कमिशनर कार्यालय के चपरासी से प्रताडि़त परिवार ने दे डाली एेसी धमकी

कमिशनर कार्यालय के चपरासी से प्रताडि़त परिवार ने दे डाली एेसी धमकी

Gopal Bajpai | Publish: Feb, 15 2018 07:02:35 PM (IST) Ujjain, Madhya Pradesh, India

संभागायुक्त कार्यालय के भृत्य से परेशान परिवार ने लगाई न्याय की गुहार झूठे प्रकरण दर्ज कराकर परिवार को किया मानसिक प्रताडि़त

उज्जैन. संभागयुक्त कार्यालय के भृत्य द्वारा दर्ज कराए झूठे प्रकरणों के चलते जिला बदर का नोटिस मिलने से परेशान एक परिवार ने न्याय की गुहार लगाई है। केवल एक ही फरियादी से जुड़े केस होने पर ही पुलिस ने पीडि़त पर जिला बदर की कार्रवाई प्रस्तावित कर एडीएम कार्यालय में फाईल पहुंचा दी। इसी से आहत पीडि़त ने मीडिया को फरियाद सुनाई।

तेजाब फेंकने व मारपीट का प्रकरण दर्ज कराया

फ्रीगंज में मिनी चौपाटी के नाम से चायनिज फूड दुकान संचालित करने वाले नारायणपुरा निवासी संतोष प्रजापति ने पत्नी सुनीता व बेटी के साथ गुरुवार को प्रेस क्लब में प्रेस वार्ता के दौरान बताया कि तीन वर्ष पूर्व तक फ्रीगंज गुरुद्वारे के पास अमरजीत सिंह लक्की की दुकान में मिनी चौपाटी के नाम से दुकान संचालित करता था। अमरजीतसिंह ने दुकान का किराया बढ़ाया और संतोष को किराया अधिक लगने के कारण उसने दुकान छोड़ दी और उसके टीक सामने अपनी दुकान शुरू कर दी। व्यवसायिक प्रतिस्पर्धा के कारण अमरजीत सिंह ने जो कि संभागायुक्त कार्यालय में भृत्य है, एक महिला के माध्यम से संतोष पर तेजाब फेंकने व मारपीट का प्रकरण दर्ज कराया। विगत तीन वर्षों में कमिश्नर कार्यालय में पदस्थ होने के कारण उसने संतोष पर चार झूठे प्रकरण दर्ज कराए और फिर उसे जिला बदर का नोटिस पहुंचाया। संतोष का कहना है कि व्यवसायिक प्रतिस्पर्धा को अमरजीत सिंह लक्की व्यक्तिगत रूप से ले रहा है और उसे व उसके परिवार को प्रताडि़त कर रहा है। इस संबंध में उसने एसपी, कलेक्टर, संभागयुक्त के साथ मुख्यमंत्री को भी शिकायत दर्ज कराई परंतु कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

आत्महत्या के सिवाय कोई और रास्ता नहीं

गुरुवार को एक प्रेसवार्ता में संतोष और उसके परिवार ने मीडिया से न्याय की गुहार लगाई है। संतोष का कहना है कि जिला बदर का आदेश होने के बाद उसका परिवार ही बिखर जाएगा और उसके पास आत्महत्या के सिवाय कोई और रास्ता नहीं बचेगा। संतोष के आवेदन और अमरजीत की एफआईआर संतोष का कहना है कि इस लड़ाई के दौरान जब भी उसने अमरजीत के खिलाफ कार्रवाई का प्रयास किया तो उसके आवेदन ले लिए जाते हैं, जबकि संभागायुक्त कार्यालय में पदस्थ होने के कारण उसके द्वारा एफआईआर दर्ज करा दी जाती है। इसी कारण उस पर चार झूठे प्रकरण उसने दर्ज करा दिए हैं। अब प्रशासन की ओर से इन चार प्रकरणों के आधार पर ही उसे जिला बदर का नोटिस भेजा है। इन चार प्रकरणों में से दो में न्यायालय ने उसे बरी भी कर दिया है।

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