एफडी के नाम पर बीमा पॉलिसियां जारी कर की थी ठगी, पत्रिका ने मुद्दा उठाया तो इनके खिलाफ हुआ मामला दर्ज

एफडी के नाम पर बीमा पॉलिसियां जारी कर की थी ठगी, पत्रिका ने मुद्दा उठाया तो इनके खिलाफ हुआ मामला दर्ज

Mohammed Iliyas | Publish: Nov, 18 2017 11:35:33 AM (IST) Udaipur, Rajasthan, India

उदयपुर. फर्जी दस्तावेजों के जरिए ये पूरा खेल खेला गया।

उदयपुर . किसानों, बुज़ुर्गो, गरीब परिवारों, विधवा सहित कई लोगों की एफडी के नाम पर बीमा पॉलिसी करने वाले आईसीआईसीआई बैंक व बीमा कंपनी के विरुद्ध एसओजी जयपुर ने मामला दर्ज कर लिया। फर्जी दस्तावेजों के जरिए ये पूरा खेल खेला गया। राजस्थान पत्रिका ने पर्दे में दबे इस पूरे खेल को परत दर परत उजागर कर बेपर्दा किया था। पत्रिका ने बैंक व बीमा कंपनी के इस गड़बड़झाले की सिलसिलेवार ‘अन्नदाता पर बैंक की मार’ शीर्षक से खबरें प्रकाशित कर मामला उठाया था।

 


बीमा कंपनी के पूर्व कर्मचारी जवाहरनगर निवासी नितीन बालचन्दानी व पीडि़त देवजी का खेड़ा (मावली) निवासी भगवानलाल गाडरी, वासनी कला निवासी मनोहरदास वैष्णव व वीरधोलिया निवासी खेमराज मेघवाल ने उदयपुर आईसीआईसीआई बैंक व राजस्थान की विभिन्न शाखाओं में एक मुश्त बीमा पॉलिसी एवं एफ.डी. के नाम पर धोखाधड़ी संबंधी परिवाद पेश किए थे। परिवाद की एसओजी उदयपुर की टीम ने जांच कर मुकदमे के लिए मुख्यालय भिजवाया था। मामला दर्ज होने के बाद अब बैंक के कई अधिकारी व कर्मचारी जांच के घेरे में है।

 

READ MORE: नरेन्द्र मोदी को लिखा खत, किया प्रदर्शन और B. N. College के विद्यार्थियों ने दे दी उग्र आंदोलन करने की चेतावनी, आखिर क्या हुआ ऐसा, पढ़ें पूरी खबर


एसओजी ने मानी यह गड़बडिय़ां
आईसीआईसीआई बैंक व प्रूडेंशियल लाईफ इश्योरेन्स की विभिन्न शाखाओं के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने मिलीभगत कर किसानों, विधवाओं, छात्रों, गरीब रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले लोगों व अन्य की निजी जानकारी का गलत उपयोग किया। अपने निजी लाभ के लिए फर्जीवाड़ा करते हुए रिकॉर्ड में गलत तथ्य दर्शाए, फर्जी हस्ताक्षर किए। गलत उम्र, गलत आय एवं बीमा प्राधिकरण संस्था आईआरडीए द्वारा जारी नियमों की अवहेलना की। फर्जी तरीके से बीमा पॉलिसियां जारी कर आम जनता के साथ धोखाधड़ी का कृत्य किया। एसओजी ने बैंक व बीमा कंपनी के अधिकारियों व कर्मचारियों के विरुद्ध धारा 467,468,471,406,420,120बी में मामला दर्ज किया।

 

फर्जीवाड़े के खुले ऐसे-ऐसे राज

केस-1
मामला- भगवानलाल गाडरी को बीमा कंपनी ने एक मुश्त बीमा पॉलिसी का झूठा दावा कर 50 हजार की ऐसी बीमा पॉलिसी जारी कर दी गई जिसमें प्रतिवर्ष 50 हजार रुपए जमा करवाना अनिवार्य था।
गड़बड़ी-पॉलिसी फॉर्म में बैंक कर्मियों द्वारा गाडरी को 12वीं पास बताया जबकि वह पांचवीं पास है। उसकी वार्षिक आय 3 लाख दर्शाई, वह गरीब है। पेन कार्ड, दस्तावेज में गड़बड़ी के साथ फर्जी हस्ताक्षर किए गए। किसान ऋण की राशि में 50 हजार काटकर पॉलिसी कर दी गई।

 

READ MORE: यूजीसी के निर्देश: अब विश्वविद्यालयों में खुलेंगे प्रताप शोधपीठ, मेवाड़ में इन दो जगहों पर खुल सकती है शोधपीठ

 

केस-2
मामला-मनोहरदास वैष्णव की 28 अगस्त 2014 राजस्थान राज्य तिलहन उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड (तिल संघ) से सेवानिवृत्त हुआ था। सेवानिवृत्ति का पैसा आईसीआईसी बैंक की फतहनगर शाखा में आया था। कर्मचारियों व अधिकारियों ने मिलीभगत सेवानिवृत्ति के कुछ पैसे फिक्स डिपाजिट का झांसा देकर बीमा पॉलिसी में निवेश कर दी, जिसमें 1 लाख एक हजार रुपये प्रति वर्ष जमा कराना अनिवार्य था
गड़बड़ी- आईआरडीए के नियमानुसार 60 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्ति की पॉलिसी जारी नहीं की सकती। उम्र कम दर्शाई, कर्मचारी ने झूठा सत्यापन किया। पेंशन की आय 1850 रुपए महीना है जबकि पॉलिसी फॉर्म में कई गुना आय बढ़ाकर दिखाई गई।

 

केस-3
मामला- खेमराज मेघवाल की उम्र 80 व उसकी पत्नी की उम्र 65 वर्ष। पत्नी की उम्र कम कर पॉलिसी जारी कर दी। गड़बड़ी- उम्र में गड़बड़ के अलावा, आय में हेराफेरी। जांच में पैसा जमीन बेचने पर आया पाया गया।


जांच में प्रथम दृष्टया गड़बडिय़ां पाए जाने पर आईसीआईसीआई बैंक व प्रूडेंशियल लाईफ इंश्योरेन्स कंपनी के विरुद्ध मामला दर्ज किया है।
दिनेश एम.एन.,
एसओसी आईजी

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned