हत्या के सात आरोपियों की आजीवन कारावास की सजा बरकरार, हाईकोर्ट की अन्य खबरें

जमानत निरस्त, गिरफ्तार कर जेल भेजने का निर्देश

By: Akhilesh Tripathi

Published: 24 Jul 2018, 09:49 PM IST

इलाहाबाद. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने झांसी के बरूआ सागर थाना क्षेत्र में बालू खनन ठेका विवाद में 26 सितम्बर 93 को सुनील सिंह की गोली मारकर हुई हत्या के लिए 8 आरोपियों को दोषी करार दिया है और सत्र न्यायालय द्वारा उन्हें सुनायी गयी आजीवन कारावास की सजा की पुष्टि करते हुए बहाल रखी है।

कोर्ट ने सीजेएम झांसी को निर्देश दिया है कि वह सुनवाई के दौरान मृत महेश यादव के अलावा अन्य सात आरोपियों को गिरफ्तार कर सजा भुगतने के लिए जेल भेजे। कोर्ट ने सजायाफ्ता आरोपियों को मिली जमानत निरस्त कर दी है।


यह आदेश न्यायमूर्ति नाहिद आरा मुनीस तथा न्यायमूर्ति सी.डी.सिंह की खण्डपीठ ने संग्राम सिंह व अन्य आरोपियों की सजा के खिलाफ अपील को खारिज करते हुए दिया है। अपील पर आरोपियों को सत्र न्यायालय द्वारा दी गयी आजीवन कारावास की सजा को कोर्ट ने सही करार दिया।

पीड़ित पक्ष की तरफ से अधिवक्ता ए.के.ओझा ने प्रतिवाद किया और कहा कि आरोपियों ने दिनदहाड़े घेर कर हत्या की है। चश्मदीद गवाहों के बयान व मौके पर मिले साक्ष्यों के आधार पर सामूहिक रूप से हत्या में आरोपियों के लिप्त होने के पर्याप्त सबूत है। कमलापति राय ने संग्राम सिंह, मेहर सागर, मेहर सहाय, खलक सिंह, मोहन बिरथरे, जगवीर सिंह, हरि सिंह उर्फ बबली व महेश यादव के विरुद्ध अपने भतीजे की हत्या का आरोप लगाया। सभी अरोपियों को सत्र न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा सुनायी थी। हाईकोर्ट ने सजा को सही करार दिया है।

एस.एस.सी. मिलिट्री फोर्स भर्ती मामले की सुनवाई जारी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कर्मचारी चयन आयोग की 2011 की पैरामिलिट्री फोर्स की भर्ती में अनियमितता की शिकायत को लेकर दाखिल सैकड़ों याचिकाओं की सुनावई जारी है। कोर्ट ने आयोग से स्पष्ट तौर पर यह बताने को कहा है कि 2011 की भर्ती में कितनी सीटें खाली रह गयी है।

याचियों ने आरोप लगाया है कि 2016 में मांगी गयी आर.टी.आई. में 2800 पद खाली होना बताया गया है और लगातार नियुक्तियां जारी है। कुछ याचियों का कहना है कि अभी भी काफी पद खाली है जबकि आयोग का कहना है कि 2011 के बाद 2012, 2013 व 2015 की भर्तियां हो चुकी है, 2011 की भर्ती में न्यूनतम अंक से अधिक अंक पाने वाले अभ्यर्थियों का चयन हो चुका है। इस पर कोर्ट ने आयोग के अधिवक्ता सहायक सालीसिटर जनरल ज्ञान प्रकाश से हलफनामा मांगा है कि 2011 की भर्ती में कोई पद खाली है या नहीं? अजीत सिंह व अन्य सैकड़ों याचियों की तरफ से अधिवक्ता विजय गौतम ने बहस की। न्यायमूर्ति अश्विनी कुमार मिश्र याचिकाओं की सुनवाई कर रहे हैं। अगली सुनवाई 26 जुलाई को होगी।

 

जनतंत्र में जनप्रतिनिधित्व कानून की भूमिका अहमः बी.एन.सिंह
भारतीय निर्वाचन आयोग के अधिवक्ता बी.एन.सिंह ने कहा है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनतंत्र में चुनाव आयोग की अहम भूमिका होती है। संविधान में चुनाव आयोग को निष्पक्ष चुनाव कराने की असीमित शक्तियां दी गयी है। संसद ने चुनाव प्रक्रिया का संचालन लोकसभा, विधानसभा सीटों का निर्धारण, परिसीमन व आरक्षण करने तथा मतदाता सूची व जनगणना कराने की जनप्रतिनिधित्व कानून में विस्तृत प्रक्रिया दी गयी है। उन्होंने जन प्रतिनिधित्व कानून की विस्तृत जानकारी दी।

गोष्ठी की अध्यक्षता प्रदेश उपाध्यक्ष शेषमण मिश्र व संचालन विवेक शर्मा ने किया। इकाई के अध्यक्ष नरसिंह दीक्षित ने धन्यवाद ज्ञापन किया। शुभम अग्रवाल ने विषय प्रवेेश रखा। गोष्ठी में हरवंश सिंह, उमाशंकर मिश्र, प्रमोद सिंह, आशीष दूबे, महेन्द्र मिश्र, मनोज सिंह, जी.पी.सिंह, वत्सला पाण्डेय, सभाजीत सिंह, अरविन्द गोस्वामी, जितेन्द्र पासवान आदि मौजूद थे।

 

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