राजस्थान के एक गांव में आदिवासी लोगों ने लकड़ी व बांस से बनाया स्कूल भवन

patrika.com/rajsthan news

By: jasraj ojha

Published: 30 Jan 2021, 12:41 AM IST

कोटड़ा (उदयपुर ). आदिवासी क्षेत्र में सरकारी योजनाओं और विकास को लेकर तमाम दावे तो होते हैं लेकिन धरातल पर काम नजर नहीं आता है। जिले के कोटड़ा जैसे पिछड़े इलाकों में स्थिति बिल्कुल अलग नजर आती है। एेसा ही एक उदाहरण सामने आया है जिसमें घटिया निर्माण पर सरकारी स्कूल का भवन ढह गया। ग्रामीणों की मांग को सरकार ने अनसुना किया। इस पर ग्रामीणों ने चंदा एकत्रित कर लकड़ी व बांस से नया कामचलाऊ भवन खड़ा कर दिया। कोटड़ा क्षेत्र की लाम्बाहल्दू ग्राम पंचायत में सरली गांव है। यहां ऐसा ही एक विद्यालय है जो 2005 में बनकर तैयार हुआ और वर्ष 2017 में ढह गया। ग्रामीणों ने आला अधिकारियों को अवगत कराने के बाद भी प्रशासन ने मरम्मत और निर्माण पर ध्यान नहीं दिया। इससे खफा गांव के स्थानीय लोगों ने आपस मे चंदा एकत्रित किया और चबूतरा बनाया। उस चबूतरे पर लकड़ी और बांस को जोड़कर फिर से दूसरा स्कूल भवन तैयार कर लिया गया। अब इसमें बच्चे बैठेंगे। अब छोटी कक्षाओं के स्कूल खुलते ही इसमें ही बच्चे बैठकर पढ़ाई करेंगे।
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अधिकांश भवनों की स्थिति खराब
कोटड़ा उपखंड क्षेत्र में अधिकतर विद्यालय भवनों की स्थिति बदतर होती जा रही हैं। इन स्कूल भवनों के निर्माण कार्य कराने वाली एजेंसी ने घटिया निर्माण सामग्री उपयोग में लेने की वजह से कई स्कूल खंडहर की कगार पर पहुंच गए हैं। वही विद्यालय प्रबंधन समिति और शिक्षा विभाग के कर्मचारियों की अनदेखी के कारण कोटड़ा क्षेत्र में अभी भी दर्जनों विद्यालय आधे अधूरे हैं और कागजों में पूर्ण बता दिया है।
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तीन या चार कमरों में चल रहे सीनियर सेकंडरी स्कूल
कोटड़ा के ग्रामीण इलाकों में भवनों के अभाव के कारण बच्चों को अभी भी पढऩे के लिए खुले बरामदों में बैठना पड़ता है। वही कई बार तो दो या तीन कक्षाओं को एक साथ बिठाना पड़ता है। राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय खजुरिया में मात्र तीन कमरे है। वह भी जर्जर होने से कक्षा पहली से लेकर बारहवीं तक कुल 228 छात्र छात्राएं ग्राम पंचायत के कमरे में बैठकर पढ़ाई कर रहे है। राजकीय प्राथमिक विद्यालय निचला थला मात्र दो कमरों में संचालित हो रहा है। यहां वर्षों से अधूरे भवन खड़े नजर आते हैं।
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इनका कहना है...
विद्यालय भवन जर्जर होने से कभी भी अनहोनी या हादसा होने की वजह से बच्चों के भविष्य को देखते हुए ग्राम पंचायत के भवन का उपयोग किया जा रहा है।
विसन राम बुम्बरीया, सरपंच खजुरिया
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जर्जर स्कूलों की रिपार्ट बनाकर हमने विभाग को अवगत करवाया है लेकिन मरम्मत के लिए अभी हमारे पास कोई बजट नही है।
जीवन लाल खराड़ी, ब्लॉक शिक्षा अधिकारी कोटड़ा
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स्कूल भवन जर्जर होने व प्रशासन की ओर से मरम्मत नहीं कराने की वजह से ग्रामीणों ने चंदा एकत्रित कर चबूतरा बनाया। लकड़ी और बांस को जोड़कर काम चलाऊ स्कूल बनाया जा रहा है।
रमेश गमार, आदिवासी विकास मंच कार्यकर्ता

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