घोषणा तो हुई लेकिन,बिना भवन व कर्मचारियों के कागजों में ही चल रही तहसीलें

नवसृजित,क्रमोन्नत तहसीलों तथा उपतहसीलों का मामला

कर्मचारियों, अधिकारियों के पद सृजित नहीं हुए

भवन निर्माण के लिए बजट भी नहीं मिला

राजस्व मंडल

By: bhupendra singh

Published: 19 Sep 2021, 08:12 PM IST

भूपेन्द्र सिंह

अजमेर. राज्य मेंं राजस्व ढांचा पूरी तरह चरमराया हुआ है। जहां तहसीलदारों के 74 फीसदी, नायब तहसीलदारों के 54 और उप पंजीयकों के 86 फीसदी पद रिक्त चल रहें हैं। वहीं सरकार के 6 नव सृजित, 21 क्रमोन्नत तहसीलें तथा 27 उपतहसीलें का संचालन बिना भवनों के ही हो रहा है। इससे लोगों को कितनी सुविधा हो रही है इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। सरकार ने बजट के दौरान राज्य में नव सृजित, क्रमोन्नत तहसीलें तथा उपतहसीलें की घोषणा की थी लेकिन अब तक इनके लिए स्थाई तो दूर अस्थाई भवनों की व्यवस्था नहीं की जा सकी। तहसीलों के लिए कर्मचारियों के पद भी स्वीकृत नहीं हो सके। नव सृजित, क्रमोन्नत तहसीलें तथा उपतहसीलें का काम अभी भी पुरानी तहसील से ही चल रहा है।

अजमेर में केवल जमीन का आवंटन हुआ

अजमेर में बांदनवाड़ा उप तहसील की घोषणा की गई है। इसके लिए जमीन का आवंटन तो गया है लेकिन निर्माण के लिए बजट नहीं मिला है। न ही बांदनवाड़ा उपतहसील के लिए स्टाफ सेंक्शन नहीं हुआ है। तहसीलदार की भी नियुक्ति नहीं हुई है। अभी भी तसहील भिनाय से बांदनवाड़ा तहसील चल रही है।

21 क्रमोन्नत तहसीलें

अलवर में टपूकड़ा को क्रमोन्नत तहसील बनाया गया है। इसी तरह बाड़मेर में कल्याणपुरा, बाड़मेर ग्रामीण, चित्तौडगढ़़ में बस्सी, दौसा में बहरावपड़ा, बैजूपाड़, सैंथल, जयपुर में मोधोराजपुरा, आंधी, तंूगा(बस्सी), जैसलमेर की सम, जोधपुर में आऊ ,सेतरावा, झुंझुनूं में गुढ़ागौडज़ी, मंडावा, करौली में महावीरजी, नागौर में सांजू, प्रतापगढ़ की सुहागपुर,दलोट, सवाईमाधोपुर में मित्रपुरा, सीकर की नेछवा, टोंक में नगर फोर्ट तथा उदयपुर में कुराबड़ क्रमोन्नत तहसील बनाई गई है।

27 उप तहसीलें

अजमेर में बांदनवड़ा में उपतहसील की घोषड़ा की गई है। इसी तरह अलवर में गडाला (बहरोड), बांरा में कोयला, बाड़मेर में दूदवा, बाटाड़ू, बीकानर में देशनोक, चित्तौडगढ़़ में जावदा, चूरू में साहवा, काटर छोटी, दौसा में गुढ़ा कटला, पापड़दा, कुंडल, डूंगपुर में बनकोडा, ओबरी, हनुमानगढ़ में फेफना,डूंगरान, जयपुर में बिचून, ताला,जोधपुर में आगोलाई, बोरूंदा, गुडा बिशनाइया, करौली में गुढ़ा चन्द्र नागौर में चितावा, पाली में आनन्दपुर कालू, राजसमन्द में दिवेर तथा सीकर में रींगस में उप तसहील बनाई गई है।

6 नवसृजित तहसीलें

अलवर में नौगांव, बाड़मेर की नोखड़ा, डूंगरपुर में दोकड़ा तथा गामड़ी-आहड़ा, जयपुर में जोबनेर, सिरोही में देलदर, नवसृजित तहसीलें बनाई गई हैं।

फैक्ट फाइल

राज्य की 194 तहसीलों में तहसीलदार नहीं है। जबकि 186 तहसील उप तहसीलो में नायब तहसीलदार भी नहीं हैं। सरकार नायब तहसीलदार को अनुभव सीमा में दो साल ही छूट देकर ही तहसीलदार बना पा रही है और नही डीपीसी के जरिए वरिष्ठ गिरदावरों नायब तहसीलदार ही बना पा रही है। 4918 पटवार घर सूने पड़े हैं। पटवारियों के 40 प्रतिशत पद रिक्त चल रहे हैं। सरकार के पास तहसीलदारों के पद पर नियुक्ति के तहसीलदार ही उपलब्ध नहीं है। नायब तहसीलदारो का भी यही हाल है। एक तहसीलदार को दूसरी तहसील को तो कहीं तहसीलदार को उप पंजीयक का चार्ज देकर काम चलाया जा रहा है। उप पंजीयक कार्यालयों में सन्नाटा ही पसरा है। बड़ी संख्या में बीडीओ के पद भी खाली है।

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bhupendra singh Reporting
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