बड़ा काम भी कैसे आसानी से पूरा कर देते हैं इनके हाथ, सेवा में कुछ तो है बात

अंतर्राष्ट्रीय स्वयंसेवक दिवस आज: किसी कार्य में लोगों की भागीदारी से आसान होती है लक्ष्य प्राप्ति, शहर में भी कई बड़े लक्ष्य जनता की भागीदारी से हुए पूरे

उज्जैन. स्वयं सेवक या वालेंटियर... किसी कार्य में इनकी भागीदारी कार्य की शुरुआत में ही सफलता के संकेत दे देती है। उज्जैन के लिए तो यह शब्द व्यवस्थाओं का हिस्सा बन चुका है क्योंकि यहां के कई बड़े आयोजन, इन्हीं के सहयोग से सफलतापूर्वक संपन्न होते हैं। फिर वह सिंहस्थ जैसा सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन हो, बाबा महाकाल की सवारी, शहर की स्वच्छता रेंकिंग या फिर ग्रीन सिटी का सपना, हर बड़े लक्ष्य की सफलता में यहां कि वालेंटियर की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

गुरुवार 5 दिसंबर को अंतर्राष्टीय स्वयंसेवक दिवस है। यह दिवस स्थानीय, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सभी स्तरों पर परिवर्तन करने में लोगों की भागीदारी के सम्मान का एक वैश्विक उत्सव माना जाता है। यह अवसर सामुदायिक स्तर पर स्वयंसेवकों की बढ़ती संलिप्तता और भागीदारी को रेखांकित करता है। शहर के लिए यह दिन इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि हर साल कई बड़े आयोजनों की सफलता के पीछे बड़ा हाथ स्वयसेवकों का ही होता है। यह एसे स्वयंसेवक हैं जो शहर की प्रतिष्ठा, विकास, सोहार्द या अन्य किसी उद्देश्य से नि:शुल्क अपनी सेवा देते हैं। इनमें कुछ समय-समय पर अपना सहयोग देते हैं तो कुछ संगठन बनाकर शहर हित के किसी न किसी कार्य में नि:स्वाथ ही जुटे रहते हैं। अंतर्राष्ट्रीय स्वयं सेवक दिवस पर एक रिपोर्ट-

विभाग ने ध्यान नहीं दिया तो युवाओं ने किया संधारण

शहर विकास और दूसरों की मदद के लिए ग्रुप उज्जैन वाले के सदस्यस वर्षभर सक्रीय रहते हैं। कभी शहर को हराभरा बनाने के लिए पौधारोपण करते हैं तो कभी शहर की सफाई में हाथ बंटाते हैं। कुछ समय पूर्व फ्रीगंज स्थित टॉवर के छोटे गुम्बद क्षतिग्रस्त हो गए थे। नगर निगम या अन्य विभाग ने इसके संधारण पर ध्यान नहीं दिया तो उज्जैन वाले ग्रुप के कुछ युवा सदस्यों ने अपने खर्च से इनकी मरम्मत की थी। इसके बाद यह ग्रुप काफी चर्चाओं में आया था। हाल में क्षिप्रा नदी में बाड़ के कारण आसपास फैली गंदगी व वृक्षों पर फंसे पन्नियों के कचरे को भी ग्रुप सदस्य, रूपांतरण सस्था के सदस्यों ने मिलकर साफ किया। पिछले वर्ष स्वच्छता मिशन के दौरान ग्रुप ने महाकाल क्षेत्र में सार्वजनिक सुविधाघरों की सफाई में भी हाथ बंटाया था। पूरा ग्रुप फेसबुक के माध्यम से संचालित होता है। खास बात यह कि किसी कार्य के लिए गु्रप सदस्य फोन या वॉट्सएप पर आव्हान नहीं करते हैं। सिर्फ फेसबुक पर आगामी कार्यक्रम की सूचना पोस्ट की जाती है और स्वेच्छा से लोग सहयोग करने उक्त आयोजन में शामिल हो जाते हैं।

