international men's day: अच्छा नागरिक ही समाज का आधार

Ujjain News: दुनिया में सभी इंसान एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और किसी भी इन्सान के द्वारा लिए गए निर्णय किसी अन्य के ऊपर नकारात्मक और सकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।

उज्जैन. एक अच्छा नागरिक ही समाज का आधार और शोभा है। एक नागरिक होने का गर्व हमें तभी मिल सकता है जब हम लोगों में शिक्षित, कर्तव्यनिष्ठा, देश भक्ति, चरित्रवान, सत्य बोलने वाला, परिश्रमी और स्वावलंबी जैसे गुण हो। ऐसे नागरिक का जीवन और आचारण अनुकरणीय होता है। 19 नवंबर को विश्व नागरिक दिवस मनाया जाता है।
विश्व नागरिक दिवस की अवधारणा के पीछे यह अनुमान लगाया जाता है कि पृथ्वी की प्रक्षेप गति सूर्य को वर्ष में दो बार पृथ्वी का चक्कर लगाने के लिए सक्षम बनाती है। सूरज क्षितिज से अद्र्ध गोले की तरह दिखता है,लेकिन पृथ्वी का आधा भाग प्रकाशमय और आधा भाग अंधकारमय दिखता है। इसी कारण से वर्ष का आधा भाग बसंत और आधा भाग शरद ऋतु के रूप में परिभाषित किया जाता हैं। इस ब्रह्मांडीय समानता ने ही मानव जीवन के अनुरूप भविष्यवाणी की थी। इसकी गणना कई रूपों में, जैसी नागरिकों के अधिकारों और उनके कर्तव्यों की समानता के संदर्भ में की जाती हैं।

 

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विश्व नागरिक दिवस का मुख्य उद्देश्य

विश्व नागरिक दिवस का मुख्य उद्देश्य यह है कि इस दुनिया में सभी इंसान एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और किसी भी इन्सान के द्वारा लिए गए निर्णय किसी अन्य के ऊपर नकारात्मक और सकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। अत: इस दिवस को अति सहयोग दिवस के रूप में मनाया जाना चाहिए।

देश और नागरिक एक-दूसरे पर आश्रित
मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और यह दूसरे मनुष्यों के साथ मिलकर रहता है। विभिन्न संबंधों के आपस में जुड़े होने की प्रक्रिया ही नागरिक जीवन की आधारशिला है। एक अच्छा नागरिक देश को शक्ति संपन्न, समृद्ध और संगठित बनाता है। उपर्युक्त गुण जिस भी देश के व्यक्ति में होंगे। वह नि:संदेह एक अच्छा नागरिक होगा और ऐसे नागरिक पर सब गर्व करेंगे। ऐसे नागरिक से बड़ा कोई देश भक्त नहीं हो सकता। देश और नागरिक दोनों परस्पर एक दूसरे पर आश्रित हैं। कोई भी देश और नागरिक तभी गौरवान्वित हो सकता है जब एक नागरिक सच्चे अर्थों में देश के लिए अपने कर्तव्य और उत्तरदायित्व का पूर्ण रूप से निर्वाह करें,जिससे देश भी ऐसे नागरिक पर गर्व कर सके।
- दर्शन दुबे, शिक्षक

 

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स्वच्छ-स्वस्थ के बिना संकल्पना अधूरी
स्वच्छ और स्वस्थ भारत के बिना श्रेष्ठ भारत की संकल्पना अधूरी है। गंदगी एवं बीमारी श्रेष्ठ भारत के रास्ते में बाधा है। भारत आज सभ्यता एवं संस्कृति के एक आधारभूत पैमाने स्वच्छता के मामले में विश्व में निचले पायदान पर खड़ा है। यह सही बात है कि विशाल जनसंख्या, अनियंत्रित शहरीकरण, बाजार का विस्तार, उपभोक्तावादी प्रवृत्ति ने स्वच्छता को चुनौती दी है, लेकिन प्रश्न यह है कि इन चुनौतियों का सामना करना किसका दायित्व है। हम सभी अपने उपभोग के अधिकार सुनिश्चित करना चाहते हैं, लेकिन इन चुनौतियों का सामना करने के दायित्व से मुंह फेर लेते हैं। हर नागरिक का दायित्व है कि वे अपने घर,समाज, मोहल्ले नगर से नैतिक जिम्मेदारियों का पालन करें ।
- रमाकांत जोशी, अवंतिका तीर्थ पुरोहित

Lalit Saxena
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