30 वर्ष पुराने मुकदमे को दूसरी बार झटका, हाईकोर्ट ने एएसआई सर्वे पर लगाई रोक

Second setback to 30 year old case High Court bans ASI survey- काशी विश्वेश्वर नाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद (Gyanwapi Maszid) की जमीन को लेकर चल रहे विवाद के बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad Highcourt) ने बड़ा निर्णय लिया है। कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को ज्ञानवापी के सर्वेक्षण पर रोक लगाने का आदेश दिया है।

By: Karishma Lalwani

Published: 10 Sep 2021, 03:58 PM IST

वाराणसी. काशी विश्वेश्वर नाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद (Gyanwapi Maszid) की जमीन को लेकर चल रहे विवाद के बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad Highcourt) ने बड़ा निर्णय लिया है। कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को ज्ञानवापी के सर्वेक्षण पर रोक लगाने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया ने यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड व अंजुमन इंतजामिया मस्जिद वाराणसी की तरफ से दाखिल याचिकाओं पर दिया गया है। 1992 से जिला अदालत में विचाराधीन मंदिर मस्जिद विवाद की सुनवाई प्रक्रिया पर कोर्ट ने रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा है कि दीवानी मुकदमे की पोषणीयता को लेकर सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की याचिका पर हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित कर रखा है। इसकी जानकारी अधीनस्थ अदालत को है तो न्यायिक अनुशासन का पालन करते हुए मंदिरों का सर्वे कराने की अर्जी नहीं तय करनी चाहिए। कोर्ट ने याचिका पर भारत सरकार व अन्य विपक्षियों से तीन हफ्ते में जवाब मांगा है। इससे पहले 1998 में हाईकोर्ट ने निजली अदालत के आदेश पर रोक लगाई थी। अब इस मामले की अगली सुनवाई आठ अक्टूबर को होगी।

विवादित स्थल पर मस्जिद नहीं

15 अक्टूबर, 1991 को स्वयंभू विश्वेश्वर नाथ मंदिर की तरफ से वाराणसी के सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के समक्ष मुकदमा दाखिल किया था। डॉ. रामरंग शर्मा, हरिहर पांडेय और सोमनाथ व्यास ने एफटीसी कोर्ट में याचिका दायर कर नया नए निर्माण और पूजा के अधिकार की मांग की थी। इसमें प्लॉट संख्या 9130 मौजा शहर खास के दो हिस्सों का हवाला दिया गया है। इसी के साथ पुराने ज्ञानवापी मंदिर, तहखाना, चार मंडप, ज्ञान कूप, मूर्तियां व पेड़ पर हिंदुओं के आधिपत्य एवं उत्तरी गेट पर नौबतखाना व मस्जिद के दावे पर सवाल उठाए गए हैं। यह भी दावा किया गया है कि इस्लामिक कानून के अनुसार विवादित स्थल पर मस्जिद नहीं हो सकती। सतयुग से आज तक स्वयंभू ज्योतिलिंग हटाया नहीं जा सकता। वर्ष 1947 की स्थिति में परिवर्तन नहीं किया जाएगा। इस बारे में सिविल जज ने मुकदमा खारिज कर दिया। फैसले से असंतुष्ट प्रतिवादी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी।

वादी का पक्ष

प्राचीन मूर्ति स्वयंभू लार्ड विश्वेश्वर के वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी ने सिविल जज सीनियर डिविजन (फास्ट ट्रैक कोर्ट) की अदालत में अपील की थी कि काशी विश्वनाथ मंदिर व विवादित ढांचास्थल का पुरातात्विक सर्वेक्षण कराने का निर्देश दिया जाये। दावा किया कि ढांचा के नीचे काशी विश्वनाथ मंदिर के जुड़े पुरातत्व अवशेष हैं। यह भी कहा गया कि मौजा शहर खास स्थित ज्ञानवापी परिसर के 9130, 9131, 9132 रकबा नं. एक बीघा 9 बिस्वा लगभग जमीन है। उक्त जमीन पर मंदिर का अवशेष है। 14वीं शताब्दी के मंदिर में प्रथमतल में ढांचा और भूतल में तहखाना है। इसमें 100 फुट गहरा शिवलिंग है। यह भी कहा कि 100 वर्ष तक 1669 से 1780 तक मंदिर का अस्तित्व ही नहीं रहा।

Karishma Lalwani
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