धार्मिक आयोजनों में वालेंटियर की बड़ी भूमिका

उज्जैन में प्रति वर्ष कई बड़े धार्मिक आयोजन होते हैं और इनमें भीड़ नियंत्रण के साथ ही श्रद्धालु-पर्यटकों की मदद, भोजन-पानी आदि व्यवस्था में वालेंटियर्स की बड़ी भूमिका होती है। सिहस्थ महापर्व इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। इसके अलावा बाबा महाकाल की सवारी, पंचक्रोशी यात्रा सहित विभिन्न धार्मिक आयोजनों में स्वयंसेवक तन,मन, धन से भागीदारी करते हैं।

शहर में सेवा के यह उदाहरण भी

- रॉबिनहुड संस्था द्वारा गरीबों को भोजन वितरित किया जाता है।
- मां क्षिप्रा तैराक समिति के सदस्य नदी के घाटों पर तैनात रह लोगों की सुरक्षा करते हैं। विभिन्न स्नान पर्व में दर्जनों सदस्य सेवा देते हैं।
- युवा उज्जैन ग्रुप द्वारा जरुरतमंदों को कंबल-कपड़े वितरण, स्वास्थ्य सुविधाएं, आर्थिक सहयोग, जनजागरण आदि किया जाता है।
- कर्म सेवा धर्म सेवा संगठन द्वारा पौधा रोपण, जरूरमंद के लिए आर्थिक मदद, जनजागरण में भागीदारी की जाती है।
- संस्था रुपांतरण द्वारा शहर स्वच्छता, पौधारोपण, पर्यावरण संरक्षण का कार्य किया जाता है।
- शहर के विभिन्न सामाजिक व धार्मिक संगठन आयोजनों में सहयोग करते हैं।

एक्सपर्ट व्यू

हमारे संस्कार में शामिल है सेवा

कई बड़े आयोजन बड़ी आसानी से सफलता पूर्वक संपन्न हो जाते हैं, इसके पीछे बड़ा कारण स्वयंसेवक या मानसेवियों का सहयोग होता है। सिंहस्थ २०१६ इसका बड़ा उदाहरण हैं। तब विभिन्न व्यवस्थाओं में 15-20 हजार स्वयंसवेकों ने दिनरात अपनी सेवा दी और यही कारण रहा कि करोड़ों की संख्या में आए श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिली। प्रशासनिक अधिकारी-कर्मचारी तो किसी आयोजन में अपनी ड्यूटी निभाते हैं लेकिन स्वयंसेवक नि:स्वाथ स्वेच्छा और पूरी लगन से सेवा देते हैं जो शासन-प्रशासन के लिए भी काफी मददगार होती है। सिंहस्थ में करीब सौ हेल्प डेस्क स्थापित की गई थी जिन पर विभिन्न शिफ्ट में 24 घंटे शहर के युवा, विद्यार्थियों ने सेवा दी। क्षिप्रा घाटों पर बड़ी संख्या में तैराकों ने सेवा दी। सामाजिक संगठन व अन्य संस्थाओं द्वारा 600 से अधिक प्याऊ लगाए गए। कई लोगों ने भोजन-पानी, उपचार आदि व्यवस्था में भागीदारी की। सिर्फ सिंहस्थ ही नहीं, कई विभिन्न कार्यक्रम, आयोजनों में स्वयंसेवकों का सहयोग मिलता है। हाल में महाकाल मंदिर की सफाई में करीब 150 मानसेवियों ने सेवा दी थी। दरअसल यह हमारे संस्कारों में ही शामिल है। स्वयंसेवा यह साबित भी करता है कि कोई कार्य छोटा-बड़ा नहीं होता, हर कार्य सम्मानजनक है। यह व्यक्ति के अहंकार को भी तोड़ता है।

- एसएस रावत, महाकाल मंदिर प्रशासक व तत्कालीन सिंहस्थ उपमेला अधिकारी

aashish saxena
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