इस शुभ मुहुर्त में जलाए होलिका, मिलेगा यह विशेष लाभ

इस शुभ मुहुर्त में जलाए होलिका, मिलेगा यह विशेष लाभ

Sarveshwari Mishra | Publish: Feb, 15 2018 08:40:49 AM (IST) Varanasi, Uttar Pradesh, India

इसलिए मनाया जाता है होली से पहले होलिका दहन

वाराणसी. होली हिंदुओं का सबसे पवित्र त्योहार माना जाता है। यह ऐसा पर्व है जिसे पूरे भारत में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। माना जाता है कि इस दिन भी असत्य पर सत्य की विजय हुई थी। होली से पहले होलिका दहन मनाया जाता है। माना जाय तो होली होलिका दहन का उत्सव है जिसमें हम सारी बुराईयों को जला देते हैं। यह त्यौहार भगवान के प्रति हमारी आस्था को मजबूत बनाने व हमें आध्यात्मिकता की और उन्मुख होने की प्रेरणा देता है। क्योंकि इसी दिन भगवान ने अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा की और उसे मारने के लिये छल का सहारा लेने वाली होलिका खुद जल बैठी। होलिका जलाने का भी एक शुभ मुहुर्त होता है। शुभ मुहुर्त में जलाई गई होलिका शुभ मानी जाती है।

 

 


ये है होलिका दहन का शुभ मुहुर्त
होलिका दहन का शुभ मुहूर्त = 18:26 से 20:55
मुहूर्त की अवधि = 2 घंटे 29 मिनट
भद्रा पूंछ = 15:54 से 16:58
भद्रा मुख = 16:58 से 18:45

 

 

 

होलिका दहन कथा
होलिकादहन की कथा हम सभी होली की पूर्व संध्या, यानी फाल्गुन शुक्ल चतुर्दशी को होलिकादहन मनाते हैं। इसके साथ एक कथा जुड़ी हुई है। कहते हैं कि वर्षो पूर्व पृथ्वी पर एक अत्याचारी राजा हिरण्यकश्यपु राज करता था। उसने अपनी प्रजा को यह आदेश दिया कि कोई भी व्यक्ति ईश्वर की वंदना न करे, बल्कि उसे ही अपना आराध्य माने। लेकिन उसका पुत्र प्रह्लाद ईश्वर का परम भक्त था। उसने अपने पिता की आज्ञा की अवहेलना कर अपनी ईश-भक्ति जारी रखी। इसलिए हिरण्यकश्यपु ने अपने पुत्र को दंड देने की ठान ली। उसने अपनी बहन होलिका की गोद में प्रह्लाद को बिठा दिया और उन दोनों को अग्नि के हवाले कर दिया। दरअसल, होलिका को ईश्वर से यह वरदान मिला था कि उसे अग्नि कभी नहीं जला पाएगी। लेकिन दुराचारी का साथ देने के कारण होलिका भस्म हो गई और सदाचारी प्रह्लाद बच निकले। उसी समय से हम समाज की बुराइयों को जलाने के लिए होलिकादहन मनाते आ रहे हैं। सार्वजनिक होलिकादहन हम लोग घर के बाहर सार्वजनिक रूप से होलिकादहन मनाते हैं।

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