मेंटेनेंस को तरसते हैं स्कूलों के शौचालय

दुर्दशा के शिकार हैं शासकीय स्कूलों के शौचालय

By: shivmangal singh

Published: 07 Jun 2018, 05:48 PM IST

उमरिया. शहरी व ग्रामीण शासकीय स्कूलों के शौचालयों की सफाई कराने और उनको उपयोग के लायक बनाने के लिए सरकार लगातार निर्देश दे रही है। इसके बावजूद नगरीय निकायों और ग्राम पंचायतें इस ओर ध्यान नहीं दे रहीं हैं। स्कूलों के शौचालय
दुर्दशाग्रस्त हैं। निकाय और पंचायतें शासकीय आदेशों की अवहेलना कर रहीं हैं। जबकि आदेश के परिपालन के लिए जिला शिक्षा केन्द्र कई बार जनपद कार्यालयों, ग्राम पंचायतों व नगरपालिकाओं को पत्र लिख चुका है।
सीइओ जनपद इस संबंध में उदासीनता बरत रहे हैं। जिले में 801 प्राथमिक तथा 382 की माध्यमिक शालाएं हैं। लगभग 86 हजार बच्चे अध्ययनरत हैं। 1182 स्कूलों में से ४०० से भी अधिक स्कूल हैं। यहां के शौचालय जर्जर और गंदे हैं। इनका उपयोग भी नहीं हो रहा है। सैकड़ों शौचालय ऐसे हैं जहां के शिक्षक अपने साधनों से साफ-सफाई कराते हैं। कभी पालक शिक्षक संघ व्यवस्था करा देता है। शत-प्रतिशत स्कूलों में शौचालय बने हुए हैं।
स्कूलों के पास साफ-सफाई के संसाधन नहीं हैं, इसलिए उन्हें दूसरी संस्थाओं पर सफाई के लिए आश्रित रहना पड़ रहा है। शौचालयों की साफ-सफाई और रखरखाव के लिए लगभग तीन वर्षों पूर्व आयुक्त नगरीय प्रशासन ने नगरपालिकाओं के लिए आदेश जारी किए थे कि नगर पालिका क्षेत्र में शिक्षा उपकर की राशि से स्कूल शौचालयों की सफाई व्यवस्था कराई जाए तथा उन्हे उपयोग के योग्य बनाया जाए। दूसरी ओर सचिव ग्रामीण विकास पंचायती राज्य ने निर्देश दिए थे कि सभी ग्राम पंचायतें पंच परमेश्वर योजना मद की राशि के हिस्से से ग्रामीण विद्यालयों के शौचालयों की सफाई और उनका जीर्णोद्धार कराने की व्यवस्था करें।
स्कूलों का नियमित रख रखाव व जीर्णोद्धार परिसर की सफाई आदि का कार्य कराया जाए, लेकिन इन आदेशों का न तो नगरपालिका ने और न ही ग्राम पंचायतों ने पालन किया। स्कूलों में बने शौचालयों की हालत दयनीय है। किसी में दरवाजा तिरछा लगा है तो कहीं पानी की समुचित व्यवस्था नहीं है। इसके अलावा चार सौ से भी अधिक स्कूलों के शौचालय तो ऐसे हैं जिनमें गंदगी भरी होने के कारण उनका उपयोग ही नहीं हो रहा है। इसलिए यहां शौचालय बनने के बाद भी बच्चों और स्टाफ के लोगों को निस्तार करने में परेशानी जा रही है। बार-बार ग्राम पंचायत सचिवों और सरपंचो से कहने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। कुछ ग्राम पंचायतों ने तो यह कहकर टाल दिया कि उनके पास भी स्वीपर कहां है जो साफ-सफाई कराएंगे।
नगर की कई स्कूलें ऐसी हैं। जहां शौचालय तो दुर्दशाग्रस्त है ही भवन व परिसर भी बदहाल हैं। इन स्कूलों में कभी सफाईकर्मी नहीं भेजे जाते हैं। भवनों की मरम्मत व रंग रोगन का कार्य भी नहीं कराया जा रहा है। परिसर में कचरे का अंबार लगा हुआ है। 16 जून से नया शिक्षा सत्र भी आने वाला है, इसके बावजूद उदासीनता बरती जा रही है। जबकि इन स्कूलों को नए सत्र में विद्यालय संचालन से पूर्व भलीभांति व्यवस्थित करने के निर्देश दिए जा चुके हैं।
डीपीसी भी दे सकेंगे रखरखाव की राशि
स्किूलों का रखरखाव करने शासन ने प्रथम बार यह व्यवस्था की है कि जिला शिक्षा केन्द्र को प्रति स्कूल 36 सौ रुपए की राशि जारी करने का निर्देश दिया गया है। जिला शिक्षा केन्द्र के जिला परियोजना समन्वयक स्कूलों के खाते में रखरखाव हेतु राशि जारी करेंगे। बताया गया कि शासन से राशि शीध्र ही जारी की जाएगी।
इनका कहना है
शौचालयों की व्यवस्था सुधारने लगातार संबंधित संस्थाओं से संपर्क किया जाता है और पत्राचार भी किया जाता है, लेकिन फिर भी शौचालयों का रखरखाव नहीं किया जाता है। इससे कठिनाइयां आती हैं।
सुशील मिश्रा, डीपीसी, जिला शिक्षा केन्द्र्र, उमरिया।

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