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उज्जैन का रूद्रसागर अब खिलखिला उठेगा...यह होगा काम

यहां क्षिप्रा का स्वच्छ पानी तो लेजर लाइटिंग शो में उभरेगी महाकाल की महिमा, मृ़दा प्रोजेक्ट के द्वितीय फेज में २० से २५ करोड़ से होगा सागर का कायाकल्प, श्रृद्धालु के लिए आकर्षक का केंद्र रहेगा, बर्ड आइलैंड से लेकर संस्पेंशन ब्रिज तक बनेगा

उज्जैन

Updated: November 26, 2021 09:47:06 pm

उज्जैन। महाकाल मंदिर के पीछे स्थित पौराणिक रूद्रसागर आने वाले में दिनों में आकर्षण का केंद्र बनने वाला है। रूद्रसागर में क्षिप्रा का स्वच्छ जल की अठखेलियां होगी तो आकर्षक लेजर लाइटिंग शो लोगों को मंत्रमुग्ध कर देगा। यहां अब तक का सबसे आधुनिकतम लाइटिंग शो लगाने की कवायद चल रही है। यहां बर्ड आइलैंड के साथ संस्पेंशन ब्रिज भी होगा, जिससे गुजरकर सागर के सौंदर्यीकरण को बेहतर तरीके से निहारा जा सकेगा। रूद्रसागर को संवारने में ही करीब २० से २५ करोड़ रुपए की राशि खर्च की जाना प्रस्तावित है। इसके बाद रूद्रसागर बिल्कुल नए रूप में दिखाई देगा। यह धार्मिक पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र होगा तो शहर की नई पहचान के रूप में भी जाना जाएगा।
रूद्रसागर का यह विकास मृदा प्रोजेक्ट के द्वितीय फेज के तहत होने जा रहा है। इसके लिए स्मार्ट सिटी कंपनी द्वारा योजना तैयार की गई है। महाकाल मंदिर विस्तारिकरण में रूद्रसागर भी शामिल है। वहीं मंदिर में प्रवेश के लिए रूद्रगसार क्षेत्र से ही श्रृद्धालुओं का प्रवेश मिलेगा। लिहाजा सागर को नया स्वरूप दिया जा रहा है। करीब चार से पांच हेेक्टयर में फैले बड़े व छोटे रूद्रगसार को रमणीक स्थल के रूप में संवार जाएगा। सागर में साफ पानी के साथ यहां घाट व पाथ-वे भी बनाया जाएगा। ताकि यहां आने वाले श्रृद्धालु इसके किनारे बैठकर अपना समय भी व्यतित कर सके। स्मार्ट सिटी कंपनी के इंजीनियरों की माने तो रूद्रसागर को विकसित करने की योजना तैयार है। रूद्रसागर में आने वाले समय में महाकाल मंदिर का अक्श दिखाई देगा। सागर किनारे वृक्ष और भगवान की मृर्तियां इसे और भव्यता देगी।
इस तरह बदलेगा रूद्रसागर का स्वरूप
सीवरेज का रूकेगा पानी
रूद्रसागर में सीवरेज का पानी रोकने के लिए कवायद शुरू हो गई है। सागर के आसपास की बस्तियों से निकलने वाली नाले व नालियों को टाटा सीवरेज प्रोजेक्ट के तहत जोड़ा जा रहा है। काफी हद तक इस दिशा में काम भी हो चुका है। वहीं सिंहस्थ में यहां अंडरग्रांउड नाला भी बन चुका है। ऐसे में रूद्रसागर में गंदगी मिलना पूरी तरह से बंद हो जाएगा। सागर में बारिश का पानी ही रहेगा।
क्षिप्रा का जल सागर में डालेेंगे
रूद्रसागर में यूं तो बारिश का पानी रहेगा बावजूद इसका जलस्तर बनाए रखने के लिए क्षिप्रा नदी से पानी डाला जाएगा। इसके लिए नृसिंहघाट पर २ एमएलडी क्षमता का प्लांट भी डाला जा रहा है। पाइप लाइन के माध्यम से पानी रूद्रसागर में डालेंगे। गर्मी के दिनों में जब सागर में पानी कम होगा तो इसी से पूर्ति की जाएगी।
स्वच्छ पानी के लिए ऑक्सिजन फिल्टर प्लांट
रूद्रसागर में पानी की $गुणवत्ता बेहतर रहे इसके लिए ऑक्सिजन फिल्टर प्लांट लगाने की योजना भी है। सिंहस्थ २०१६ में जिस तरह क्षिप्रा का जल स्वच्छ और ऑक्सिजन युक्त रहा, उसी तरह रूद्रसागर का पानी भी रहेगा। इससे सागर में पानी में दूर्गंध नहीं रहेगी और जलीय जंतु भी नहीं मरेंगे।
बर्ड आइलैंड लुभाएगा पक्षियों को
सागर में एक टापू बनाने की योजना है। यह बर्ड आइलंैड के रूप में रहेगा। जहां पक्षियों के रहने के लिए पौधे व अन्य व्यवस्था रहेगी। यहां आम व्यक्ति नहीं जा सकेंगे। ऐसे में इस बर्ड आइलैंड पर पक्षियों का जमघट रहेगा और इनकी उड़ान लोगों का मनमोह लेगी।
संस्पेंशन ब्रिज से गुजर सकेंगे यात्री
रूद्रसागर पर संस्पेंशन ब्रिज भी बनाया जाना है। यह ब्रिज चारधाम मंदिर के यहां से होकर महाकाल मंदिर के पीछे फेसेलिटी सेंटर तक आएगा। इस ब्रिज से होकर यात्री महाकाल मंदिर तक पहुंच सकेंगे। ब्रिज पैदल पुल रहेगा, ऐसे में यहां से गुजरने पर यात्री प्रकृति का आंनद ले सकेंगे।
यात्रियों को लुभाएगा लेजर लाइटिंग शो
रूद्रसागर में देश को अब तक का सबसे बेहतर लेजर लाइटिंग शो लगाया जाना है। खुद मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान इसके लिए कह चुके है। अधिकारियों की एक टीम दिल्ली के अक्षरधाम मंदिर में लगे लाइटिंग शो को भी देख चुकी है। अधिकारी बता रहे हैं कि इस लाइटिंग शो में उज्जैयिनी विशेषकर महाकाल की महिमा यात्री देख सकेंगे।

