11 करोड़ की छिपकली की तस्करी करते पकड़ा गया शख्स, मर्दाना जोश बढ़ाने के साथ ही एड्स-कैंसर में आती है काम

11 करोड़ की छिपकली की तस्करी करते पकड़ा गया शख्स, मर्दाना जोश बढ़ाने के साथ ही एड्स-कैंसर में आती है काम

Sunil Chaurasia | Publish: Sep, 03 2018 11:09:43 AM (IST) अजब गजब

एक टोके की कीमत ही 2 करोड़ 30 लाख रूपए है। इस हिसाब से पांच टोके की कीमत करीब साढ़े 11 करोड़ रुपये होती है

नई दिल्ली। बिहार के किशनगंज में SSB के जवानों को एक बड़ी सफलता हाथ लगी। जवानों ने एक ऐसे तस्कर को गिरफ्तार किया है, जो करोड़ों रुपये की छिपकली की तस्करी कर रहा था। आरोपी के पास से कुल पांच छिपकली बरामद हुए हैं। ये छिपकली टोके प्रजाति की हैं, जो छिपकली की एक दुर्लभ प्रजाति है। पूरा मामला बीते शनिवार का है। गलगलिया सीमा से करीब पंद्रह किलोमीटर की दूरी पर तैनात SSB के जवानों ने नक्सलवाड़ी के बाबूपाड़ा में इस तस्कर को गिरफ्तार किया। जवानों ने इन सभी पांच छिपकली को वन विभाग के हवाले कर दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक टोके की तस्करी के विषय में SSB को एक गुप्त सूचना मिली थी। जिसके बाद SSB ने उस इलाके में तैनात जवानों को सूचित कर दिया था। ये तस्कर इन सभी छिपकलियों को एक गिरोह को बेचने वाला था, जिसके लिए उसे 2 करोड़ 30 लाख रूपए मिलने वाले थे। जबकि एक टोके की कीमत ही 2 करोड़ 30 लाख रूपए है। इस हिसाब से पांच टोके की कीमत करीब साढ़े 11 करोड़ रुपये होती है। गिरफ्तार तस्कर पर वन जीव सरंक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

आरोपी तस्कर का नाम अमल सरकार साकिन बताया जा रहा है। जिसमे पूछताछ में बताया कि वो इन सभी छिपकलियों को नेपाल लेकर जा रहा था। इस काम की ज़िम्मेदारी उसे दी गई थी, टोके के बदले मिलने वाले 2 करोड़ 30 लाख रूपए में अमल का कमीशन भी तय किया गया था। बता दें कि इस प्रजाति की छिपकली का इस्तेमाल दवाइयों में किया जाता है। टोके के मांस से बनने वाली दवाइयां मर्दाना शक्ति बढ़ाने के काम में आती है। इसके अलावा इसे एड्स और कैंसर के रोगों में भी इस्तेमाल किया जाता है।

टोके प्रजाति की छिपकली को गीको नाम से भी जाना जाता है। इस दुर्लभ प्रजाति की छिपकली मुख्यतौर पर इंडोनेशिया, बांग्लादेश, फिलीपींस, नेपाल के अलावा पूर्वोत्तर भारत और बिहार में भी पाई जाती है। हालांकि अब इनकी संख्या काफी कम हो चुकी हैं और ये प्रजाति लुप्त होने की कगार पर है।

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