
नई दिल्ली।
बच्चों को सोशल मीडिया के दुष्प्रभाव से बचाने के लिए आस्ट्रेलिया ने सख्त कदम उठाए हैं। हालांकि, कई और देश पहले से अपने यहां नियम लागू किए हुए हैं, मगर आस्ट्रेलिया का फैसला अब तक सबसे कड़ा निर्णय है।
बच्चों को सोशल मीडिया के दुष्प्रभाव से बचाने के लिए आस्ट्रेलिया ने नया विधेयक तैयार किया है। इसके तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए 16 साल से कम उम्र के बच्चों को अनुमति देने से पहले माता-पिता से मंजूरी लेना अनिवार्य होगा।
आस्ट्रेलिया में इस विधेयक के संसद से पास होते ही फेसबुक और इंस्टाग्राम समेत अन्य सोशल मीडिया कंपनियां यूजर्स की उम्र का सत्यापन करने और अभिभावकों से मंजूरी लेने के लिए बाध्य हो जाएंगी। आस्ट्रेलियाई सरकार की ओर से प्रकाशित विधेयक के मसौदे के मुताबिक कानून का उल्लंघन कर बच्चों को अनुमति देने वाली कंपनियों को एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है। आस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री के असिस्टेंट मानसिक स्वास्थ्य एवं आत्महत्या निषेध मंत्री डेविड कोलमैन के मुताबिक नया विधेयक सोशल मीडिया कंपनियों से बच्चों को बचाने में पूरी दुनिया को राह दिखाएगा।
यह बदलाव फेसबुक की मैनेजर फ्रांसेस हौजेन के उस बयान के बाद हुआ जिसमें उन्होंने कहा था कि जनहित और कंपनी हित में टकराव की स्थिति में उनकी कंपनी अपने हित को प्राथमिकता देगी। गौरतलब है कि आस्ट्रेलिया इंटरनेट पर नियंत्रण के लिए अंतरराष्ट्रीय नियामक के गठन की अपील करता रहा है। इसके पहले यहां की संसद कानून पास करके गूगल और फेसबुक को न्यूज सामग्री के लिए भुगतान करने को बाध्य कर चुकी है।
नया विधेयक बच्चों पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव को कम करने और निजता की रक्षा को पुख्ता करने के लिए लाया गया है। आस्ट्रेलिया में तनाव और अन्य मानसिक बीमारियों के चपेट में आने वाले बच्चों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। मंत्री कोलमैन ने कहा कि इसका कोई एक कारण नहीं है, लेकिन इतना पक्का है कि सोशल मीडिया भी एक वजह है। अटॉर्नी जनरल माइकलिया कैश ने कहा, आस्ट्रेलियाई लोग बड़ी कंपनियों को दिए गए निजी डाटा की सुरक्षा के प्रति चिंतित रहते हैं, नया विधेयक यह सुनिश्चित करेगा की कंपनियां डाटा और निजता के प्रति अधिक जिम्मेदार बनें।
आस्ट्रेलिया के नए विधेयक पर फेसबुक की क्षेत्रीय नीति निदेशक मिया गार्लिक ने कहा कि उनकी कंपनी हमेशा से निजता कानून का समर्थन करती रही है। गार्लिक ने कहा कि बच्चों के डाटा को लेकर हम अंतरराष्ट्रीय नियमन का समर्थन करते हैं जैसे कि ब्रिटेन का एज एप्रोपिएट डिजाइन कोड।
इस मामले में सख्ती बरतने वाले कई और देश हैं। इनमें प्रमुख रूप से ब्रिटेन, चीन और अमरीका शामिल हैं, जबकि भारत भी इस दिशा में तैयारी कर रहा है।
Published on:
26 Oct 2021 10:49 am
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