6 Sep Bharat Band Andolan : Sc/St act के खिलाफ सड़क पर उतरेंगे कई संगठन, 6 सितम्बर को होगा प्रदर्शन

6 Sep Bharat Band Andolan :  Sc/St act के खिलाफ सड़क पर उतरेंगे कई संगठन, 6 सितम्बर को होगा प्रदर्शन

Sarveshwari Mishra | Publish: Sep, 05 2018 11:10:45 AM (IST) | Updated: Sep, 05 2018 03:01:30 PM (IST) Varanasi, Uttar Pradesh, India

6 Sep Bharat Band Andolan : सवर्णों ने 6 सितंबर को एससी/एसटी एक्ट का विरोध में भारत बंद का भी ऐलान कर दिया है। जानिए क्यों हो रहा एससी/एसटी एक्ट का विरोध

वाराणसी. केंद्र सरकार के नए एससी एसटी एक्ट के खिलाफ SC/ST की नाराजगी बढ़ने लगी है। विभिन्न संगठन के लोग लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। एससी-एसटी कानून में संशोधन के विरोध में बनारस में भी विभिन्न संगठनों का विरोध प्रदर्शन जारी है। इसके अलावा सवर्णों ने 6 सितंबर को bharat band का भी ऐलान कर दिया है।

 

बतादें कि केंद्र सरकार ने एससी/एसटी एक्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट की ओर से सुनाए गए फैसले को पलट दिया था। जिसके बाद धीरे-धीरे सवर्णों में नाराजगी बढ़ने लगी। कई संगठनों ने सरकार पर दलितों के तुष्टिकरण का भी आरोप लगाया। बताया जा रहा है कि सवर्णों की नाराजगी अब बाकी राज्यों की ओर भी रुख करने लगी है। केंद्र सरकार ने Supreme Court का फैसला पलटते हुए एससी/एसटी एक्ट को वापस मूल स्वरूप में बहाल कर दिया। हाल ही में ये संशोधित एससी/एसटी (SC-ST Act) फिर से लागू किया है। अब फिर से इस एक्ट के तहत बिना जांच गिरफ्तारी संभव हो गई।

यह है विरोध की वजह
सरकार के संशोधित एससी/एसटी एक्ट का विरोध की बड़ी वजह गिरफ्तारी वाली पहलू माना जा रहा है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट भी कह चुका है कि इस गिरफ्तारी वाले प्रावधान की वजह से कई बार इस एक्ट के दुरुपयोग के मामले सामने आए हैं। इसीलिए ऐसा न हो सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रावधान में संशोधन कर गिरफ्तारी से पहले जांच की बात कही थी।

 

 

 

6 सितंबर को भारत बंद का ऐलान
सवर्णों ने इस फैसले के विरोध में 6 सितंबर को भारत बंद का ऐलान किया है। बताया जा रहा है कि एससी/एसटी के 35 संगठन इस बंद का आह्वान कर रहे हैं। गौरतलब है कि इससे पहले जब सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था तो दलितों ने 2 अप्रैल को भारत बंद किया था। जिसके बाद कई जगह हिंसा हुई और सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का फैसला पलट दिया।

क्यों हो रहा एससी/एसटी एक्ट का विरोध
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कहा था कि सरकारी कर्मचारी की गिरफ्तारी सिर्फ सक्षम अथॉरिटी की इजाजत के बाद ही हो सकती है। इसके अलावा जो लोग सरकारी कर्मचारी नहीं है। इसके अलावा जो लोग सरकारी कर्मचारी नहीं है। उनकी गिरफ्तारी जांच के बाद एसएसपी की इजाजत से हो सकेगी। बेगुनाह लोगों को बचाने के लिए कोई भी शिकायत मिलने पर तुरंत मुकदमा दर्ज नहीं किया जाएगा। कोर्ट ने इस नए आदेश और नए गाइड लाइन्स के बाद इस समुदाय के लोगों का कहना है कि ऐसा होने के बाद उनपर अत्याचार बढ़ जाएगा।

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