
Deputy CM Dinesh sharma
वारणसी. कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने जब से अपना गोत्र बताया है तब से राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। शनिवार को महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में पर्यावरण कुंभ की प्रदर्शनी का उद्घाटन करने के बाद डिप्टी सीएम डा.दिनेश शर्मा ने राहुल गांधी पर हमला बोला है। डिप्टी सीएम ने कहा कि चुनाव आते ही राहुल गांधी को अपना गोत्र, जनेऊ व मानसरोवर याद आ जाता है और चुनाव खत्म होते ही 25 दिसम्बर को स्विट्जरलैंड एक जनवरी को इटली में हैप्पी न्यू ईयर याद आने लगेगा।
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डिप्टी सीएम डा.दिनेश शर्मा ने कहा कि जब मैं इलाहाबाद में था तो लोगों ने माननीय फिरोज गांधी का स्मरण किया। राहुल गांधी के दादा थे गोत्र बताने की जरूरत नहीं है। व्यक्ति का स्वभाव ही उसकी जाति व धर्म है। किसके कौन दादा थे, पिता थे, दादी थी मै समझता हूं यह मिथ्या है। चुनाव के समय राहुल गांधी को जनेऊ, गोत्र व उल्टे हाथ से आरती की भी याद आती। बम-बम भोले भी याद आयेंगे। मानसरोवर का जल भी याद आयेगा। चुनाव खत्म होते ही 25 दिसम्बर स्वीजरलैंड व एक तारीक को इटली में हैप्पी न्यू ईयर मनाने का क्रम फिर शुरू हो जायेगा। राम मंदिर के प्रश्र पर कहा कि राम जी का नाम आस्था से जुड़ा है बीजेपी का अपना स्टैंडइ इस मुद्दे पर क्लियर है। कहा कि प्रभु राम जो चाहते हैं वह करा लेंगे।
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चुनाव आते ही विपक्ष हो जाता है परेशान
केन्द्र सरकार पर किसानों की अनदेखी के विपक्ष के आरोप का डिप्टी सीएम डा.दिनेश शर्मा ने जवाब दिया। कहा चुनाव आता है तो सबसे अधिक परेशान विपक्ष हो जाता है। पहली बार केन्द्र व प्रदेश की सरकार ने 75 प्रतिशत से अधिक धन का आवंटन किसानों के लिए किया है आमदनी को दोगुना करने के लिए काम किया । किसानों के घर-घर बिजली पहुंच गयी है शौचालय बन गये हैं। पीएम सड़क योजना व आवास योजना के माध्यम से वहां पर सड़क व आवास भी बने गये हैं इन सबसे अलग होकर देखे तो समर्थन मूल्य को लगात का डेढ़ गुना किया गया। आपदा में तत्कालिक भुगतान किया जाता है इससे सपा, बसपा, कांग्रेस परेशान है और आम किसान खुशहाल है
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मानव के कत्र्तव्य का जागरण ही पर्यावरण कुंभ है
देश की संस्कृति की पहचान कुंभ है कुंभ का अर्थ कलश होता है कहते है कि जब समुद्द का मंथन हुआ तो देव व असुर दोनों शामिल हुए। तब अमृत कलश निकला। अमृत कलश की कुछ बूंद उ"ौन, हरिद्वार, प्रयाग व नासिक में गिरी तो कुंभ का पर्व मनाया जाता है कुंभ केवल लोगों का समागम ही नहीं है बल्कि इसका अर्थ यह है कि जो व्यक्ति की जीवनशैली है उसकी प्रकृति के साथ तारतम्यता बढ़े। आज तमाम बीमारी का कारण पर्यावरण असंतुलन है। जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण प्रदूषण होना बहुत खतरनाक है। लोगों का जल, वायु, अग्रि, प्रकृति के प्रति जीवों के प्रति चैतन्यता हो और व्यक्ति का उससे जुड़ाव हो। अर्थात पर्यावरण संतुलन हो। कुंभ से पहले पर्यावरण कुंभ लगाया गया है प्रदर्शनी में प्रकृति संरक्षण पर जोर दिया जा रहा है। प्रकृति के साथ खिलवाड़ किया तो मानव जीवन को होने वाले क्षति से कोई बचा नहीं पायेगा। प्रकृति को नुकसान पहुंचाने वाला मानव है और नुकसान से बचाने वाला भी मानव है मानव के कत्र्तव्यों का जागरण पर्यावरण कुंभ है।
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Updated on:
1 Dec 2018, 2:55 PM IST
Published on:
1 Dec 2018, 2:55 PM IST
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