इलेक्ट्रिसिटी बिल के विरोध में बिजली इंजीनियरों और कर्मचारियों का केंद्र सरकार पर हमला

एनसीसीओईईई के आह्वान पर हुई विशाल रैली, वाराणसी सहित देश भर के हजारों बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों ने लिया हिस्सा।

By: Ajay Chaturvedi

Published: 03 Apr 2018, 06:10 PM IST

वाराणसी. इलेक्ट्रिसिटी बिल के विरोध में मंगलवार को वाराणसी सहित देश भर के बिजली इंजीनियरों और कर्मचारियों ने विशाल रैली कर केंद्र की भाजपा सरकार पर बोला हमला। रैली में पारित प्रस्ताव में निर्णय लिया गया है कि इलेक्ट्रिसिटी(अमेंडमेंट) बिल 2014 और निजीकरण के विरोध में संसद के मानसून सत्र के दौरान एक दिन की राष्ट्रव्यापी हड़ताल की जाएगी जिसमें लगभग 25 लाख बिजली कर्मचारी व इंजीनियर शामिल होंगे। हड़ताल की तारीख जून के प्रारंभ में राजधानी दिल्ली में आयोजित नेशनल कांफ्रेंस में तय करके घोषित कर दी जाएगी। उप्र में निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मचारियों के चल रहे आंदोलन का पूर्ण समर्थन करते हुए प्रस्ताव में चेतावनी दी गई है कि यदि उप्र सरकार ने किसी भी कर्मचारी का दमन या गिरफ्तारी की तो देश भर के बिजली कर्मचारी व अभियन्ता मूक दर्शक नही रहेंगे और उसी समय सीधी कार्रवाई को विवश होंगे।

ऑल इंडिया पॉवर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने पत्रिका को बताया कि इलेक्ट्रिसिटी (अमेण्डमेंट ) बिल के जनविरोधी प्रतिगामी प्राविधानों का एनसीसीओईईई और ऑल इण्डिया पॉवर इन्जीनियर्स फेडरेशन प्रारम्भ से ही विरोध करता रहा है। इस संबंध में केंद्र सरकार को लिखित तौर पर कई बार दिया जा चुका है। एनसीसीओईईई और पूर्व विद्युत मंत्री पीयूष गोयल के मध्य कई बार हुई वार्ता में पूर्व विद्युत मंत्री, बिल के कई प्रावधानों में बदलाव करने या उन्हें हटाने पर सहमत हो गए थे लेकिन इस सम्बन्ध में संशोधित ड्राफ्ट कभी भी जारी नहीं किया गया। संसद के बजट सत्र के द्वितीय चरण में इस बिल को पारित कराने की कोशिश हो रही है जिससे बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों में भारी गुस्सा है। एनसीसीओईईई ने इसे देखते हुए प्रधानमंत्री को दो मार्च को पत्र भेजकर आंदोलन के कार्यक्रमों की सूचना दे दी थी। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिसिटी (अमेण्डमेंट ) बिल एवं निजीकरण के विरोध में आज दिल्ली में रैली कर केंद्र और राज्य सरकारों का ध्यानाकर्षण किया गया है किंतु यदि सरकार ने बिल वापस न लिया तो देशव्यापी हड़ताल होगी।

उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिसिटी (अमेण्डमेंट ) बिल में बिजली वितरण और विद्युत् आपूर्ति के लाइसेंस अलग अलग करने तथा एक ही क्षेत्र में कई विद्युत् आपूर्ति कम्पनियां बनाने का प्रावधान है। बिल के अनुसार सरकारी कंपनी को सबको बिजली देने (यूनिवर्सल पावर सप्लाई ऑब्लिगेशन ) की अनिवार्यता होगी जबकि निजी कंपनियों पर ऐसा कोई बंधन नहीं होगा। स्वाभाविक है कि निजी आपूर्ति कंपनियां मुनाफे वाले बड़े वाणिज्यिक और औद्योगिक घरानों को बिजली आपूर्ति करेंगी जबकि सरकारी क्षेत्र की बिजली आपूर्ति कंपनी निजी नलकूप, गरीबी रेखा से नीचे के उपभोक्ताओं और लागत से कम मूल्य पर बिजली टैरिफ के घरेलू उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति करने को विवश होगी और घाटा उठाएगी।

एनसीसीओईईई की मुख्य मांग


- इलेक्ट्रिसिटी (अमेण्डमेंट ) बिल को वापस लेना,
- इलेक्ट्रिसिटी ऐक्ट 2003 की पुनर्समीक्षा और राज्यों में विघटित कर बनाई गयी बिजली कंपनियों का एकीकरण कर बिजली उत्पादन
-पारेषण और वितरण का केरल और हिमाचल प्रदेश की तरह एक निगम बनाना
- बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों की अन्य मांगे
- विद्युत् परिषद् के विघटन के बाद भर्ती हुए कर्मियों के लिए पुरानी पेंशन प्रणाली ,
- समान कार्य के लिए समान वेतन
- ठेकेदारी प्रथा समाप्त कर नियमित प्रकृति के कार्यों को संविदा कर्मियों को वरीयता देते हुए नियमित भर्ती
- बिजली का निजीकरण पूरी तरह बंद करना
- प्राकृतिक संसाधनों को निजी घरानों को सौंपना बंद करना

ऑल इंडिया पॉवर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि नेशनल कोआर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इम्पलॉईस एंड इन्जीनियर्स की समन्वय समिति के ऑल इण्डिया पॉवर इन्जीनियर्स फेडरेशन , ऑल इण्डिया फेडरेशन ऑफ़ पॉवर डिप्लोमा इंजीनियर्स , इलेक्ट्रिसिटी इम्पलॉईस फेडरेशन ऑफ़ इण्डिया (सीटू), ऑल इन्डिया फेडरेशन ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इम्पलॉईस (एटक ),इण्डियन नेशनल पावर वर्कर्स फेडरेशन (इन्टक ), ऑल इन्डिया पावरमेन्स फेडरेशन के कर्मचारी नेताओं ने रैली को संबोधित किया। रैली को संबोधित करने वालों में के ओ हबीब,रत्नाकर राव,जी के वैष्णव,प्रशांत चौधरी,मोहन शर्मा,समर सिन्हा,पद्मजीत सिंह, के अशोक राव आदि प्रमुख थे।

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