Ujjain's Rudrasagar will bloom now... this will work.
यहां क्षिप्रा का स्वच्छ पानी तो लेजर लाइटिंग शो में उभरेगी महाकाल की महिमा, मृ़दा प्रोजेक्ट के द्वितीय फेज में २० से २५ करोड़ से होगा सागर का कायाकल्प, श्रृद्धालु के लिए आकर्षक का केंद्र रहेगा, बर्ड आइलैंड से लेकर संस्पेंशन ब्रिज तक बनेगा

सागर के चारों और रहेगी हरियाली
रूद्रसागर के विकास में चारों और पौधे और वृक्ष भी रहेंगे। यह हरियाली से आच्छादित रहेगा। बड़े रूद्रसागर की तरह ही छोटे रूद्रसागर को भी संवारा जाना है। यहां अन्नक्षेत्र को हटाया जाना है। इस खाली जगह पर ही पौधे लगाए जाएंगे और सौंदर्यीकरण किया जाएगा।
सालों से विकास की बांट जोह रहे सागर
रूद्रसागर के विकास को लेकर लंबे समय से कवायद चल रही है। पूर्व में सागर को गहीरकरण को लेकर लाखों रुपए खर्च किए गए। सिंहस्थ २०१६ में सागर में मिलने वाले नाले को पक्का कर अंडरग्राउंड किया गया। सागर के आसपास पाल बांधी गई। वहीं बावजूद इसके सागर की दशा नहीं सुधरी। वहीं अब उम्मीद है कि सागर अपने पुराने स्वरूप में लौटेगा और शहर की पहचान बनेगा।
सागर के गहरीकरण होगा, नि:शुल्क मिट्टी ले जा सकेंगे
रूद्रसागर का डीवाटरिंग, डीसिल्टिंग तथा गहरीकरण किया जाएगा। स्मार्ट सिटी कंपनी ने इसके लिए कवायद शुरू की है। इकसे तहत जिस किसी व्यक्ति-संस्था को यदि मिट्टी की आवश्यकता हो तो वह स्वयं के संसाधनों व व्यय पर ले जा सकता है। इसके लिए संबंधित को कार्यपालक निदेशक उज्जैन स्मार्ट सिटी लिमिटेड की पूर्व अनुमति लेना होगी। कपंनी से ५ दिसंबर से पहले तक आवेदन कर अनुमति भी प्राप्त की जा सकती है।


इनका कहना
रूद्रसागर के सौंदर्यीकरण और विकास के लिए कार्ययोजना बनाई गई है। यहां अब तक का सबसे आधुनिकतम लाइटिंग शो बर्ड आइलैंड, संस्पेंशन ब्रिज सहित अन्य काम प्रस्तावित है। विकास कार्य पूरे होने पर रूद्रसागर पर्यटकों के लिए आकर्षण का केेंद्र रहेगा।
- आशीषसिंह, कलेक्टर व अध्यक्ष, स्मार्ट सिटी कंपनी

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