संयुक्त अरब अमीरात में छाया बनारसी लंगड़ा और बनारसी दशहरी का जलवा, पहली बार हो रहा एक्सपोर्ट

बनारसी लंगड़ा और बनारसी दशहरी आम दुनियाभर में अपनी अलग पहचान बना रहा है...

वाराणसी. वैसे तो बनारस की बात होते ही यहां की बनारसी साड़ी, मशहूर घाट और मंदिर के नजारे पूरी दुनिया के सामने आ जाते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि अब बनारसी लंगड़ा और बनारसी दशहरी आम भी दुनियाभर में अपनी अलग पहचान बना रहा है। आम की यह दोनों वैरायटी संयुक्त अरब अमीरात की पहली पसंद बन गई हैं। इसीलिये को यहां से तीन टन आम दुबई के लिए निर्यात किया गया है। वैश्विक महामारी कोरोना के चलते लॉकडाउन के बीच इतनी बड़ी मात्रा में आम का निर्यात होना कहीं न कहीं आम कारोबारियों को काफी सुकून देने वाली बात है। वाराणसी के इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि इतनी बड़ी मात्रा में यहां से आम दुबई को निर्यात किया गया है। आम को निर्यात कराने में एग्रीकल्चरल एंड प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवेलपमेंट अथॉरिटी (एपीडा) की सबसे अहम भूमिका रही है।


कमिश्नर ने खेप को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना

वाराणसी में राजा तालाब के भिखारीपुर बाग से तीन टन आम की खेप को कमिश्नर दीपक अग्रवाल ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। मैंगो एक्सपोर्ट एसोसिएशन उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष नदीम सिद्दीकी के मुताबिक बनारसी लंगड़ा और बनारसी दशहरी आम पहली बार विदेशी भेजा गया है। वहीं किसान चौधरी शार्दूल विक्रम ने बताया कि विदेश आम जाने से किसानों को काफी सहारा मिलेगा। कमिश्नर दीपक अग्रवाल ने बताया कि आम की खेप सड़क से पहले लखनऊ गई और फिर वहां पैकेजिंग कराने के बाद हवाई मार्ग से संयुक्त अरब अमीरात रवाना की जाएगी।

किसान शार्दूल के बाग से गया आम

किसान शार्दूल विक्रम सिंह ने बताया कि 3 टन आम उन्हीं के बाग से गया है। 30 एकड़ में उनका बागान फैला है। किसान नदीम सिद्दीकी ने बताया कि यूरोप, खाड़ी देश, अरब, ब्रिटेन, अमेरिका, कतर, कुवैत में भारतीय आम का जलवा है। विदश आम निर्यात होने से किसानों को उचित मूल्य के साथ डब्बा बनाने वाले, ट्रांसपोर्ट, पैकेजिंग करने वाले, लेबर समेत कई दर्जन लोगों को रोजगार मिला है। माल शहनवाज एक्सपोर्ट दुबई भेजेगा। उनकी योजना है कि यूपी से 100 टन के ऊपर आम को विदेशों में भेजा जाए। जैसे जैसे इजाजत मिलती जाएगी, आम भेजा जाएगा।

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नितिन श्रीवास्तव Desk/Reporting
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