झीलों में कब्जे वही, सरकारी एजेंसियां मौन, कार्रवाई नहीं, जानें पूरी कहानी

झीलों में कब्जे वही, सरकारी एजेंसियां मौन, कार्रवाई नहीं, जानें पूरी कहानी

Mukesh Hingar | Updated: 16 May 2019, 04:10:33 PM (IST) Udaipur, Udaipur, Rajasthan, India

पिछोला हो या आयड़ जो कब्जे चिन्हित किए उनको हटाया नहीं

पिछोला झील किनारे सीमा को बताने के लिए सिंचाई विभाग ने मुटाम लगाए थे, वे आज भी लगे हैं लेकिन मुटाम के अंदर जो कब्जे हुए है उनको हटाने का काम नहीं हुआ है। सब कुछ सामने है, दिख रहा है, लेकिन सरकारी एजेंसियां मौन है। आयड़ नदी में कब्जे चिन्हित किए थे। सिंचाई विभाग, नगर निगम, यूआईटी व राजस्व विभाग की टीमों ने कब्जों पर निशान तो लगा दिए, लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

मुकेश हिंगड़/उदयपुर. झीलों व जलाशयों में कब्जे वहीं के वहीं है। बदला कुछ है तो सिर्फ कब्जों को हटाने के लिए नई-नई कमेटियां। कब्जे नहीं हटाने का फायदा उठाते हुए नए कब्जे भी होने लगे और झील का क्षेत्रफल घटता गया। उदयपुर की पहचान ही देश-दुनिया में फतहसागर व पिछोला झील से हैं। यहां पर्यटक भी इन झीलों को देखने और घूमने आते हंै लेकिन पिछोला झील के पेटे पर कब्जे बढ़ते जा रहे हैं, लेकिन सरकार को कोई चिंता नहीं है। पिछोला जमीन का जो क्षेत्रफल है वह इन कब्जों से कम हो गया है।

पत्रिका की पड़ताल में यह भी सामने आया कि पिछोला झील किनारे सीसारमा की तरफ मुटाम तक लगा दिए गए। यानी मुटाम तक झील का डूब क्षेत्र है, लेकिन वहां कब्जे हैं। उनको हटाने का काम नहीं किया। कुछ मुटाम जहां लगे वहां दूसरी गतिविधियां चल रही है। लोगों ने बताया कि झील जब पूरी भर जाती है तब पानी वहां तक फैलता है। प्रशासन की सुस्ती का नुकसान पिछोला ने झेला। मुटाम एक नहीं, दो-दो बार लगाए, किसी ने मुटाम हटा दिए, किसी ने आगे-पीछे सरकार दिए, लेकिन प्रशासन ने कोई सख्ती नहीं दिखाई तो ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की, जिससे दूसरे लोगों ने भी कब्जे करने शुरू किए। बताते है कि पिछोला के कुल भाग में से करीब 30 प्रतिशत भाग पर कब्जे व निर्माण हो गए हैं।

 

ऐसे पिछोला की बर्बादी करते गए
- वहां पर पहले से ही रिंग रोड थी। उस पर ट्रक गुजरते थे, लेकिन सरकारी योजनाओं को पैसा लगाने व सस्ते दामों पर - जमीने खरीदने वालों की जमीनों को फ्रंट पर लाने के लिए फिर से रिंग रोड बना दी गई।
- जब पिछोला का फुल टैंक लेवल हो जाता है तब पीछे रोड तक पानी जाता है। बहुत समझाया गया, लेकिन किसी ने सुना तक नहीं ।
- पिछोला से सटे क्षेत्रों में फॉर्म हाउस व बाडिय़ां बना दी गई, यही नहीं पिछोला झील से ही मिट्टी निकाल कर इन स्थानों का लेवल ऊंचा कर दिया ताकि झील का पानी वहीं रुक जाए।
- दूसरी रिंग रोड बनाने के दौरान दावे किए गए थे कि सुंदर क्षेत्र हो जाएगा, लेकिन आज वहां मलबा व गन्दगी भरी पड़ी है।
- पिछोला झील के डूब क्षेत्र और जहां मुटाम लगे हैं, वहां मैरिज गार्डन बना दिए गए है।

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