अनियंत्रित हार्ट बीट से बढ़ सकता है स्ट्रोक का खतरा

तीन दिवसीय इंडियन सोसायटी ऑफ इलेक्ट्रो कार्डियोलॉजी कांफ्रेंस

By: bhuvanesh pandya

Published: 24 Feb 2020, 12:40 PM IST

भुवनेश पंड्या

तीन दिवसीय इंडियन सोसायटी ऑफ इलेक्ट्रो कार्डियोलॉजी कांफ्रेंस का समापन- देशभर के 500 से अधिक एक्सपट्र्स ने लिया हिस्साउदयपुर. हृदय रोग विशेषज्ञ डॉक्टर जितेंद्र सिंह मक्कड़ ने बताया कि हृदय से संबंधित बीमारियों में एट्रियल फि ब्रिलेशन एक गंभीर बीमारी है। इसमें हार्ट के ऊपरी चेंबर की धड़कन 400 से 500 तक चली जाती है और निचलेे चेंबर की धड़कन भी अनियंत्रित हो जाती है। ऐसे में मरीज को हार्ट अटैक की संभावना भी बढ़ जाती है, जो उसका पूरा जीवन भी प्रभावित कर सकती है। यह जानकारी इंडियन सोसायटी ऑफ इलेक्ट्रो कार्डियोलॉजी की ओर से आयोजित तीन दिवसीय आईएसईकॉन 2020 कॉन्फ्रें स में एक्सपट्र्स ने बताई। रविवार को कांफ्रेंस का समापन हुआ जिसमें एक्सपट्र्स ने अलग-अलग विषयों पर अपनी राय रखी। कांफ्रेंस में एक्सपट्र्स ने बताया कि एट्रियल फि ब्रिलेशन से मरीज को एनर्जी कम होना, चक्कर आने जैसी समस्या होती है, लेकिन इन सब में सबसे खतरनाक मरीज को स्ट्रोक आने की संभावना है। मरीज को इस समस्या से बचाने के लिए उसका रेडियो फ्रि कवेंसी एबलेशन प्रक्रिया से उपचार किया जाता है। इसमें हार्ट के चैंबर के बीच बने एक्स्ट्रा पाथ वे को जलाया जाता है।

----

कॉन्फ्रेंस के आयोजन सचिव डॉ जितेंद्र सिंह मक्कड़ ने बताया कि कॉन्फ्रेंस में देशभर से इलेक्ट्रो कार्डियोलॉजी विशेषज्ञों ने भाग लिया। इस दौरान ईसीजी तकनीक द्वारा हार्ट रिदम से जुड़ी समस्याओं के इलाज की नई तकनीकों पर विशेषज्ञों ने जानकारियां दी। डॉण् अपर्णा जयसवाल ने बताया कि कॉन्फ्रेंस में दिल्ली से डॉ एस बी गुप्ताए मुंबई से डॉ आशीष नाबर, बांग्लादेश से डॉक्टर हबीबा सहित कई विशेषज्ञो ने भाग लिया।

bhuvanesh pandya Reporting
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned