आखिर इस वजह से कैलाश पर्वत पर इंसानों की एंट्री है बैन,धार्मिक लेखों में भी हो चुका है जिक्र

आखिर इस वजह से कैलाश पर्वत पर इंसानों की एंट्री है बैन,धार्मिक लेखों में भी हो चुका है जिक्र

Arijita Sen | Publish: May, 18 2018 10:00:05 AM (IST) अजब गजब

लाख प्रयास के बावजूद पर्वतारोही हासिल नहीं कर पाए ये मुकाम, कैलाश पर्वत पर चढ़ने की हर कोशिश रही नाकाम

हम सभी ये बात जानते हैं कि दुनिया में माउंट एवरेस्ट सबसे ऊंची पर्वत चोटी है। इसकी ऊंचाई 8848 मीटर है। मांउट एवरेस्ट की चढ़ाई अब तक लगभग चार हजार लोग कर चुके हैं।

पर्वतारोही का शौक रखने वाले लोग इसके अलावा भी कई ऐसी पर्वत श्रृंखलाओं की चढ़ाई कर चुके हैं। लेकिन क्या आपने कभी किसी को कैलाश पर्वत की चढ़ाई करते हुए सुना है? इसका जवाब ना में ही मिलेगा।

आपको बता दें कैलाश पर्वत की ऊंचाई 6000 मीटर है जो कि एवरेस्ट के मुकाबले काफी कम है लेकिन बावजूद इसके पर्वतारोही इस पर चढ़ाई करने से कतराते हैं। आखिर ऐसा क्यों है? इसके पीछे क्या वजह हो सकती है? आइए आज हम आपको इस बारे में पूरी बात बताते हैं।

 

Kailash Parvat

तिब्बत के प्राचीन लेखों में इस बात का जिक्र किया गया है कि कैलाश पर्वत में किसी भी इंसान को जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी क्योंकि यहां बादलों के बीच देवताओं का निवासस्थल है। जो कोई यहां जाकर देवताओं को देखने का प्रयास करेगा उसे अपनी जान गंवानी पड़ेगी। बात अगर हिंदू धर्म की करें तो इसमें इस बात का जिक्र है कि कैलाश पर्वत पर महादेव का वास है।

 

Kailash Parvat

हालांकि इन सबके बावजूद कई बार पर्वतारोहियों ने इस पर चढ़ने की कोशिश की है लेकिन सफलता उनके हाथ नहीं लगी। इन पर्वतारोहियों में से एक है कर्नल विल्सन।

विल्सन ने कैलाश पर अपने चढ़ाई की अनुभव को शेयर करते हुए कहा कि कैलाश पर चढ़ाई करने के लिए और अंतिम छोर तक पहुंचने के लिए उन्होंने सबसे आसान रास्ता ढूंढ़ निकाला लेकिन अचानक हुई बर्फबारी के चलते वो ऐसा करने में नाकाम रहे।

विल्सन के अलावा भी कई ऐसे पर्वतारोही है जिन्हें कैलाश पर्वत पर या तो श्वास से संबंधित बीमारी या फिर कई अन्य परेशानियों का सामना करना पड़ा। इन सारी वजहों से वो भी अपनी मंजिल तक नहीं पहुंच सकें। अब हर बार ऐसा क्यों होता है इसका जवाब आज तक नहीं मिल पाया है।

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