भाकपा माले लिबरेशन ने जारी किया चुनावी घोषणा पत्र, भ्रष्ट कार्पोरेट घरानों पर लगाम लगाने का दावा

25 बिंदुओं पर व्यापक सुधार पर जोर। मौजूदा केंद्र सरकार पर हमला।

By: Ajay Chaturvedi

Published: 29 Mar 2019, 03:30 PM IST

वाराणसी. भाकपा माले लिबरेश ने आगामी लोकसभा चुनाव 2019 के लिए चुनाव घोषणा पत्र जारी किया है। इस घोषणा पत्र में 25 बिंदुओं पर व्यापक पैमाने पर सुधार की बात कही गई है। इस दौरान माले ने अपने घोषणा पत्र में भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र की मौजूदा एनडीए सरकार पर देश को हर मुकाम पर तबाह करने का आरोप भी लगाया है। कहा है कि पिछले 45 सालों में बेरोजगारी की स्थिति सबसे बदहाल रही। 14 सालों में सबसे धीमी कृषि आय वृद्धि, खेत मजदूरों की मजदूरी का न बढ़ना, किसानों की आत्महत्या का ग्राफ बढ़ना, किसानों, मजदूरों, बेरोजगारों, छात्रों, दलितों, आदिवासियों, धार्मिक अल्पसंख्यकों, महिलाओं और विरोध करने वाले नागरिकों को ज्यादा तखे राज्य दमन का सामना करना पड़ा। उन पर दानवीय कानूनों के तहत मुकदमे दर्ज किए गए।

आईसा नेता मनीष शर्मा ने पत्रिको भेजे भाकपा माले के घोषणा पत्र के बारे में विस्तार बताते हुए कहा कि पार्टी ने आम मतदाताओं से दावा किया है कि सत्ता में आने पर हर मुकाम पर उनके जीवन स्तर में सुधार लाएंगे। कहा कि भारत की कम्यूनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) (लिबरेशन) की केंद्रीय कमेटी द्वारा जारी घोषणा पत्र भगत सिंह और अम्बेडकर के सपनों को पूरा करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। घोषणा पत्र की सेंट्रल थीम, "भारत के लोकतंत्र को मजबूत बनाओ है।"

चुनावी घोषणा पत्र के प्रमुख बिंदु
1- भ्रष्ट कार्पोरेट राज का खात्मा
2-आर्थिक नीतियों में जन-पक्षधर बदलाव
3-भ्रष्टाचार रोकने और भ्रष्टाचारियों को सजा देने की नीति
4-लोगों के मौलिक अधिकारों और हकों को मजबूती
5-सबके लिए आवास की गारंटी
6-हर हाथ को काम मिलेगा
7-सभी कामगारों के सम्मान व अधिकारों की गारंटी
8-सार्वभौम स्वास्थ्य अधिकार की गारंटी
9-शिक्षा व्यवस्था में सुधार
10-किसानों की सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की गारंटी
11-महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों, आजादी और बराबरी की सुनिश्चितता
12-दलित अधिकारों की बुलंदी
13-आदिवासी अधिकारों की गारंटी
14-कमजोर समुदायों और अल्पसंख्यकों के लिे सामाजिक न्याय
15-एलजीबीटीक्यू अधिकारों की गारंटी
16-विकलांगों के सम्मान व अधिकार की सुनिश्चितता
17-घृणा अपराधों और सांप्रदायिक हिंसा की रोकथाम के लिए व्यापक नीतियों का निर्धारण
18-बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा
19-नागरिक स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों की सुरक्षा में सुधार
20- प्रेस की आजादी की बहाली
21- संवैधानिक नैतिकता और तर्क को प्रोत्साहन
22-पर्यावरणीय अधिकार व सुरक्षा
23- चुनाव सुधार
24-संघीयता को मजबूती, संघीय पुनर्निर्माण और राज्यों का पुनर्गठन
25- स्वतंत्र और मैत्रीपूर्ण संबंधों के लिए भारत की विदेश नीति को नई दिशा

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Ajay Chaturvedi
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