकर गुजरना पड़ा, जिससे नदी में करीब चार फीट पानी के बीच लोगों को गुजरना पड़ा।

खुद ही असमर्थ
ग्राम पंचायत गोदाणा के जिम्मेदारों की भी अजीब कहानी है। ग्राम पंचायत लोगों की सुविधा के लिए गोदाणा श्मशान घाट का विकास कराना चाहती है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों के बीच ग्राम पंचायत खुद ही रास्ते को लेकर असमर्थ बनी हुई है। कई बार प्रस्ताव में शामिल विकास कार्य को कुछ लोगों के अडिय़ल रवैये के कारण पूरा नहीं किया जा पा रहा है। सरपंच धर्मचन्द एवं वार्ड पंच गोपाल पण्डित का आरोप है कि उनकी ओर से तहसीलदार, विकास अधिकारी और उपखण्ड अधिकारी के समक्ष ये समस्याएं बताई जा चुकी हैं, लेकिन लोगों की समस्या आज भी जस की तस बनी हुई है।

रेकॉर्ड में खातेदारी
मुझे भी व्यक्तिश: शिकायतें मिली हैं, लेकिन जिस हिस्से को आम रास्ता बताया जा रहा है। हकीकत में वह हिस्सा किसानों की खातेदारी में बोल रहा है। funeral procession ग्रामीण और ग्राम पंचायत की ओर से मामले में तहसीलदार की मदद ली जा सकती है।
मावाराम गरासिया, पटवारी, गोदाणा