किसानों की आय दोगुनी करने की रणनीति पर हो रहा कार्य : अतीन्द्र सिंह

किसानों की आय दोगुनी करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने केन्द्र के साथ मिलकर बीज पर अनुदान देने की योजना बनाई है।

By: Mahendra Pratap

Updated: 12 Nov 2017, 06:27 PM IST

उन्नाव. केंद्र सरकार द्वारा 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने केन्द्र के साथ मिलकर बीज पर अनुदान देने की योजना बनाई है। जिसके अन्तर्गत किसानों को बीज पर पचास प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। 31 सौ रूपए वाला गेंहू का प्रमाणित बीज किसानों को 1550 रूपए प्रति कुन्तल की दर से मिलेगा। जबकि जौ का प्रमाणित बीज में प्रदेश सरकार द्वारा 600 रूपए प्रति कुन्तल का अनुदान दिया जा रहा है। 3120 रूपए प्रति कुंतल मिलने वाला जौ का प्रमाणित बीज 2520 रूपए प्रति कुन्तल मिलेगा। यह जानकारी जिला कृषि अधिकारी अतीन्द्र सिंह ने दी। प्रमाणित बीज राजकीय कृषि बीज भंडारण पर उपलब्ध है। यहां यह बात उल्लेखनीय है कि अधिकतम अनुदान पचास प्रतिशत है।

प्रमाणित बीज से उपज ज्यादा प्राप्त करें

उन्होंने पत्रिका से बातचीत के दौरान बताया कि केंद्र और प्रदेश सरकार ने किसानों की आय दुगनी करने के लिए कई कदम उठाए हैं। रबी 2017-18 में उपलब्ध प्रमाणित बीजों की बिक्री में अनुदान देने का निर्णय केद्र व प्रदेश सरकार ने किया है। जिसके अन्तर्गत किसानों को अनुदान दिया जा रहा है। श्री सिंह ने बताया कि रबी की बुआई का समय नजदीक आ रहा है। किसान भाईयों को चाहिए कि वह प्रमाणित बीज को खरीदकर अपने पास रख ले। जिससे समय से बोआई कर दे। उन्होने बताया कि किसानों को अनुदानित रकम मिला कर बीज लेने पड़ेगा। उसके बाद अनुदान की धनराशि उनके खाते में स्थानान्तरण कर दी जाएगी। जिला कृषि अधिकारी ने किसानों को सलाह दी है कि वह प्रमाणित बीज की ही बुआई करें। जिससे उनका उत्पादन ज्यादा होगा। अपने घर के गेंहू को खुले बाजार बेच कर उससे सस्ते दामों में बीज देने की सरकार की योजना का लाभ उठाने की अपील की है।

अधिकतम छूट पचास प्रतिशत

अतीन्द्र सिंह ने बताया कि चना में केन्द्र सरकार 2500 और प्रदेश सरकार 1500 रूपए का अनुदान प्रति कुंतल दे रही है। जो चार हजार रूपए प्रति कुंतल है। इसी प्रकार मटर में भी सरकार चार हजार, मसूर में चार हजार, और राई में 3300 रूपए अनुदान दे रही है। उन्होंने बताया कि अनुदान, मुल्य का अधिकतम पचास प्रतिशत देय है। गेंहू व जौ की 10 वर्ष के अंदर दलहन व तिलहन के बीजों पर 15 वर्ष तक अधिसूचित प्रजातियों पर अनुदान देय है।

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