कुंभ के नाम पर सियासी उबाल, प्रधानमंत्री के भाषण के बाद उठी नाम बदलने की मांग

योगी सरकार ने अर्धकुंभ का नाम किया कुंभ, कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों ने किया विरोध

प्रयागराज। आगामी कुंभ भव्य और दिव्य जरूर होगा लेकिन तप की धरती से सियासत भी परवान चढ़ेगी जिसकी शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते दिनों प्रयागराज में हुई जनसभा को संबोधित करते हुए कर दी। मोदी की रविवार को झूंसी के अंदावा में हुई जनसभा में मंच से बार—बार अर्धकुम्भ कहे जाने को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। दरअसल इस बार अर्धकुंभ ही है लेकिन योगी आदित्यनाथ सरकार इसे कुंभ के बताकर प्रोजेक्ट कर रही है।

अब जबकि प्रधानमंत्री ने खुद इसे अर्धकुंभ कहा है तो विपक्षी दलों ने पीएम सम्बोधन को आधार बनाकर योगी सरकार पर बड़ा हमला बोला है। विपक्षी दलों ने अर्धकुम्भ को कुम्भ घोषित किये जाने के योगी सरकार के फैसले पर सवाल खड़े करते हुए कहा है कि सरकार का ये फैसला पूरी तरह से गलत है और सनातन धर्म की परम्पराओं के भी खिलाफ है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभय अवस्थी ने कहा कि पीएम मोदी ने पद की मर्यादा का ध्यान करते हुए अर्धकुम्भ को अर्धकुम्भ ही कहकर सम्बोधित किया है, लेकिन योगी सरकार इसको कुम्भ बताकर जनता के साथ धोखा कर रही है।

अवस्थी ने कहा कि प्रदेश सरकार और प्रयागराज मेला प्राधिकरण अफसर कुम्भ के रूप में प्रचारित किए जा रहे मेले के पोस्टर—बैनर और दूसरी प्रचार सामग्रियों पर कुम्भ हटाकर अर्धकुम्भ ही लिखें। वहीं बसपा ने भी पीएम के अर्ध कुम्भ के सम्बोधन पर सरकार के फैसले पर सवाल खड़े किए हैं। दूसरी ओर, इस मामले में योगी कैबिनेट के अहम सहयोगी और राज्य सरकार के प्रवक्ता सिद्धार्थ नाथ सिंह ने राज्य सरकार का बचाव किया है। उन्होंने कहा है कि कुम्भ और अर्धकुम्भ में कोई फर्क नहीं है। सरकार ने अर्ध कुम्भ को कुम्भ और कुम्भ को महाकुम्भ कहने का फैसला लिया है। सरकार के इस फैसले का साधु संतों के साथ ही ज्यादातर लोगों ने स्वागत भी किया है। सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा है कि अर्ध कुम्भ और कुम्भ दोनों को लेकर भाव एक ही है, इसलिए इसको लेकर विवाद खड़ा करना कतई उचित नहीं है।

प्रसून पांडे
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