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इस विभाग से न करें न्याय की उम्मीद

locationअलवरPublished: Jan 15, 2024 11:31:28 am

Submitted by:

susheel kumar

सरकार अफसरों की तैनाती इसलिए करती है कि वह जनता की शिकायतों का निस्तारण करें। उनका न्याय दें लेकिन जिला परिषद में पिछले 14 सालों में 450 से ज्यादा शिकायतें लंबित चल रही हैं। इनके लिए समय-समय पर जांच कमेटी तो बनी लेकिन उनका निर्णय नहीं आया। कुछ जांच अधिकारी बदल गए तो कुछ का निधन हो गया। किसी का ट्रांसफर दूसरे जिलों में हो गया। शिकायत करने वाली जनता आज भी न्याय की आस लगा बैठी है।

इस विभाग से न करें न्याय की उम्मीद
इस विभाग से न करें न्याय की उम्मीद
जिला परिषद : कैसे मिले फरियादियों को न्याय...10 तो कोई 14 साल से जांचें अटकीं
- 12 साल में 450 से ज्यादा शिकायतें अभी चल रही हैं लंबित, फरियादियों की टूट रही आस

- किसी फरियादी ने लगाए अफसर पर भ्रष्टाचार के आरोप तो किसी ने नेताओं को लपेटा
- परिषद के अफसरों ने जांच कमेटियां बनाई लेकिन इन कमेटियों के लोग रिटायर हो गए
सरकार अफसरों की तैनाती इसलिए करती है कि वह जनता की शिकायतों का निस्तारण करें। उनका न्याय दें लेकिन जिला परिषद में पिछले 14 सालों में 450 से ज्यादा शिकायतें लंबित चल रही हैं। इनके लिए समय-समय पर जांच कमेटी तो बनी लेकिन उनका निर्णय नहीं आया। कुछ जांच अधिकारी बदल गए तो कुछ का निधन हो गया। किसी का ट्रांसफर दूसरे जिलों में हो गया। शिकायत करने वाली जनता आज भी न्याय की आस लगा बैठी है। उन्हें उम्मीद है कि भाजपा की नई सरकार में भ्रष्टाचारियों व गड़बड़ी करने वालों पर कार्रवाई का डंडा चलेगा।
सरकार से लेकर एबीसी के जरिए जिला परिषद के पास दर्जनों शिकायतें नेताओं से अधिकारियों की पहुंचीं। किसी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे तो किसी पर घोटालों के। 16 पंचायत समितियों से करीब 1158 परिवाद बीते 12 सालों में आए लेकिन करीब 450 प्रकरण अभी भी लंबित हैं। इनके लंबित होने का कारण राजनीतिक भी बताया जा रहा है और कुछ अन्य कारण भी। जनता ने तहसील से लेकर ब्लॉक, पंचायत समिति से लेकर जिला परिषद तक शिकायतों पर कार्रवाई के लिए चक्कर लगाए लेकिन अब तक कार्रवाई नहीं हो पाई। इस संबंध में जिला परिषद सीईओ प्रतिभा वर्मा से संपर्क किया गया लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ।

आरोपियों का कार्यकाल ही हो गया खत्म
कई प्रकरण तो वर्ष 2010 से जिला परिषद और पंचायत समितियां से केवल रिपोर्ट प्राप्त होने के अभाव में ही अटके हुए हैं। जिन सरपंचों, अन्य जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों के विरुद्ध ये जांचें लंबित हैं, उनमें से अधिकांश का तो कार्यकाल भी खत्म हो चुका है। ऐसे में जांच के बाद दोषी पाए जाने पर विभाग क्या कार्रवाई करेगा? इस पर भी सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।
इन प्रकरणों की जांच है लंबित

- वर्ष 2016 में कार्यवाहक विकास अधिकारी की ओर से साधारण सभा में प्रधान बहरोड़ के ससुर की ओर से भाग लेने की जांच जिला परिषद के सहायक अभियंता और पंचायत प्रसार अधिकारी को सौंपी गई थी। वर्ष 2016 से अभी तक रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई। दोनों अधिकारियों का यहां से तबादला हो चुका है।
- भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के पुलिस अधीक्षक की ओर से वर्ष 2015 में ग्राम पंचायत इस्माइलपुर के प्रकरण में शिकायत प्राप्त हुई। आज भी यह जांच लंबित है।
- ग्राम पंचायत बर्डोद में खेल के मैदान में चार दिवारी की घटिया सामग्री निर्माण की शिकायत वर्ष 2016 में प्राप्त हुई। इसमें जांच अधिकारी जिला परिषद के अधिशासी अभियंता दिनेश बड़सर को बनाया गया। वर्ष 2020 के बाद आज तक जांच के लिए कोई पत्र जिला परिषद ने जारी नहीं किया। जांच अधिकारी 3 महीने पहले रिटायर हो चुके हैं। इसी ग्राम पंचायत में जोहड पर अतिक्रमण कर दुकान बनाने की शिकायत वर्ष 2015 में प्राप्त हुई। जांच अधिकारी वर्ष 2017 में रिटायर हो गए। उसके बाद आज तक दूसरा जांच अधिकारी ही नहीं बनाया गया।
- जिला कलेक्टर से विभाग को वर्ष 2011 में खानपुर मेवान में भ्रष्टाचार की शिकायत प्राप्त हुई। 12 साल से यह शिकायत जिला परिषद अलवर में लंबित चल रही है।

- मुख्यमंत्री कार्यालय से ग्राम पंचायत किथूर में सिंगल फेस बोरिंग का विद्युत बिल नहीं भरने की शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय से प्राप्त हुई। वर्ष 2016 से यह शिकायत जिला परिषद में लंबित है।
- एसीबी से वर्ष 2013 में ग्राम पंचायत जोड़िया पट्टी की शिकायत प्राप्त हुई, जिसमें बोरवेल व टंकी का पैसा खुर्द-बुर्द करने की जांच रिपोर्ट 10 साल से लंबित है।
- वर्ष 2010 में लक्ष्मणगढ़ की पूर्व सरपंच से चार कार्यों में अधिक व्यय राशि वसूलने का प्रकरण पिछले 13 सालों से जिला परिषद में लंबित है। इसमें 16 स्मरण पत्र जारी हो चुके हैं।
- ग्राम पंचायत ततारपुर में गलत तरीके से पट्टा जारी करने की शिकायत वर्ष 2017 में प्राप्त हुई। आज तक लंबित है।

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