राजस्थान में अब तक बरसों से उलझे मामलों को निपटाएगी ये समिति

राजस्थान में अब तक बरसों से उलझे मामलों को निपटाएगी ये समिति

Mukesh Hingar | Updated: 28 Aug 2018, 07:00:00 AM (IST) Udaipur, Rajasthan, India

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उदयपुर. नगरीय विकास को लेकर यूआईटी में बरसों से कोर्ट-कचहरी में चल रहे और पेंच में फंसे मामलों को लेकर अब सरकार ने भी चिंता की है। राज्य सरकार ने प्रदेश की सभी नगर विकास प्रन्यास में ऐसे मामलों के निस्तारण को लेकर एक समझौता समिति का गठन करने की अधिसूचना जारी की है। जोर दिया गया है कि प्रन्यास चेयरमैन की अध्यक्षता वाली ये समिति इन पुराने मामलों में रास्ता निकाल कर राजीनामा कराए ताकि उनका व सरकार का समय व धन बर्बाद नहीं हो।
राज्य के नगरीय विकास विभाग ने यूआईटी और पक्षकारों के बीच विवादों के निस्तारण के लिए समझौता समिति बनाने, उसके गठन एवं प्रक्रिया संबंधी निर्देश जारी कर दिए है। ये समिति प्रदेश की सभी यूआईटी में लागू होगी। ऐसे कई मामले है जो बरसों से कोर्ट-कचहरी में चल रहे है उनका निस्तारण इस समिति में रखकर करने का प्रयास किया जाएगा।
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इसलिए जरूरत पड़ी समिति की
- लम्बित प्रकरणों से आमजनों को मानसिक तनाव झेलना पड़ रहा है।
- यूआईटी पर भी ऐसे मामलों से आर्थिक व प्रशासनिक भार लगातार बढ़ रहा है।
- सार्वजनिक हित के कई कार्य अटके पड़े है, जिससे योजनाबद्ध विकास रुका पड़ा है।
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समिति में ये होंगे शामिल
- समिति का अध्यक्ष यूआईटी चेयरमैन होंगे
- समिति का सदस्य सचिव यूआईटी सचिव होंगे
- यूआईटी का लेखा सेवा का वरिष्ठ अधिकारी व वरिष्ठ नगर नियोजक सदस्य होंगे
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समिति ऐसे प्रकरणों को निपटाएंगी
- भवन निर्माण स्वीकृति संबंधी
- अवाप्तशुद भूमि के मुआवजा भुगतान संबंधी
- भूमि या भवन के अनाधिकृत उपयोग
- बिना स्वीकृति या स्वीकृति के विपरीत निर्माण
- अन्य व्यक्तियों को आवंटित या नीलामी से बेचे भूखंडों के कब्जा देने संबंधी
- लीज डीड संबंधित मामले
- अन्य प्रकरण
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समझौता समिति की शक्तियां
- समिति ऐसी संपत्तियां जिनकी अनुमानत: लागत प्रचलित आरक्षित दर के अनुसार 50 लाख रुपए तक है उनके प्रकरणों का निस्तारण कर सकेगी, ऐसे मामलों में तीन लाख रुपए तक ब्याज, शास्ति, शुल्क व अन्य चार्जेज में गुण-दोष के आधार पर छूट देने के लिए अधिकृत होगी।
- समिति के निर्णय में यदि कोई शुल्क या अन्य राशि जमा करवाने का अलग से आदेश किया जाता है तो वह राशि न्यास के कोष में जमा कराई जाएगी।
- समिति का निर्णय तब तक लागू नहीं किया जाएगा जब तक आवेदक की ओर से समिति द्वारा निर्धारित शुल्क जमा नहीं करवाया जाता है।
- समिति का निर्णय तब क्रियान्वयन किया जाएगा जब आवेदक संबंधित न्यायालय में दायर वाद वापस लेगा, इसी प्रकार निर्णय के बाद किसी मामले में यूआईटी ने भी वाद दायर कर रखा है तो वह वापस लेगी।
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आवेदन शुल्क 1000 रुपए
ऐसे मामलों के निस्तारण के लिए समझौता समिति के समक्ष आवेदन करना होगा। आवेदक यूआईटी चेयरमैन/सचिव के नाम आवेदन करेगा और उसके साथ 1000 रुपए का शुल्क जमा कराएंगा। आवेदन के साथ उसका फोटो और संबंधित प्रकरण की जानकारी और दस्तावेजों की स्व सत्यापित प्रतियां संलग्न करनी होगी।
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इनका कहना है....
कई विवादों के निस्तारण लम्बे समय तक नजर अंदाज किया जाना सार्वजनिक हित में नहीं है। राज्य सरकार ने क्षेत्र के योजनाबद्ध विकास को लेकर राजस्थान नगर न सुधार अधिनियम 1959 की धारा 104-क में प्रदत शक्तियों का प्रयोग करते हुए समझौता समितियों का गठन किया है।
- राजेन्द्र सिंह शेखावत (संयुक्त शासन सचिव प्रथम) यूडीएच

 

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