यहां गोबर से प्रतिदिन बनती है 30 किलोवाट बिजली

उदयपुर जिले के नवानिया में प्रदेश का पहला पायलट प्रोजेक्ट : पर्यायवरण सुरक्षा एवं जैविक खेती के लिए नवानिया महाविद्यालय का अभिनव प्रयास नवानिया में प्रदेश का पहला पायलट प्रोजेक्ट ए गोबर से हो रहा विधुत एव रसोई गैस का उत्पादन

By: Pankaj

Published: 05 Sep 2020, 02:46 AM IST

मेनार /पत्रिका. उमेश मेनारिया.
ग्लोबल वार्मिंग एवं खेती में अत्यधिक रसायन का प्रयोग आज किसानों एवं आम जन के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती के रूप में सामने आ रहा है। पशुओं की आंत में होने वाली पाचन क्रिया एवं गोबर के अवयवीय पाचन से मिथेन का उत्सर्जन होता है, जो ओजोन लेयर को नुकसान पहुंचाती है। यदि गोबर से उत्सर्जित मिथेन को एकत्रित कर उसे कम नुकसान कारक कार्बन डाई ऑक्साइड गैस में कन्वर्ट करें, तो इससे ऊर्जा भी अर्जित कर सकते हैं। एेसा ही एक अभिनव प्रयास जिले के नवानिया स्थित पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय में पर्यायवरण सुरक्षा एवं जैविक खेती के लिए किया जा रहा है। प्रदेश के पहले पायलट प्रोजेक्ट के तहत गोबर से विधुत एवं रसोई गैस का उत्पादन किया जा रहा है।

मिथेन वैकल्पिक ऊर्जा का बहुत बड़ा स्त्रोत है, इससे न केवल खाना पकाया जा सकता है, अपितु विद्युत उत्पादन एवं वाहन भी चलाए जा सकते हैं। पूरे विश्व में इस तरह के प्रयास हो रहे हैं। कोरोना संक्रमण के दौर में आत्मनिर्भर भारत के तहत किसान पशुपालन से आय के नए आयाम स्थापित कर सकते है। पिछले समय में किसानों का ध्यान जैविक खेती की तरफ भी आकर्षित हुआ है। इसके लिए किसान भाई जैविक खाद का उपयोग कर रहे हैं। इससे रासायनिक खाद से होने वाले नुकसान से भी बचा जा सकता है। जैविक खाद से पर्यावरण को स्वस्थ बनाने के साथ ही पशु उपोत्पाद को सही तरीके से उपयोग में लेकर किसान आमदनी भी बढ़ा सकते हैं।

गोबर से हो रहा विधुत उत्पादन, छात्रावास और महाविद्यालय में आपूर्ति गोबर गैस से वैकल्पिक ऊर्जा का उत्पादन किया जा रहा है। गोबर से विद्युत उत्पादन एवं उपोत्पाद से उच्च गुणवत्ता युक्त जैविक खाद उत्पादन पर अनुसंधान कर रहे हैं। परियोजना के प्रधान अनुसंधानकत्र्ता डॉ. दीपक शर्मा के अनुसार इस पायलेट परियोजना में गोबर को गोबर गैस प्लांट में उपचारित कर बायोगैस उत्पादन किया जा रहा है। इसके लिए 100 क्यूबिक मीटर गैस उत्पादन क्षमता वाला बायोगैस प्लांट स्थापित किया गया है। गैस स्टोरेज के लिए बायोगैस बलून लगाया गया है, जो 50 क्यूबिक मीटर गैस स्टोरेज क्षमता का है। इस प्लांट से प्राप्त गैस से विद्युत उत्पादन के लिए बायोगैस आधारित 30 केवीए क्षमता वाली इकाई लगाई है, जो 30 किलोवाट विद्युत यूनिट प्रति घंटा उत्पादन कर सकती है। परियोजना के तहत इससे विद्युत उत्पादन कर महाविद्यालय के छात्रावास में विद्युत सप्लाई की जा रही है। हाल ही में महाविद्यालय के परिसर में भी विद्युत आपूर्ति शुरू की है। वर्तमान में इस प्लांट से प्रतिदिन 1 टन गोबर को उपचारित कर बायोगैस एवं जैविक खाद में परिवर्तित किया जा रहा है। महाविद्यालय के छात्रावास के बायोडिग्रेडेब्ल वेस्ट को भी इस प्लांट में उपचारित कर बायोगैस में परिवर्तित किया जा रहा है।

वेस्ट का बन रहा जैविक खाद
इस प्लांट से निकलने वाली स्लरी के समुचित उपयोग के लिए इसे वर्मी कम्पोस्ट एवं जैविक खाद में संवर्धित किया जा रहा है, जो अफ ीम एवं सब्जियों की खेती में बहुत उपयोगी सिद्ध हो रही है। इस तरह से इस परियोजना से न केवल पर्यावरण की सुरक्षा हो रही है, बल्कि पशु उपोत्पाद से ऊर्जा एवं उच्च गुणवत्ता युक्त जैविक खाद उपलब्ध करवा कर जैविक खेती को बढ़ावा देते हुए पर्यावरण एवं मानव स्वास्थ्य को भी सुधारा जा रहा है।

इनका कहना है.......

परियोजना से पशु पालक किसान सीधे तोर पर सस्ती दर पर जैविक खाद प्राप्त कर रहे हैं, साथ ही बायोगैस एवं उसकी उपयोगिता के बारे में भी जागृत हो रहे है।
- डा. दीपक शर्मा, परियोजना प्रभारी, पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय, नवानिया

इससे पशु उपोत्पाद के सही निस्तारण से परिसर साफ सुथरा रहता है, बल्कि यूनिवर्सिटी को रेवेन्यू भी प्राप्त हो रहा है। साथ ही इस नवाचार से किसान बायोगैस एवं जैविक खाद उत्पादन के लिए प्रेरित भी हो रहे हैं।
डॉ. राजीव कुमार जोशी, अधिष्ठाता, पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय, नवानिया

विश्वविद्यालय के सभी यूनिट्स को जैविक पशुपालन पर लाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इसके बहुत जल्द सुखद परिणाम सामने आएंगे।
प्रो. विष्णु शर्मा, कुलपति, राजुवास, बीकानेर

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