29 अक्टूबर 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

Rajasthan Highcourt: कुलपति 2 अगस्त तक नहीं कर पाएंगे कामकाज

Rajasthan Highcourt: कुलपति प्रो. आर. पी. सिंह के कामकाज करने पर पिछले साल 11 अक्टूबर से लगी है रोक।
1 minute read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

अजमेर

•

image

raktim tiwari

•

Updated: 12 Jul 2019, 4:49 PM IST

mds university vice chancellor issue

mds university vice chancellor issue

अजमेर

राजस्थान हाईकोर्ट (Rajasthan Highcourt) ने महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय (MDSU)के कुलपति को कोई राहत नहीं दी है। शुक्रवार को इस मामले की सुनवाई हुई। इसमें कुलपति के कामकाज पर 2 अगस्त तक जारी रखने के आदेश दिए गए।

लक्ष्मीनारायण बैरवा की जनहित याचिका पर राजस्थान हाईकोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश प्रदीप नंद्राजोग की खंडपीठ ने बीते साल 11 अक्टूबर को महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आर. पी. सिंह (Prof r.p.singh)को नोटिस जारी कर 26 अक्टूबर तक कामकाज पर रोक लगाई थी। इसके बाद न्यायालय ने रोक 1,16, 28 नवंबर, 3 दिसंबर और 11 और 29 जनवरी, 21, 25 एवं 27 फरवरी, 6 और 27 मार्च, 4 एवं 18 अप्रेल तथा 12 जुलाई बढ़ा दी थी। शुक्रवार शाम मामले की सुनवाई हुई। इसमें हाईकोर्ट ने कुलपति के कामकाज पर रोक जारी रखने के आदेश दिए।

read more: प्रोस्पेक्टस में सिर्फ फोटो, गायब हुआ वीसी का मैसेज

चरमरा गई है व्यवस्थाएं
कुलपति की गैर मौजूदगी से नौ महीने में विश्वविद्यालय की व्यवस्थाएं चरमरा चुकी हैं। राजभवन (Rajbhavan) द्वारा डीन कमेटी के अधिकार सीमित हैं। समिति ने वित्तीय वर्ष 2019-20 का अप्रेल से जून तक लेखानुदान पारित करने के अलावा परीक्षा एवं कुछ कर्मचारियों के सातवें वेतमान फिक्सेशन का कामकाज शुरू किया है। बगैर कुलपति के सभी शिक्षकों, कर्मचारियों, अधिकारियों को सातवें वेतनमान का लाभ, प्रबंध मंडल और एकेडेमिक कौंसिल की बैठक अटकी हुई है। नवां दीक्षान्त समारोह, शोध प्रवेश परीक्षा और अन्य कार्य नहीं हो पाए हैं।

read more: डीन के बिना संकट में यूनिवर्सिटी, ठप हो जाएगा काम

विधानसभा में उठा चुका है मामला
कुलपति के कामकाज पर लगी पाबंदी को लेकर सरकार ने विश्वविद्यालय से सूचना मांगी है। विधानसभा (Rajasthan Assembly ) में उठे सवाल के बाद विश्वविद्यालय को पत्र भेजा गया है। इसमें कुलपति की अनुपस्थिति में विश्वविद्यालय में कामकाज चलने, एक्ट और अन्य जानकारियां मांगी गई है।