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एमपी के सीएम मोहन यादव यूपी में अखिलेश और बिहार में तेजस्वी के बनेंगे ग्रहण?

locationवाराणसीPublished: Dec 12, 2023 10:19:17 am

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SAIYED FAIZ

मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ने सीएम पद के लिए मोहन यादव का नाम घोषित कर सभी को चौका दिया। वहीं राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो आगामी लोकसभा चुनाव को देखते हुए इस घोषणा के काफी मायने हैं। देशक सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश और बिहार में होने वाली राजनीति में यादव वोटर्स की अच्छी पकड़ है। ऐसे में एमपी से उन्हें साधने की शुरुआत है।

MP CM Mohan Yadav
एमपी के सीएम मोहन यादव यूपी में अखिलेश और बिहार में तेजस्वी के बनेंगे ग्रहण?
Mohan Yadav: मध्य प्रदेश का चुनाव खत्म हुआ तो प्रदेश में एक बार फिर सीएम पद पर मामा यानि शिवराज सिंह चौहान का नाम हवा में तैरता दिखा और सभी समर्थक यहां तक प्रिडिक्टर भी आश्वस्त थे कि मामा फिर कुर्सी संभालेंगे। लाड़ली बहने भी इसी इंतजार में थी। उधर प्रह्लाद पटेल, नरेंद्र सिंह तोमर, वीडी शर्मा, ज्योतिरादित्य सिंधिया, कैलाश विजयवर्गीय जैसे कई नाम भी चर्चा में थे, पर एमपी में वोटर्स में 3 परसेंट की भागीदारी रखने वाले यादव समाज से सीएम पद का चेहरा ढूंढकर भाजपा ने आने वाले लोकसभा चुनाव के लिए उत्तर प्रदेश और बिहार के 11 से 12 परसेंट यादव वोटर्स को बड़ा सन्देश दे दिया है। मोहन राज के शुरू होते ही अगले 4 महीनों में होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा बड़ी सियासत की तरफ बढ़ रही है।
एमपी से साधेंगे दो राज्यों की राजनीति

मध्य प्रदेश में पिछली सरकार में कैबिनेट मिनिस्टर रहे मोहन यादव ने उज्जैन दक्षिणी से कांग्रेस के प्रत्याशी को 12 हजार से अधिक वोटों से हराया है। मोहन यादव ने खुद को चुने जाने के बाद सबसे पहले यही कहा कि मुझ जैसे छोटे कार्यकर्ता को भी पार्टी याद रखती है। यह वाक्य उनके समाज को आगामी लोकसभा चुनाव में साधेगा। उत्तर प्रदेश में यादव समाज की भागीदारी है। वहीं बिहार में भी नितीश कुमार और तेजस्वी यादव की राजनीति भी इस घोषणा से डगमगा सकती है। भाजपा ने मोहन यादव को मध्य प्रदेश का सीएम बनाकर यूपी और बिहार के यादव समा क सन्देश दे दिया है कि भाजपा उनके बारे में भी सोचती है ऐसे में दोनों राज्यों की राजनीति में नया बदलाव देखने को मिल सकता है।
अखिलेश और तेजस्वी की राजनीति पर ग्रहण?

मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव ने छात्र राजनीति से अपनी शुरुआत की थी। इनका कोई भी राजनितिक बैकग्राउंड नहीं है। 2013 में पहली बार एमपी विधानसभा पहुंचे मोहन यादव का कद तब बड़ा हो गया जब उन्होंने 2018 में भी जीत हासिल की और 2022 में शिवराज कैबिनेट में मंत्रीपद की शपथ ली। जानकारों के अनुसार मोहन यादव को सीएम पद की कुर्सी देने के लिए आरएसएस काफी गंभीर था। वहीं अचानक हुए इस एलान ने उत्तर प्रदेश में यादवों की राजनीति करने वाले अखिलेश यादव और बिहार में नितीश और तेजस्वी को एक बार फिर से सोचने के लिए मजबूर कर दिया है। यदि उन्होंने आत्ममंथन नहीं किया तो उनकी राजनीति पर ग्रहण लग सकता है क्योंकि ये दोनों ही नेता बड़े राजनीतिज्ञों के पुत्र हैं और विरासत में मिली पार्टी संभाल रहे हैं पर मोहन यादव जमीन से जुड़े कार्यकर्ता हैं।

ट्विटर पर राजनीति से कैसे लड़ेंगे जंग
उत्तर प्रदेश में विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव की राजनीति पर लगातार भाजपा और अन्य दलों के नेता तंज कसते आए हैं। कि वो चुनाव के चार साल तक बस ट्विटर पर राजनीति करते हैं। एक साल से कम समय वो जनता के बीच समय देते हैं। ऐसे में जमीन से जुड़कर चुनाव लड़ने के माहौल में उनके दावों को कितनी हवा मिलेगी यह कहना कठिन है क्योंकि एक वर्ग में उनकी पैठ है लेकिन इस वर्ग में सेंधमारी के लिए भाजपा ने मध्य प्रदेश से बिगुल बजा दिया है। राजस्थान में सीएम पद का एलान होते ही लोकसभा चुनाव की स्थिति और तस्वीर और साफ़ हो जाएगी।
कांग्रेस के दावों की निकाली हवा

ओबीसी वोटर्स पर राजनीति करने वाली कांग्रेस के बयानों की भाजपा में सिर्फ एक ओबीसी सीएम शिवराज सिंह चौहान है के दावों की भाजपा ने हवा निकाल दी। इस प्रेशर से निकलते हुए छत्तीसगढ़ में जहां आदिवासी सीएम और ओबीसी डिप्टी सीएम को पद दिया गया वहीं एमपी में भी इस प्रेशर से बाहर निकलते हुए ओबीसी समाज के मोहन यादव को सीएम का ताज पहना दिया। ऐसे में हिंदी भाषी राज्यों में ओबीसी पर राजनीति करने वाली पार्टियों को करारा जवाब भी भाजपा ने दे दिया है। इससे अब कांग्रेस को भी नए सिरे से लोकसभा चुनाव के लिए तैयारियों को जोर देना होगा।
यूपी के दामाद को एमपी में ताज

सुल्तानपुर के नगर कोतवाली के डिहवा निवासी ब्रह्मादीना यादव की बेटी सीमा यादव से मोहन यादव का विवाह हुआ है। ऐसे में उत्तर प्रदेश में भी जश्न का माहौल है और सुल्तानपुर में देर शाम से जश्न का माहौल है। यूपी की सियासत को देखते हुए भाजपा का यह फैसला आने वाले साल में किस रुख पर राजनीति को ले जाएगा यह तो समय बताएगा पर इस समय सभी पार्टियों की निगाह राजस्थान में मुख्यमंत्री के नाम पर है।

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