बनारस की महिलाओं और छात्राओं ने निकाला वुमनिया मार्च, थाली बजा कर बुलंद की आवाज

महिलाओं और छात्राओं पर जुल्म के खिलाफ बुलंद की आवाज
समान भागीदारी, उत्तम शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य, समान रोजगार के अवसर, सुरक्षा की मांग
-थाली बजा कर हक और हुकूक के लिए संघर्ष का ऐलान

By: Ajay Chaturvedi

Updated: 20 Apr 2019, 08:07 PM IST

वाराणसी. समान भागीदारी, उत्तम शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य, समान रोजगार के अवसर और सुरक्षा की गारंटी की मांग के साथ बनारस की महिलाएं, छात्राएं और युवतियां उतरीं सड़क पर। बीएचयू गेट से निकाला मोर्चा और पहुंच गईं अस्सी घाट। इस मार्च का नाम दिया 'वुमनिया मार्च'। अस्सी घाट पर आयोजित सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने संवैधानिक आधार पर समानता, स्वतंत्रता, राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक भागीदारी व सम्मान पूर्ण जीवन जीने का अधिकार मांगा।

कहा, फैल रहे नफरत और भेदभाव के खिलाफ समाज के हर तबके में एक ऐसी मुहिम जगाने की आशा कि जहां हर व्यक्ति के साथ न्याय, समता, बंधुता एवं सम्मानजनक व्यवहार किया जाए।

महिलाओं की मांगें

भागीदारी
-संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के एक तिहाई प्रतिनिधित्व के लिए 33 फीसदी आरक्षण लागू हो
-सरकारी और प्रशासकीय, निर्णय निर्माण में 50 फीसद आरक्षण हो
-नौकरियों में हर वर्ग (आरक्षित व अनारक्षित) में महिलाओं को 33 फीसद आरक्षण
-सरकार द्वारा जारी किए गए ठेके और लाइसेंस, जैसे रेहड़ी-पटरी, दुकान आदि छोटे माध्यम उद्यमिता क्षेत्र में महिलाओं क भागीदारी सुनिश्चित हो

शिक्षा
-सभी महिलाओं को बेहतर शिक्षा के द्वारा शिक्षा के हर स्तर पर लैंगिक भेदभाव खत्म किया जाए
-शैक्षणिक संस्थाओं में भयमुक्त वातावारण हो, जिसमें महिलाएं समान अवसर और सुविधाओं का इस्तेमाल कर पाएं
-विश्वविद्यालयों व कॉलेजों में स्थित महिला छात्रावासों में सुरक्षा के नाम पर कैद रखने वाली 'कर्फ्यू टाइमिंग नियम' खत्म किया जाए
-प्राथमिक से उच्च शैक्षणिक स्तर की संस्थाओं में स्वतंत्र Gender Sensitisation Cell की स्थापना हो
-शिक्षा पर जीडीपी का 10 प्रतिशत खर्च किया जाए

स्वास्थ्य

-स्वास्थ्य पर जीडीपी का 06 प्रतिशत खर्च किया जाए। स्वास्थ्य सुविधाओं को नियमित और नियंत्रित किया जाए
-सैनेटरी पैड्स से सभी प्रकार का टैक्स हटाया जाए
-सबको मुफ्त स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराई जाए, जरूरी दवाओं के मूल्य नियंत्रित हों और मुफ्त में जनता को मुहैया कराया जाए
-सभी क्षेत्रों में महिला शौचालय की उत्तम व्यवस्था हो
-महिलाओं के स्वास्थ्य और खानपान संबंधित जागरूकता अभियान चलाया जाए
रोजगार, वेतन
-संगठित और असंगठित क्षेत्रो में कामकाजी महिलाओं को स्वतंत्र आर्थिक इकाई के रूप में पहचान मिले
-महिला बुनकर, किसान को निश्चित मजदूरी व भत्ता दिया जाए
-महिलाओं को समान और 15,000 रुपये प्रतिमाह का न्यूनतम वेतन सुनिश्चित किया जाए
-सभी कामकाजी महिलाओं को वैतनिक महावारी, मातृत्व अवकाश सुनिश्चित हो
-हर क्षेत्र में महिला बैंक की स्थापना हो
-महिला एडहाक टीचर्स को नियमित कार्यरत टीचर्स के समान सभी सुविधाएं मुहैया कराई जाएं
-सभी कार्यस्थलों पर बच्चों की देखभाल के लिए शिशु गृह बनाए जाएं
-आईसीडीएस, आशा, मिड-डे-मील और अन्य स्कीम वर्कर्स को न्यूनतम वेतन, पेंशन व अन्य सामाजिक लाभ के साथ नियमित करें
-किसान, हैंडलूम वर्कर्स और खेतिहर मजदूरों की आत्महत्या से प्रभावित परिवारों की महिलाओं और बच्चों के पुनर्वास के लिए विशेष पैकेज लागू हो
-हर उम्र की विकलांग महिला, विधवा और 55 साल से अधिक उम्र की महिलाओं को 2000 रुपये प्रतिमाह पेंशन दिया जाए

सुरक्षा

-बिशाखा गाइडलाइन को कानूनी मान्यता देकर देश भर में लागू किया जाए
-आफ्स्पा कानून के महिला विरोधी चेहरे को देखते हुए इसे तत्काल हटाया जाए
-महिला पुलिस व गार्डों को अधिक प्रोत्साहन दिया जाए
-वुमेंस ट्रैफिकिंग के खिलाफ सख्त कानून बने
-मेटेरियल रेप को अपराध घोषित किया जाए

मार्च में डॉ इंदु पांडेय, जागृति राही, सुजाता भट्टाचार्य, अवंतिका, थ्रिति आदि शामिल थीं।

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