सौ साल के इतिहास में पहली बार BHU में होगी राजनीतिक सभा, PM मोदी करेंगे संबोधित

सौ साल के इतिहास में पहली बार BHU में होगी राजनीतिक सभा, PM मोदी करेंगे संबोधित

Ajay Chaturvedi | Publish: Sep, 16 2018 04:05:21 PM (IST) | Updated: Sep, 16 2018 04:05:22 PM (IST) Varanasi, Uttar Pradesh, India

विपक्ष का विरोध, आम आदमी पार्टी, कांग्रेस ने जताई आपत्ति।

वाराणसी. यूं तो शैक्षणिक संस्थाओं के राजनीतिक उपयोग और उसके भगवाकरण का आरोप बीजेपी सरकार पर पिछले चार साल से लग रहा है लेकिन यह विरोध अब कहीं ज्यादा मुखर हो गया है वाराणसी में। ऐसा प्रधानमंत्री और बनारस के सांसद नरेंद्र मोदी के बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के एम्फीथिएटर मैदान पर प्रस्तावित जनसभा के चलते है। वैसे भी बीएचयू के स्थापना काल से अब तक के सौ साल के इतिहास में यह पहला अवसर है जब किसी राजनीतिक पार्टी के नेता की जनसभा विश्वविद्यालय परिसर में हो रही है। इसे लेकर विपक्षी दलों ने आपत्तियां दर्ज करानी शुरू कर दी हैं।

बीएचयू के स्थापना के वक्त महात्मा गांधी भी आए थे। बतौर प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी, डॉ मनमोहन सिंह और खुद नरेंद्र मोदी भी विश्वविद्यालय में आ चुके हैं। कोई दीक्षांत समारोह में आया तो कोई छात्रसंघ के उद्धाटन के सिलसिले में। या फिर किसी न किसी शैक्षणिक आयोजन में शिरकत करने पहुंचा था। लेकिन पहली बार ऐसा है जब प्रधानमंत्री मोदी की जनसभा होने जा रही है। इसके लिए पार्टी की ओर से जोरशोर से तैयारी चल रही है। पार्टी नेताओं को 40 से 50 हजार लोगों को सभा स्थल तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। बता दें कि पीएम मोदी मोदी अपने जन्मदिन के मौके पर सोमवार को दो दिवसीय दौरे पर बनारस पहुंच रहे हैं। वह 18 सितंबर को बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के एम्फी थियेटर में जनसभा को संबोधित करेंगे। संबोधन के बाद बीएचयू में बनने वाले वेद विज्ञान केंद्र व रिजनल इंस्टीट्यूट आफ ऑप्थेल्मोलॉजी का शिलान्यास करेंगे। इस दौरान वह विभिन्न परियोजनाओं का लोकार्पण भी करेंगे जिसमें अटल इंक्यूबेशन सेंटर, नागपुर ग्राम पेयजल योजना के अलावा पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड की विभिन्न परियोजनाएं शामिल हैं। जनसभा के बाद पीएम मोदी दिल्ली के लिए रवाना हो जाएंगे।

विपक्षी दलों के नेताओं का कहना है कि विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राएं अपने लिए संघर्ष करें तो उसे राजनीतिक करार दिया जाता है। उन पर लाठियां बरसाई जाती हैं। उनके विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया जाता है। वो अवांछनीय तत्व हो जाते हैं जबकि वो मेस में खाने की मांग करते हैं, वो पुस्तकालय खोलने की मांग करते हैं, वो छात्राएं अपनी आबरू की बात करती हैं। छात्रावासों में बंदिशों का विरोध करती हैं लेकिन उन्हें अनुशासनहीनता के नाम पर दंडित कर दिया जाता है। विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रसंघ के गठन की इजाजत नहीं देता। लेकिन प्रधानमंत्री की जनसभा के लिए मैदान मुहैया करा दिया जाता है। ये कैसी दोतरफा व्यवस्था है। नेताओं का कहना है कि पहले विश्वविद्यालय की हवाई पट्टी का इस्तेमाल किया जाता रहा। गेस्ट हाउस को आरएसएस व बीजेपी नेताओं को समर्पित कर दिया गया। अब प्रधानमंत्र की जनसभा होगी। इस मुद्दे पर जिला और विश्वविद्यालय प्रशासन की चुप्पी यह बताती है कि शिक्षण संस्थाओं का पूरी तरह से राजनीतिकरण हो चुका है और यह सब हो रहा है केंद्र सरकार के इशारे पर। हफ्ते भर से पूरे विश्वविद्यालय परिसर को बेजपी के झंडे से ढंक दिया गया है। मालवीय प्रतिमा से लेकर एम्फी थिएटर मैदान तक चारों ओर भगवा ही भगवा नजर आ रहा है।

