कोल साइडिंग व कंचन खदान के समीप बढ़ रहा प्रदूषण

कोल डस्ट ने किया जीना मुहाल

By: Shahdol online

Published: 12 Nov 2017, 04:48 PM IST

उमरिया. एसईसीएल की जोहिला एरिया की कोयला खदानों से प्रतिवर्ष करोड़ों रुपए का राजस्व अर्जित करने के बावजूद यहां अभी तक प्रदूषण नियंत्रण के पर्याप्त उपाय नहीं किए गए। जिसके कारण यहां वायु प्रदूषण बढ़ रहा है। सर्वाधिक प्रदूषण नौरोजाबाद मुख्यालय के मुख्य कोयला सायडिंग तथा सबसे बड़ी कंचन ओपेन कास्ट माइंस के आसपास वायु प्रदूषण पाया गया। म.प्र पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड क्षेत्रीय कार्यालय के अधिकारियों ने पूर्व में इन क्षेत्रों का मौका मुआयना कर जरूरी निर्देश दिये हैं। बताया गया कि नौरोजाबाद सायडिंग के समीप स्थित कालोनियों के लोगों ने कोल डस्ट मिश्रित वायु प्रदूषण की अधिकता की शिकायत भी की थी। जिसके परिपेक्ष्य में जांच पड़ताल भी की गई थी। कोयला उत्पादन स्थलों में वायु प्रदूषण रोकन के एहतियाती उपाय करने के शासन स्तर से भी निर्देश दिए गये थे। लेकिन कोल डम्प करने वाली सायडिंग तथा कोयले का ट्रकों से परिवहन करने वाली सड़कों पर सर्वाधिक कोयला डस्ट रहती है जो हवा के साथ उड़कर लोगों की परेशानी का कारण बनती है। इस ओर जिम्मेदार प्रशासन कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
बताया गया कि सायडिंग के समीप कालरी ने कोल डस्ट कम करने हेतु जल छिड़काव करने स्प्रिंकलर लगाए हैं लेकिन उनकी संख्या बहुत कम है। कुछ स्प्रिंकलर खराब भी थे। उनमें सुधार कार्य कराने तथा मोबाइल स्प्रिंकलर लगाने व फिक्स स्प्रिंकलरों की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। यहां कम से कम 20 की संख्या में और स्प्रिकंलर और लगाए जाने की आवश्यकता पायी गई। इसके अलावा नौरोजाबाद सायडिंग की लंबाई 8 सौ मीटर है। यहां विंण्ड ब्रेकिंग वाल बनाने के लिए कहा गया है। ताकि कोल डस्ट उड़कर बाहर नहीं फैले। यहां अभी इस संदर्भ में सुरक्षा की ओर ध्यान नहीं दिया गया है।
एक जानकारी के अनुसार कालरी के पास सायडिंग तथा कंचन कालरी के आसपास की सड़कों की सफाई करने अभी तक रोड स्वीपर मशीन उपलब्ध नहीं है। जबकि सड़कों से लगातार डस्ट की सफाई कराई जानी अनिवार्य है। सड़केां के गड्ढों और किनारों की मरम्मत भी नहीं कराई जाती है जिस कारण यहां और भी धूल जमा रहती है। एक अर्से से रोड स्वीपिंग मगाए जाने और सड़कों की साफ सफाई कराए जाने की मांग के बावजूद अभी तक मशीन नहीं आ सकी है। कालरी प्रबंधतंत्र केवल इतना ही बताता है कि मशीन की प्रक्रिया चल रही है। उसके लिए मांग की गई है।
सड़कों पर जमी कोलडस्ट की परत
कोयले का जिन सड़कों से परिवहन किया जाता है वहां डस्ट की मोटी परतें जमा हैं। जो आते जाते वाहनों के पीछे बवण्डर के रूप में उड़ती हैं। इसमें कोयले व धूल के सूक्ष्म कण उड़कर श्वांस के साथ लोगों के अंदर प्रवेश करते हैं और उनके स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाते हैं। इन कणों से फेफड़ों व श्वास की तकलीफ बढऩे की संभावना जताई जाती है। खासतौर पर उन लोगो के लिए यह बहुत ही हानिप्रद है जो निरंतर ऐसे वायुमण्डल के संपर्क में रहते हैं। इसके अलावा सड़कों पर फैले धूल के बवण्डर के कारण सड़क पर सामने के वाहन भी ठीक से दिखलाई नहंी पड़ते और सड़क दुर्घटनाओं की संभावना बनी रहती है।
दो गुना प्रदूषण
पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड क्षेत्रीय कार्यालय के वैज्ञानिक व प्रयोगशाला प्रभारी डा. एसबी तिवारी ने बताया कि नौरोजाबााद सायडिंग के समीप जांच करने पर 200 माइक्रोग्राम पर क्यूबिक मीटर वायुमण्डलीय प्रदूषण पाया गया। जो कि निर्धारित मानक से दो गुना अधिक है। स्वच्छ वातावरण का निर्धारित मानक 100 माइक्रोग्राम पर क्यूबिक मीटर माना जाता है। इस संबंध में कालरी प्रबंधतंत्र को जल छिड़काव बढ़ाने के साथ प्रदूषण नियंत्रण केअन्य निर्देश दिए गए हैं। जिनके पालन का महाप्रबंधक द्वारा आश्वासन दिया गया है।

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