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प्यार करना गुनाह नहीं: हाईकोर्ट ने एक महीने में अंतर-धार्मिक या अंतर-जातीय विवाह के 100 से ज्यादा जोड़ों को दी सुरक्षा

हाईकोर्ट ने 12 ऐसे मामले भी खारिज किये जिनमें पुरुष साथी के खिलाफ अपहरण का मुकदमा दर्ज कराया गया था
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प्रयागराज

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Mohd Rafatuddin Faridi

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Updated: 2 Dec 2020, 6:36 PM IST

allahabad high court

पत्रिका न्यूज नेटवर्क

प्रयागराज. उत्तर प्रदेश में इन दिनों कथित 'लव जेहाद’ की चर्चा जोरों पर है। यूपी की योगी सरकार ने कानून बनाकर 'अवैध धर्मांतरण' को अपराध की श्रेणि में ला दिया है और इस कानून के तहत 10 साल तक की सजा व जुर्माना का भी प्रावधान है। लव जेहाद कांस्पिरेसी थ्योरी की चर्चा के बीच आया इलाहाबाद हाईकोर्ट का वह निर्णय भी खूब सुर्खियों में रहा, जिसमें हाईकोर्ट ने 31 अक्टूबर को दो अलग-अलग सम्प्रदायों के प्रेमी जोड़ों की याचिका खारिज करते हुए कहा था कि महज शादी के लिये धर्म परिवर्तन को वैध नहीं करार दिया जा सकता। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 31 अक्टूबर को इस निर्णय का जिक्र करते हुए बयान भी दिया था कि उनकी सरकार 'लव-जेहाद' के खिलाफ एक कानून लाएगी। बाद में सरकार ने उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश, 2020 लागू किया।


पर अदालत और सरकार दोनों अलग हैं। हाईकोर्ट का यह सिर्फ एक मामला था, जिसे आधार बनाकर कोई राय कत्तई नहीं कायम की जा सकती। अगर आंकड़ों पर नजर डालें तो इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले एक महीने में अंतर-धार्मिक या अंतर-जातीय विवाह के 120 जोड़ों को सुरक्षा दी है। न सिर्फ उन्हें संरक्षण दिया है बल्कि उनकी स्व्तंत्रता की भी रक्षा की है। 117 मामलों में वरष्ठि पुलसि अधीक्षकों को उन जोड़ों की शिकायतों पर कार्रवाई करने को कहा जो अलग-अलग धर्म या जातियों से थे। उनकी जान और स्वतंत्रता को अपनों से ही खतरा था। कोर्ट ने इन मामलों में एक तरफ तो एसएसपी से संपर्क करने की अनुमति दी और दूसरी ओर एसएसपी को भी व्यस्कता व विवाहा आदि से जुड़े तथ्यों की पड़ताल और सत्यापित करने के बाद कानून के मुताबिक कार्रवाई का निर्देश दिया। इनमें से कई मामलों में धर्म परिवर्तन भी किया गया था।


यही नहीं हाईकोर्ट ने पिछले महीने कम से कम 12 ऐसे मामलों को भी खारिज कर दिया जिनमें 366 के तहत पुरुष साथी पर अपहरण का मुकदमा दर्ज कराया गया था। इनमें धर्मिक रूपांतरण से जुड़े मामले भी शामिल थे। इनमें यह भी देखा गया कि दोनों बाकायदा जोड़े के रूप में रह रहे थे। ऐसा प्रायः देखा भी जाता है कि अंतर-जातीय या अंतर-धार्मिक प्रेम विवाहों के कई मामलों में परिवार प्रेमी जोड़ों के फैसले से असंतुष्ट रहते हैं। कई बार पुरुष साथी के खिलाफ महिला का अपहरण करने की शिकायत भी दर्ज करा दी जाती है।

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