उन्होंने कहा कि पहले महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में भजपा अध्यक्ष अमित शाह सभा करते हैं फिर प्रधानमंत्री जनसभा करने जा रहे हैं। नेताओं का सवाल है कि यह कहां तक उचित है। किस नियम के तहत विश्वविद्यालय परिसर को पीएम की जनसभा के लिए दिया गया। ऐसे तो अब बीएचयू में किसी भी सत्ताधारी दल के सहयोगी को भी यह मौका मिलेगा। किसी पार्टी का अध्यक्ष सभा करेगा, मुख्यमंत्री भी सभा करेंगे। इस राजनीति से शैक्षणिक वातावरण पूरी तरह से प्रभावित होगा जिसका जिम्मेदार कौन होगा? इसका जवाब किसी के पास नहीं।

प्रधानमंत्री की इस जनसभा पर आपत्ति जताते हुए आम आदमी पार्टी के पूर्वांचल संयोजक संजीव सिंह ने कहा कि जिस विश्वविद्यालय में छात्रों के उत्पीड़न के मुद्दे पर जब पार्टी की महिला कार्यकर्ता पहुंचती हैं तो विश्वविद्यालय प्रशासन उनके कपड़े फड़वाता है, उन पर लाठियां चलवाता है। उस वक्त तत्कालीन कुलपति प्रो जीसी त्रिपाठी का यही कहना था कि विश्वविद्यालय को राजनीति का अखाड़ा नहीं बनने देंगे। उस वक्त जिले के आला अफसरों ने भी यही तर्क दिया था। फिर ये क्या हो गया। पीएम की जनसभा के लिए विश्वविद्यालय किसी आधार पर दिया गया पार्टी को। यह कोई शैक्षणिक आयोजन नहीं बल्कि पूरी तरह से राजनीतिक है, ये जनसभा है जिसके लिए भाजपा हफ्ते भर से तैयारी में जुटी है। उन्होंने कहा कि यह साबित करता है कि किस तरह से केंद्र सरकार और खुद प्रधानमंत्री शैक्षणिक संस्थाओं का राजनीतिकरण कर रहे हैं। पार्टी की इसे कतई नहीं बर्दाश्त करेगी। इसका माकूल जवाब दिया जाएगा।

उधर जिला कांग्रेस अध्यक्ष प्रजानाथ शर्मा ने एक उद्धरण सुनाते हुए कहा कि जब वह एनएसयूआई के जिला अध्यक्ष रहे और पंडित कमलापति त्रिपाठी रेल मंत्री थे तब एक कार्यक्रम के लिए बीएचयू के आर्ट कॉलेज ऑडिटोरियम की मांग की थी, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने इंकार कर दिया था। उसके बाद जब हम लोग पंडित जी से शिकायत करने पहुंचे तो वह काफी नाराज हुए और कहा कि किससे पूछ कर विश्वविद्यालय में पार्टी कार्यक्रम आयोजित करने की सोची तुम लोगों ने। यह सरासर गलत है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इंकार कर सही किया है। शर्मा ने बताया कि उस आयोजन में खुद पंडित जी को आना था साथ ही केंद्रीय मंत्री आरिफ मोहम्मद को पहुंचना था। उन्होंने कहा कि एक वो आदर्श था और एक ये आदर्श है। अब प्रधानमंत्री खुद जनसभा को संबोधित करने बीएचयू पहुंच रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि कुछ दिन पहले ही पार्टी का प्रतिनिधिमंडल कुलपति प्रो राकेश भटनागर से मिला था, उस वक्त भी विश्वविद्यालय परिसर के राजनीतिक उपयोग पर आपत्ति जताई थी, तब कुलपति ने कहा था कि ऐसा नहीं होगा। लेकिन अब विश्वविद्यालय प्रशासन ने चुप्पी साध ली है। इसका विरोध होगा।

 

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